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होली में चुदाई : खूब चोदा अपनी माँ को होली में रंग लगा कर

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हेलो दोस्तों आज मैं आपको अपने ज़िंदगी की सबसे हसीन होली की सेक्स कहानी सुना रहा हु, आज का दिन मेरे ज़िंदगी में एक अलग ही रंग भर दिया, होली में चुदाई का मजा ही कुछ और होता है, वो भी अगर चुदाई अपने परिवार में ही हो, मैं तो आज अपने मम्मी की चुदाई ही कर दी, मजा आ गया है दोस्तों अपने हॉट जबरदस्त सेक्स की रानी प्यारी माँ. जिसकी बूर की तो मैंने थोपडा ही बिगाड़ दिया अपने मोटे और काले लण्ड से, मैं आपका टाइम खराब ना करते हुए, आज मैं आपको अपनी ये सच्ची कहानी लिख रहा हु, पहले तो आप सब को होली की शुभकामनाये, मेरे प्यारे नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम के दोस्तों.

सच पूछो तो मेरे प्यारे दोस्त मुझे सारे त्योहारों में यह होली का उत्सव बिल्कुल पसन्द नहीं है.. मैंने पहले कभी भी होली नहीं खेली.. पिछले चार साल मैंने कॉलेज होस्टल में ही बिताया.. मेरे अलावा घर में मेरे बाबूजी और मम्मी है.. मेरी छोटी बहन का विवाह पिछले साल हो गया था.. मैंने पहले होली में अपने बहन की चूचियाँ कई बार दबाई थी, रंग लगाने के बहाने, और बड़ी बशरवी से इंतज़ार करता था था की होली आये, क्यों की मुझे अपने बहन की चूचियाँ छूने का और माँ को पीछे पकड़ने का और उनके गांड में रगड़ने का मौका मिलता था. मेरी बहनरेनू होली में घर नहीं आ पाई.. लेकिन उसके जगह पर हमांरे बाबा होली से कुछ दिन पहले हमांरे पास हमसे मिलने आ गये थे.. बाबा की उम्र करीब सत्तर साल है, लेकिन इस उम्र में भी वे खूब हट्टे कट्टे दिखते हैं.. उनके बाल सफेद होने लगे थे लेकिन सर पर पूरे घने बाल थे.. बाबा चश्मा भी नहीं पहनते थे.. मेरे पापा जी की की उम्र करीब बयालीस साल की होगी और मम्मी की उम्र छत्तीस साल की.. मम्मी कहती है कि उसकी शादी 14 वे साल में ही हो गई थी और साल बीतते बीतते मैं पैदा हो गया था.. मेरे जन्म के 2 साल बाद रेनू पैदा हुई..

अगर मैं अपने मम्मी को अप्सरा और सेक्स की देवी कहूं तो शायद कोई गलत बात नहीं होगा, मैंने अब जरा मम्मी के बारे में बताउँ.. वो गाँव में पैदा हुई और पली बढ़ी.. पांच भाई बहनों में वो सबसे छोटी थी.. खूब गोरा दमकता हुआ रंग, गजब का नहीं नकस लम्बी, चौडे कन्धे, खूब उभरी हुई छाती, उठे हुए स्तन और मस्त, गोल गोल भरे हुए नितम्ब.. जब मैं 14 साल का हुआ और मर्द और औरत के रिश्ते के बारे में समझने लगा तो जिसके बारे में सोचते ही मेरा लौड़ा खड़ा हो जाता था, वो मेरी मम्मी मालती ही है.. मैने कई बार मालती के बारे में सोच सोच कर हत्तु मारा होगा लेकिन ना तो कभी मालती का चुची दबाने का मौका मिला, ना ही कभी उसको अपना लौड़ा ही दिखा पाया.. इस डर से क़ि अगर घर में रहा तो जरुर एक दिन मुझसे पाप् हो जायेगा, 8वीं क्लास के बाद मैं जिद कर होस्टल में चला गया.. मम्मी को पता नहीं चल पाया कि उसके इकलौते बेटे का लौड़ा मम्मी की बुर के लिए तड़पता है.. छुट्टियों में आता था तो चोरी छिपे मालती की जवानी का मज़ा लेता था और करीब करीब रोज रात को हत्तु मारता था.. मैं हमेशा यह ध्यान रखता था कि मम्मी को कभी भी मेरे ऊपर शक ना हो.. और मम्मी को शक नहीं हुआ.. वो कभी कभी प्यार से गालों पर थपकी लगाती थी तो बहुत अच्छा लगता था.. मुझे याद नहीं कि पिछले 4-5 सालों में उसने कभी मुझे गले लगाया हो..

अब इस होली कि बात करें.. मम्मी सुबह से नाश्ता, खाना बनाने में व्यस्त थी.. करीब 9 बजे हम सब यानि मैं, बाबूजी और बाबा ने नाश्ता किया और फिर मम्मी ने भी हम लोगों के साथ चाय पी.. 10 – 10.30 बजे बाबूजी के दोस्तो का ग्रुप आया.. मैं छत के ऊपर चला गया.. मैंने देखा कि कुछ लोगों ने मम्मी को भी रंग लगाया.. दो लोगों ने तो मम्मी की बूरड़ों को दबाया, कुछ देर तो मम्मी ने मजा लिया और फिर मम्मी छिटक कर वहाँ से हट गई.. सब लोग बाबूजी को लेकर बाहर चले गये .. बाबा अपने कमरे में जाकर बैठ गये..

फिर आधे घंटे के बाद औरतों का हुजूम आया.. करीब 30 औरतें थी, हर उम्र की.. सभी एक दूसरे के साथ खूब जमकर होली खेलने लगे.. मुझे बहुत अच्छा लगा.. जब मैने देखा कि औरतें एक दूसरे की चुची मसल मसल कर मजा ले रही हैं, कुछ औरतें तो साया उठा उठा कर रंग लगा रही थी.. एक ने तो हद ही कर दी.. उसने अपना हाथ दूसरी औरत के साया के अन्दर डाल कर बुर को मसला.. कुछ औरतों ने मेरी मम्मी मालती को भी खूब मसला और उनकी चुची दबाई.. फिर सब कुछ खा पीकर बाहर चली गई.. उन औरतो ने मम्मी को भी अपने साथ बाहर ले जाना चाहा लेकिन मम्मी उनके साथ नहीं गई..

उनके जाने के बाद मम्मी ने दरवाजा बन्द किया.. वो पूरी तरह से भीग गई थी.. मम्मी ने बाहर खड़े खड़े ही अपना साड़ी उतार दी.. गीला होने के कारण साया और ब्लाऊज दोनों मम्मी के बदन से चिपक गए थे.. कसी कसी जांघें, खूब उभरी हुई छाती और गोरे रंग पर लाल और हरा रंग मम्मी को बहुत ही मस्त बना रहा था.. ऐसी मस्तानी हालत में मम्मी को देख कर मेरा लौड़ा टाइट हो गया.. मैने सोचा, आज अच्छा मौका है.. होली के बहाने आज मम्मी को बाहों में लेकर मसलने का.. मैने सोचा कि रंग लगाते लगाते आज चुची भी मसल दूंगा.. यही सोचते सोचते मैं नीचे आने लगा.. जब मैं आधी सीढी तक आया तो मुझे आवाज सुनाई पड़ी ..

बाबा मम्मी से पूछ रहे थे,” सुमित कहाँ गया…?”

“मालूम नहीं, लगता है अपने बाबूजी के साथ बाहर चला गया है..” मम्मी ने जबाब दिया..

मम्मी को नहीं मालूम था कि मैं छत पर हूँ और अब उनकी बातें सुन भी रहा हूँ और देख भी रहा हूँ.. मैने देखा मालती अपने ससुर के सामने गरदन झुकाये खड़ी है.. बाबा मम्मी के बदन को घूर रहे थे..

तभी बाबा ने मम्मी के गालो को सहलाते हुये कहा,”मेरे साथ होली नहीं खेलोगी?”
मैने सोचा, मम्मी ददाजी को धक्का देकर वहाँ से हट जायेगी लेकिन साली ने अपना चेहरा ऊपर उठाया और मुस्कुरा कर कहा,” मैने कब मना किया है, और अभी तो घर में कोई है भी नहीं ..”

कहकर मम्मी वहां से हट गई.. बाबा भी कमरे के अन्दर गये और फिर दोनों अपने अपने हाथों में रंग लेकर वापस वहीं पर आ गये.. बाबा ने पहले दोनों हाथों से मम्मी की दोनों गालों पर खूब मसल मसल कर रंग लगाया और उसी समय मम्मी भी उनके गालों और छाती पर रंग रगड़ने लगी.. बाबा ने दुबारा हाथ में रंग लिया और इस बार मम्मी की गोल गोल बड़ी बड़ी चुचियों पर रंग लगाते हुए चुचियों को दबाने लगे.. मम्मी भी सिसकारती मारती हुई बाबा के शरीर पर रंग लगा रही थी..

कुछ देर तक चुचियों को मसलने के बाद बाबा ने मम्मी को अपनी बाहों में कस लिया और चूमने लगे.. मुझे लगा कि मम्मी गुस्सा करेगी और बाबा को डांटेगी.. लेकिन मैंने देखा क़ि मम्मी भी बाबा के पांव पर पांव चढ़ा कर चूमने में मदद कर रही है.. चुम्मा लेते लेते बाबा का हाथ मम्मी की पीठ को सहला रहा था और हाथ धीरे धीरे मम्मी के सुडौल नितम्बों की ओर बढ़ रहा था .. वे दोनों एक दूसरे को जम कर चूम रहे थे जैसे पति-पत्नि हों..

अब बाबा मम्मी के बूरड़ों को दोनों हाथों से खूब कस कस कर मसल रहे थे और यह देख कर मेर लौड़ा पैंट से बाहर आने को तड़प रहा था.. क़हां तो मैं यह सोच कर नीचे आ रहा था कि मैं मम्मी के मस्त गुदाज बदन का मजा लूंगा और कहां मुझसे पहले इस हरामी बाबा ने रंडी का मजा लेना शुरु कर दिया.. मुझे बहुत गुस्सा आ रहा था.. मन तो कर रहा था कि मैं दोनों के सामने जाकर खड़ा हो जाऊँ.. लेकीन तभी मुझे बाबा कि आवाज सुनाई पड़ी,” रानी, पिचकारी से रंग डालूँ ?”

बाबा ने मम्मी को अपने से चिपका लिया था.. मम्मी का पिछवाड़ा बाबा से सटा था और मुझे मम्मी का सामने का माल दिख रहा था.. बाबा का एक हाथ चुची को मसल रहा था और दूसरा हाथ मम्मी के पेड़ू को सहला रहा था..

“अब भी कुछ पूछने की जरुरत है क्या..?”

मम्मी का इतना कहना था कि बाबा ने एक झटके में साया के नाड़े को खोल डाला और हाथ से धकेल कर साया को नीचे जांघो से नीचे गिरा दिया.. मैं अवाक था मम्मी की बुर को देखकर.. मम्मी ने पैरों से ठेल कर साया को अलग कर दिया और बाबा का हाथ लेकर अपनी बुर पर सहलाने लगी.. बुर पर बाल थे जो बुर को ढक रखा था.. बाबा की अंगुली बुर को कुरेद रही थी और मम्मी अपनी हाथो से ब्लाउज का बटन खोल रही थी.. बाबा ने मम्मी के हाथ को अलग हटाया और फटा फट सारे बटन खोल दिए और ब्लाउज को निकाल दिया.. अब मम्मी पूरी तरह से नंगी थी.. मैने जैसा सोचा था, चूची उससे भी बड़ी बड़ी और सुडौल थी.. बाबा आराम से नंगी जवानी का मजा ले रहे थे.. मम्मी ने 2-3 मिनट बाबा को चुची और बूर मसलने दिया फिर वो अलग हुई और वहीं फर्श पर मेरी तरफ पाँव रखकर लेट गई.. मेरा मन कर रहा था कि जाकर बूर में लौड़ा पेल दूँ.. तभी बाबा ने अपना धोती और कुर्ता उतारा और मम्मी के चेहरे के पास बैठ गये.. मम्मी ने लन्ड को हाथ में लेकर मसला और कहा,”पिचकारी तो अच्छा दिखता है लेकिन देखें इसमें रंग कितना है….. अब देर मत करो, वे आ जायेंगे तो फिर रंग नहीं डाल पाओगे..”

और फिर, बाबा ने मम्मी पाँव के बीच बैठ कर लन्ड को बूर पर दबाया और तीसरे धक्के में पूरा लौड़ा बुर के अन्दर चला गया.. क़रीब 10 मिनटों तक मम्मी को खूब जोर जोर से धक्का लगा कद चोदा.. उस रन्डी को भी चुदाई का खूब मजा आ रहा था, तभी तो साली जोर जोर से सिसकारी मार मार कर और बूरड़ उछाल उछाल कर बाबा के लंड के धक्के का बराबर जबाब दे रही थी.. उन दोनों की चुदाई देखकर मुझे विशवास हो गया था कि मम्मी और बाबा पहले भी कई बार चुदाई कर चुके हैं…

“क्या राजा, इस बहू का बुर कैसा है? मजा आया या नहीं ?” मम्मी ने कमर उछालते हुये पूछा..

“मेरी प्यारी बहू .. बहुत प्यारी बूर है और चूची तो बस, इतनी मस्त चुची पहले कभी नहीं दबाई..”बाबा ने चुची को मसलते हुये पेलना जारी रखा और कहा..

“रानी, तुम नहीं जानती, तुम जबसे घर में दुल्हन बन कर आई, मैं हजारों बार तुम्हारे बूर और चुची का सोच सोच कर लंड को हिला हिला कर तुम्हारा नाम ले ले कर पानी गिराता हूँ..”

बाबा ने चोदना रोक कर मम्मी की चुची को मसला और रस से भरे ओंठों को कुछ देर तक चूसा.. फिर चुदाई शुरू की और कहा,”मुझे नहीं मालूम था कि एक बार बोलने पर ही तुम अपनी बूर दे दोगी, नहीं तो मैं तुम्हें पहले ही सैकडों बार चोद चुका होता ..”

मुझे विश्वास नहीं हुआ कि मम्मी बाबा से पहली बार चुद रही है.. बाबा ने एक बार कहा और हरामजादी बिना कोई नखरा किये चुदाने के लिये नंगी हो गई और बाबा कह रहे है कि आज पहली बार ही मम्मी को चोद रहे हैं..

लेकिन तब मम्मी ने जो कहा वो सुनकर मुझे विश्वास हो गया कि मम्मी पहली बार ही बाबा से मरवा रही है..

मम्मी ने कहा,” राजा, मैं कोई रंडी नहीं हूँ.. आज होली है, तुमने मुझे रंग ल
मैं तो ये सुन कर दंग रह गया.. एक ससुर अपनी बहू से होली खेलने को बेताब था..आज होली है, तुमने मुझे रंग लगाना चाहा, मैने लगाने दिया, तुमने चुची और बूर मसला, मैने मना नहीं किया, तुमने मुझे चूमा और मैने भी तुमको चूमा और तुम चोदना चाह्ते थे, पिचकारी डालना चाहते थे तो मेरी बूर ने पिचकारी अन्दर ले ली.. तुम्हारी जगह कोई और भी ये चाहता तो मैं उस से भी चुदवाती.. चाहे वो राजा हो या नौकर .. होली के दिन मेरा माल, मेरी बूर, मेरी जवानी सब के लिये खुली है……….”

मम्मी ने बाबा को अपनी बांहों और जांघों में कस कर बांधा और फिर कहा,”आज जितना चोदना है, चोद लो, फिर अगली होली का इंतजार करना पड़ेगा मेरी नंगी जवानी का दर्शन करने के लिये ..”

मम्मी की बात सुनकर मैं आश्चर्य-चकित था कि होली के दिन कोई भी उसे चोद सकता था..

लेकिन यह जान कर मैं भी खुश हो गया.. कोई भी में तो मैं भी आता हूँ.. आज जैसे भी हो, मम्मी को चोदूँगा ही.. यह सोच कर मैं खुश था और उधर बाबा ने मम्मी की बूर में पिचकारी मार दी.. बुर से मलाई जैसा गाढ़ा बाबा का रस बाहर निकल रहा था और बाबा खूब प्यार से मम्मी को चूम रहे थे..

क़ुछ देर बाद दोनों उठ गये ..

“कैसी रही होली…?” मम्मी ने पूछा,” आप पहले होली पर हमांरे साथ क्यों नहीं रहे.. मैने 12 साल पहले होली के दिन सबके लिये अपना खजाना खोल दिया था..”

मम्मी ने बाबा के लौड़ा को सहलाया और कहा,” अभी भी लौड़े में बहुत दम है, किसी कुमांरी छोकरी की भी बूर एक धक्के में फाड़ सकता है..”

मम्मी ने झुक कर लौड़े को चूमा और फिर कहा,”अब आप बाहर जाईये और एक घंटे के बाद आईयेगा.. मैं नहीं चाहती कि सुमित या उसके बाप को पता चले कि मैंने आप से चुदाई है..”

मम्मी वहीं नंगी खड़ी रही और बाबा को कपडे पहनते देखती रही.. धोती और कुर्ता पहनने के बाद बाबा ने फिर मम्मी को बांहो में कसकर दबाया और गालों और होंठों को चूमा.. कुछ चुम्मा चाटी के बाद मम्मी ने बाबा को अलग किया और कहा,”अभी बाहर जाओ, बाद में मौका मिलेगा तो फिर से चोद लेना लेकिन आज ही, कल से मैं आपकी वही पुरानी बहू रहूंगी..”

बाबा ने चुची दबाते हुये मम्मी को दुबारा चूमा और बाहर चले गये..

मैं सोचने लगा कि क्या करूँ?

मैं छत पर चला गया और वहाँ से देखा- बाबा घर से दूर जा रहे थे और आस पास मेरे पापा जी का कोई नामो निशान नहीं था.. मैने लौड़े को पैंट के अन्दर किया और धीरे धीरे नीचे आया.. मम्मी बरामदे में नहीं थी.. मैं बिना कोई आवाज किये अपने कमरे में चला गया और वहाँ से झांका.. इधर उधर देखने के बाद मुझे लगा कि मम्मी किचन में हैं.. मैने हाथ में रंग लिया और चुपके से किचन में घुसा.. मम्मी को देखकर दिल बाग बाग हो गया.. वो अभी भी नंग धड़ंग खड़ी थी.. वो मेरी तरफ पीठ करके पुआ बेल रही थी.. मम्मी के सुडौल और भरे भरे मांसल बूरड़ों को देख कर मेरा लौड़ा पैंट फाड़ कर बाहर निकलना चाहता था..

कोई मौका दिये बिना मैंने दोनों हाथों को मम्मी की बांहो से नीचे आगे बढ़ा कर उनके गालों पर खूब जोर जोर से रंग लगाते हुये कहा,”मम्मी, होली है ..”

कहानी जारी रहेगी..और फिर दोनों हाथों को एक साथ नीचे लाकर मम्मी की गुदाज और बड़ी बड़ी चुचियों को मसलने लगा..

“ओह….तू कब आया….? दरवाजा तो बन्द है…… छोड़ ना बेटा…क्या कर रहा है..? मम्मी के साथ ऐसे होली नहीं खेलते……ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह…इतना जोर जोर से मत मसल….अह्ह्ह्ह्ह…छोड़ दे ..…..अब हो गया…..”

लेकिन मैं ऐसा मौका कहां छोड़ने वाला था.. मैं मम्मी के बूरड़ों को अपने पेरु से खूब दबा कर और चूची को मसलता रहा.. मम्मी बार बार मुझे हटने के लिये बोल रही थी और बीच बीच में सिसकारी भी भर रही थी.. खास कर जब मैं घुंडी को जोर से मसलता था.. मेरा लंड बहुत टाइट हो गया था.. मैं लंड को पैंट से बाहर निकालना चाहता था.. मैं कस कर एक हाथ से चुची को दबाये रखा और दूसरा हाथ पीछे लाकर पैंट का बटन खोला और नीचे गिरा दिया.. मेरा लौड़ा पूरा टन टना गया था.. मैने एक हाथ से लंड को मम्मी के बूरड़ों के बीच दबाया और दूसरा हाथ बढ़ा कर बूर को मसलने लगा..

“नहीं बेटा, बुर को मत छुओ…यह पाप है……आखिर मैं तुम्हारी माँ हु”

लौड़े को बूर के बीच में दबाये रखा और आगे से बुर में बीच वाली अंगुली घुसेड़ दी.. करीब 15-20 मिनट पहले बाबा चोद कर गये थे और बूर गीली थी.. मेरा मन झनझना गया था, मम्मी की नंगी जवानी को छू कर.. मुझे लगा कि इसी तरह अगर मैं मम्मी को रगड़ता रहा तो बिना चोदे ही झड जाउंगा और फिर मम्मी मुझे कभी चोदने नहीं देगी.. यही सोच कर मैने बूर से अंगुली बाहर निकाली और पीछे से ही कमर से पकड़ कर मम्मी को उठा लिया..

“ओह… क्या मस्त माल है….चल रंडी, अब तुझे जम कर चोदूंगा … बहुत मजा आयेगा मेरी रानी तुझे चोदने में ..”

ये कहते हुये मैंने मम्मी को दोनों हाथों से उठा कर बेड पर पटक दिया और उसकी दोनों पैरों को फैला कर मैने लौड़ा बुर के छेद पर रखा और खूब जोर से धक्का मारा..

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“आउच..जरा धीरे ……. ” मम्मी ने हौले से कहा..

मैने जोर का धक्का लगाया और कहा,”ओह्ह्ह्ह….मम्मी, तू नहीं जानती, आज मैं कितना खुश हूँ .. ..” मैं धक्का लगाता रहा और खूब प्यार से मम्मी के रस से भरे ऑंठो को चूमा..

“मां, जब से मेरा लौड़ा खड़ा होना शुरु हुआ, चार साल पहले, तो तबसे बस सिर्फ तुम्हें ही चोदने का मन करता है.. हजारों बार तेरी बूर और चुची का ध्यान कर मैंने लौड़ा हिलाया है और पानी गिराया है.. हर रात सपने में तुम्हें चोदता हूँ.. ..ले रानी आज पूरा मजा मारने दे…..”

फिर क्या बताऊँ दोस्तों, मम्मी के चूत पे जैसे ही मैंने हाथ लगाया, ओह्ह्ह्ह उनका चूत पूरी तरह से गरम हो चूका था, और पानी पानी हो चूका था, मेरे लण्ड तो बस मत पूछो दोस्तों आज पहली बार मुझे एहसास हुआ लोग नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पे कहते है की मेरे लण्ड सात इंच का है आठ इंच का है, पर आज मुझे भी लगा की मेरा लण्ड बहुत ही मोटा और लंबा हो चूका था.

मम्मी को पूरा नंगा कर दिया, और उनके बूर को चाटने लगा, माँ आह आह आह उफ्फ्फ उफ्फ्फ्फ़ करने लगी, मैंने लण्ड का सूपड़ा उनके बूर के ऊपर रखा और जोर जोर से चोदने लगा, मैं उनके रसीले होठ को चूसने लगा, वो भी गाली देने लगी, ले मादरचोद छोड़ ले अपनी माँ को चोद अपनी मम्मी को, आज से तू मुझे माँ नहीं बल्कि मुझे रखैल कहना, आह आह फाड़ दे मेरे बूर को, दे दे तू अपना मोटा लौड़ा, चोद दे मुझे, आज मैं अपने बेटे से चूद कर धन्य हो जाउंगी.

उसके बाद तो दोस्तों जोर जोर से चुदाई शुरू हो गई, माँ तर बतर हो गई, करीब एक घंटे तक चोदा, फिर दोनों शांत हो गए, करीब एक घंटे तक दोनों एक दूसरे को पकड़ कर सोये रहे . क्या बताऊँ दोस्तों ये होली मैं कभी भी नहीं भूल पाउँगा,

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