गर्मागर्म चुदाई रजाई में कौन है मुझे चोदने वाला जानिए

जीजा साली सेक्स
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मेरा नाम स्वाति है। मैं 22 साल की खूबसूरत हॉट लड़की हूँ। आज मैं आपको अपनी चुदाई की कहानी सुनाने जा रही हूँ। दोस्तों ये मेरी पहली कहानी है नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पर, ऐसे में रोजाना रात को इस वेबसाइट की कहानियां पढ़कर सोती हूँ।

अब आपको मैं बता देती हूँ मेरे घर में मेरे अलावा मेरी माँ रहती है। एक मेरी बहन है जिनका शादी पिछले साल ही हुआ है। मेरे पापा दुबई में रहते हैं। मैं और मेरी माँ दोनों नोएडा में रहती हूँ। मैं नॉएडा में इंजीनियरिंग की पढाई कर रही हूँ।

कल रात मेरे जीजू आये थे वो कनाडा में रहते हैं। मेरी बहन भी वही रहती हैं वो बंगलौर आये थे अपने कंपनी के काम से और आज रात उनकी फ्लाइट है इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट दिल्ली से। तो वो रात में यहीं रुक गए थे। मेरा जो घर है है उसमे दो फ्लोर है निचे मम्मी सोती हैं और मैं ऊपर फ्लोर पर सोती हूँ। ऊपर फ्लोर पर दो कमरे है एक गेस्ट रूम है जिसमे जीजू सोने वाले थे।

दोस्तों हम तीनो डिनर कर के सोने चले गए। मेरे कमरे में टीवी है तो जीजू इंडिया और वेस्टइंडीज का मैच देखने लगे तब तक मम्मी सो गई थी। मैच ख़तम होते लेट हो गया था। जीजू बोले यहाँ भी ठण्ड बहुत ज्यादा हो गया है। पता नहीं नींद कैसे आएगी, मुझे तो आदत है पकड़ के सोने का। तो मैं बोल दी तो पकड़ के सो जाओ कौन मना कर रहा है। तो जीजू बोले अपना नहीं मुझे तो गोल गोल पकड़ कर सोने की आदत है। तो मैं बोली क्यों को भी ले आते।

तो जीजू बोले क्यों आप यहाँ हो तो उसको लाने की क्या जरुरत , मैं बोली मैं अभी कच्ची कली हूँ। अभी इस सब में नहीं पड़ना चाहती, अभी खेलने के दिन नहीं नहीं की चुदने के। तो जीजू बोली अभी सही समय है अभी ही तो मजा आएगा। बाद में क्या? उम्र ढलने लगेगा। फिर जीजू बोले तो किश करने ही दे दो उसी से काम चला लूंगा और बाद में मूठ मार लूंगा। तो मैं बोली घर आये मेहमान की इज्जत होनी चाहिए। मूठ क्यों मारोगे।आज रात का काम चला देती हूँ। मेरी चूत में भी गर्मी चढ़ी है सर्दी के दिनों में। ऐसे भी सर्दी का मौसम है।

इतना कहते ही जीजू मुझे पकड़ लिए और मुझे चूमने लगे। फिर उनका हाथ मेरी छाती पर यानी की मेरी चूचियों पर पड़ गया और वो धीरे धीरे दबाने लगे। रात के करीब बारह बजने को थे। मैं भी उनके बाहों में आ गई और कब हम दोनों एक दूसरे के कपडे उतार दिए पता भी नहीं चला और फिर वो मेरी बदन को सहलाते हुए मेरी चूचियां दबाते हुए मेरे होठ को चूसने लगे वो मेरी होठ को लॉक कर दिए अपने होठ से।

दोस्तों हम दोनों एक बीएड पर थे पर रजाई अब ओढ़ ली थी। और फिर रजाई में शुरू हुआ चुदाई का खेल, वो मुझे निचे दबा दिए और होठ से शुरू करके मेरे पैर के अंगूठे तक जीभ से चाटने लगे। मैं पानी पानी हो रही थी। मेरी चूत काफी गरम हो चुकी थी। पानी छोड़ रही थी चूत से। मेरे रोम रोम सिहर रहे थे। मैं पूरी तरह चुदने को तैयार थी। पर जीजू अभी और समय लेना चाह रहे थे। वो मेरी चूत को चाटने लगे। अंदर तक वो जीभ डाल रहे थे। मैं आह आह आह कर रही थी उनके माथे को पकड़कर मैं अपना चूत चटवा रही थी। मैं काफी ज्यादा कामुक हो गई थी।

मैं उनके सर को अपने चूत में रगड़ रही थी वो नमकीन पानी जो मेरी चूत से निकल रहा था वो चाट रहे थे। दोस्तों मेरे पुरे शरीर में सिहरन हो रही थी। मैं कामुकता की हद को पार कर चुकी थी। अब बारी आया मुझे चोदने का। अब उन्होंने मेरे दोनों पैरों को अलग अलग कर दिया और अपना लौड़ा मेरी चूत पर लगा दिया और जोर जोर से घुसाने लगे पर मेरी छूट की छेद छोटी होने की वजह से अंदर नहीं जा रहा था। उन्होंने वेसलिन थोड़ा लगाया अपने लौड़े पर और फिर से कोशिश किया और इस बार उनका पूरा लौड़ा मेरी चूत में समा गया और फिर यहाँ से शुरू हुआ चुदाई का सफर।

दोस्तों फिर क्या था वो जोर जोर धक्के देते और मेरी चूचियां हवा में हिलती और झटके से मैं हरेक बार छह इंच आगे पीछे हो जाती। दोस्तों मैं भी कहा कम थी मैं भी उनको अपने पैरों की जंजीर में समेट ली और चुदवाने लगी। उन्होंने मुझे खूब चोदा।

पहले उन्होंने बेसिक स्टाइल में चोदा फिर उन्होंने कुतिया बना कर चोदा फिर वो निचे हो गए और मुझे ऊपर रखा। ये स्टाइल मुझे बहुत पसंद आया क्यों की ऐसा करने से मैं जितना तेज चाहती चुदने उतनी तेज में चुद रही थी। दोस्तों रात भर उन्होंने मुझे चोदा। दोनों साथ ही सोते रहे। यहाँ तक की मेरी माँ को भी पता चल गया था की रात भर मैं चुदी हूँ। उन्होंने बोला रंडी हो गई है क्या रात भर तेरी आवाज आ रही थी कमरे के बाहर आह आह आह आह।

दोस्तों ऐसी चुदाई के लिए मुझे पता नहीं कब तक इंतज़ार करना होगा। पर जल्द ही मैं फिर किसी से चुदने वाली हूँ क्यों की मैं इस चुदाई के बाद से ही चुड़क्कड़ हो गई हूँ बिना चुदे शायद मैं रह नहीं पाऊँगी। मैं फिर से नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पर कहानी लेके आउंगी तब तक के लिए धन्यवाद.

मैं अकेला और चुदने वाली तीन और तीनो चुदने के लिए पागल पहले मुझे पहले मुझे

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दोस्तों किसी को चूत नहीं मिलता है, कोई रंडी के पास जाता है, कोई हस्थ्मैथुन कर के अपना काम चलाता हैं, और किसी को भगवान देते हैं तो छप्पर फाड़ कर देते हैं, आज कल मैं भी चूत की नगरी में डूबा हुआ हु, तीन तीन चूत और चोदने वाला एक, मैं अकेला, दो चूत काफी टाइट. एक की गांड टाइट और चौड़ी, एक बड़ी गांड वाली एक छोटी गांड आर एक मिडिल साइज़ की. आज मैं आपको अपनी ये कहानी सुनाने जा रहा हु, बहूत ही सेक्सी है ये कहानी आज मैं अपनी कहानी को इसलिए नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पर भेजा हु ताकि, मेरे वो भाई जो मूठ मार के काम चला रहे हैं उसको थोड़ा और भी कामुक कर दूँ, ताकि ऐसा लगे की वो भी सचमुच ही चोद रहे हैं.

तो अब देर नहीं करते हुए सीधे कहानी पर आ रहा हु, मेरा नाम कन्हैया हैं, मैं उत्तराखंड का रहने वाला हु, और दिल्ली में रहता हु, मेरी शादी अभी तीन महीने पहले ही हुई है, ये शादी लव मैरिज हैं, इसके लिए मैं तैयार था, मेरे घर बाले तैयार नहीं थे, और लड़की के पापा भी तैयार नहीं था, इस वजह से काफी दिक्कत हुई, और शादी मैंने मंदिर में कर लिया, फिर जाके कोट में, इस शादी का परिणाम ये हुआ की मेरे घर बाले मुझे अपने घर से निकाल दिए, और मेरे सास ससुर में तलाक हो गया, अब मैं, मेरी पत्नी, मेरी साली और सासु माँ साथ साथ रहने लगे.

मेरी सासु माँ की उम्र 38 है उनका नाम रम्भा है, मेरी पत्नी अर्चना 19 की और मेरी साली नीतिका 18 साल की हैं, वो तीनो नए ख़याल के लोग हैं, बिंदास जिंदगी जीते हैं, सच पूछिए तो थोड़ा मैं ही कम मॉडर्न हु, बाकी वो तीनो आधुनिक युग की लड़की और औरत हैं, स्टाइल में रहने वाली, नए नए वेस्टर्न कपडे, टाइट जीन्स, चस्मा, क्या बताऊँ दोस्तों तीनो एका पर से एक हैं, मैं इसी पर तो मर मिटा था, मेरी सासू माँ टीचर है, एक कान्वेंट स्कूल में, मेरी साली कॉलेज जाती हैं, और मेरी पत्नी वो जॉब करती हैं, सच पूछिए तो मैं ही कुछ नहीं करता मैं निठल्ला हु, कोई काम नहीं बस तीनो को चोदता हु और तीनो को खुश रखता हु,

सुबह होते ही मेरी बीवी और सासू माँ जॉब पर चली जाती है, मेरी साली उठती है, और उन लोगो के जाने के बाद दरवाजा बंद कर देती है, और मेरे कमरे में आ जाती हैं, और चुद्वाती हैं, मेरी साली 34 नंबर की ब्रा पहनती हैं, गजब की सॉलिड चीज हैं, गोल गोल चूचियां चूतड उभरा हुआ, होठ गुलाबी, चूत पर बहूत ही कम बाल, पहले तो वो अपनी चूत चत्वाती हैं, फिर अपना दूध पिलाती हैं, फिर वो वाइल्ड हो जाती हैं, और फिर मेरा लौड़ा अपने मुह में ले के चूसने लगती हैं, मैंने भी हौले हौले बालों को सहलाते हुए, उसके चुचियों को दबाता हु, फिर निचे कर के, अपनी बाहों में भर कर मोटा लौड़ा उसके चूत पर लगा कर जोर जोर से ड्रिल करने लगता हु, बस कमरे में आह आह आह आह आह ओह्ह ओह्ह ओह्ह की आवाज आती हैं, और फिर जब दोनों का झड जाता हैं तो दोनों सो जाते हैं, करीब एक घंटे में उठते हैं, नहा धोकर, मैं काजू किसमिस और बादाम खाकर दूध पीता हु, ताकि ताकत बनी रहे, रोज एक मरदाना टेबलेट भी खाता हु ताकि लंड हमेशा खनकता रहे. फिर मेरी साली एक बजे कॉलेज चली जाती हैं. उसका कॉलेज २ बजे से है, मैं एक घंटे की नींद लेता हु.

दो बजे सासू माँ आ जाती हैं, उनके बेल बजाने पर ही मैं उठता हु, आते ही वो मुझे हग करती हैं (गले लगती हैं) उसकी बड़ी बड़ी और गदराई बदन जब मेरे सिने से सटती है मेरा लैंड खनक जाता हैं और तम्बू गाड देता हैं, फिर सासू माँ खाना बनाती हैं, फिर हम दोनों आराम से खाते हैं, और फिर मेरे बेड पर ही आराम करने आ जाती है, फिर वो मेरे बाल को सहलाते सहलाते, मेरे करीब आ जाती हैं और फिर मैंने भी उनको अपने आगोश में ले लेता हु, फिर क्या दोस्तों गदराई बदन के कपडे उतारने में ज़रा भी देर नहीं लगाता, बड़ी बड़ी चूचियां, लम्बी चौड़ी शारीर, गांड भरा हुआ, जांघे मोटी मोटी बाल लम्बे लम्बे, मैंने अपने सास की गांड को ज्यादा सहलाता हु, और चूत की बाल में उँगलियाँ ज्यादा फेरता हु, फिर मैं उनको घोड़ी बना कर पीछे से उनके गांड में लैंड डाल कर जोर जोर से धक्का देने लगता हु, बड़ी गांड हरेक झटके पर हिलती हैं, और मेरी सासू माँ जोर से आह आह आह करती है, फिर वो सीधी हो जाती है और अपना पैर मेरे कंधे पर ले लेती हैं अब वो अपने चूत में मेरा लंड खूब पकड़ कर सेट करती हैं और फिर चुदवाने लगती हैं, वो तो मुझे उस टाइम गालियाँ भी बहूत देती हैं मादर चोद कहके, मैं भी उस समय रंडी कहता हु, इस तरह से दोनों जब झड जाते हैं तब फिर सो जाते हैं. शाम को ६ बजे मेरी बीवी आती हैं, तब मेरी सासू माँ और मैं उठता हु.

मेरी साली भी ७ बजे घर आ जाती हैं, तीनो मिलकर टीवी देखते हैं, खाना खाते हैं और फिर रात को अपनी बीवी की चुदाई, वो तो बहूत हरामी हैं, वो कभी गांड में लेती हैं कभी मुह में कभी चूत में, वो मेरे लैंड को अपनी चुचियों में रगडती हैं, और मेरे मुह में पेशाव भी करती हैं, मैं भी उसके मुह में मूतता हु, वो बहूत ही वाइल्ड तरीके से चुद्वाती हैं, रात को फिर करीब १२ बजे के करीब सो जाते हैं.

दोस्तों इस तरह से मेरी ये नई जिंदगी बहूत ही हॉट हो गई हैं, चूत ही चूत, एक बहूत ही टाइट चूत जो मेरी सास की हैं, उसके बाद मेरी बीवी का और साली की चूत तो बहूत ही ज्यादा टाइट हैं, जब मर्जी तब चोदता हु, बहूत ही मस्त जिंदगी चल रही हैं. आपको ये कहानी कैसी लगी नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पर स्टार रेट कर जरुर बताएं, धन्यवाद

सास बीवी और साली तीनो को बारी बारी से चोदा

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दोस्तों ज़िंदगी में मजे तभी मिलते है जब आपको जो चाहिए वो मिले, आप खुद ही सोचो आपके मन में कई सारे भाभी, लड़की, आंटी, होगी जिसको आप मन में सोच के मूठ मारते है, अगर सोचो ये सही हो जाए तो आपको कैसा लगेगा, आपको उसी को चोदने का मौका मिल जाये तो कैसा लगेगा, आप जो वीर्य बाथरूम में या बेड के निचे डाल देते हो वही वीर्य अगर उसके चूत में गिरे तो कैसा लगेगा, होगा ना तब मजे का दिन. आज मैं अपनी भी कहानी नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पे लेके आ रहा हु, क्यों की मेरा भी फ़र्ज़ बनता है की मैं भी अपनी कहानी पोस्ट करूँ,

मेरा नाम मुकेश है, २२ साल का हु, दिल्ली में रहता हु, मैं दिल्ली पढाई करने के लिए आया था, पर मैं यहाँ घर जमाई बन गया और अब तो मत पूछो क्या क्या हो रहा है, मस्त लाइफ कट रही है, चुदाई ही चुदाई, आपने पढ़ा होगा दुकान के सामने मोबाइल ही मोबाइल, फ्लैट ही फ्लैट, ऐसा मेरे मन में सिर्फ चुदाई ही चुदाई, हा हा हा हा हा हा हा, क्या करूँ यार बहुत खुश हु आजकल. तो बात शुरू हुई ठण्ड के दिनों से मेरा संडे को कोचिंग में छुट्टी रहती थी, मैं छत पे धुप सेक रहा था वही बगल के घर के छत पे भी दो बहने होती थी, वो मुझे देखते रहती थी, बड़ी तो ज्यादा देखती थी, मुझे धीरे धीरे मजा आने लगा अब तो वो जैसे ही छत पे चढ़ती थी मैंने भी में छत पे चढ़ जाता था और बस नजर की प्यास बुझाते रहता था, रात में या कभी कभी दिन में भी उसके याद में मूठ मार लिया करता था. आप ये कहानी नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पे पढ़ रहे है. मूठ मारने का कारन ये होता था की, उसका सेक्सी अंदाज़, उसके शरीर की बनावट, उसके उभरी हुयी बड़ी बड़ी चूचियाँ. मुझे बड़ी बड़ी चूची बहुत पसंद है, उसके चूतड़, हाय क्या बताऊँ दोस्तों जब भी मैं उसके चूतड़ की उभर और चलते हुए दोनों चूतड़ ऊपर निचे ऊपर निचे मैं तो फटा फट लैंड को अपने हाथ में ले लेता था.

वो हेल्ती थी, बड़ी बड़ी चूची, कमरे और पेट की बनावट ओह्ह्ह मजा आ जाता था उसे देख के, फिर बात थोड़ी और बढ़ी, था दिवाली का दिन मैं काफी पटाखे लाया छोड़ने के लिए निचे गया तो वो तीनो भी थे, उसके पापा गोवा के एक होटल में मैनेजर है, वो यहाँ कम आते है, तो दिल्ली में दोनों बेटियां और माँ ही रहती है, मैंने उनलोगो को दिवाली विश किया, और थोड़ी बात की तो उसकी मम्मी ने मुझे उसी समय चाय पिने के लिए बुला लिया और मैं भी उनके साथ उनके घर गया, मुझे मिठाई दिया, क्या बताऊँ दोस्तों मुझे पहली बार थोड़े नज़दीक से दीदार करने का मौक़ा मिला उन बड़ी बाली लड़की पायल को, छोटी का नाम छोटी ही था, और उसकी माँ दोनों से कम नहीं थी यानी तीनो एक पर से एक, फिर क्या था वो लोग मेरी बातों से काफी आकर्षित हुए जैसा की अक्सर लड़का लड़की को देखकर अच्छी अच्छी बाते करता है, आपका क्या ख्याल है आपने भी जरूर की होगी…….

धीरे धीरे आना जाना सुरु हो गया, और मैं और पायल करीब आ गए, एक बस दो महीने बाद नया साल आ गया था, फर्स्ट जनुअरी को मैंने नए साल की शुभकाएँ दी और पता नहीं मुझे क्या हुआ मैंने अपनी बाहे फैला दी और वो भी मेरी बाहों में आ गयी, मुझे पहली बार किसी लड़की की चूच की दवाब महसूस हुआ, मैंने उसके पीठ पे हाथ रखा तो ब्रा को टटोल सका, ओह्ह्ह उसके बदन की खुसबू मजा आ गया था अब तो बस पायल का ख्याल मेरे मन में था, और हम दोनों का प्यार परवान चढ़ा और इजहार होके शादी तक हो गयी,

पहली रात को मैंने देशी स्टाइल में ही चुदाई की, जैसे की आपलोग सुहागरात की सीन किसी बी ग्रेड सिनेमा में देखते है, खूब मजे किये, सील टूटा, बूर चाटा, दूध पिया, पूरा आत्मा शांत हो गया, करीब १० दिन तक दिन में पांच पांच बार चुदाई होती थी, ज़िंदगी मजे में था, पर मैंने पायल को पा लिया था अब मुझे छोटी की चूत चाहिए थी, इस वजह से मैंने छोटी को भी फ़्लर्ट करना सुरु किया, एक दिन पायल और मेरी सास मंदिर गयी थी वो मंदिर घर से काफी दूर था तीन चार घंटे लगते, तभी मैंने छोटी को भी चोद दिया, उसकी चूत काफी टाइट थी, दूध भी बड़ा बड़ा था, बूर को चाटा, बूर की पानी भी पि, और फिर से एक कुंवारी लड़की की सील तोड़ी यानि की १० दिन के अंदर दोनों को मैंने चोद दिया, अब तो दिन में एक बार पायल को चोदता, पायल को चोदने के लिए तो कभी भी कुण्डी लगा लेता पर छोटी को चोदने के लिए मुझे अकेले के जरुरत होती थी, तो कभी पायल नहाने जाती और माँ जी इधर उधर होती तभी मैं छोटी को भी चोद देता.

ऐसा ही चलता रहा, फेब्रुअरी का महीना था पायल और छोटी एक बेड पे रजाई ओढरकर टी वि देख रहे था और मैं और मेरी सासु माँ एक बेड पे, मेरी सासु माँ मेरे पैर के तलवे को दबा रही थी क्यों की उस दिन दर्द हो रहा था, अचानक मेरा पैर उनके चूची को टच किया मेरा पैर उनके रजाई के अंदर था, फिर मैंने धीरे धीरे उनके चूच को टच करता, तभी पायल और छोटी निचे गयी किसी काम से तभी सासु माँ बोली क्यों दोनों से जी नहीं भरा, मैंने अवाक् रह गया, मैंने कहा क्या कह रहे हो सासु माँ, बोली हा मुझे पागल मत समझो मैंने देख रही हु आजकल छोटी भी चुद रही है आपसे.

तो मैंने कह दिया तो फिर आपका क्या ख्याल है, बोली ठीक है मुझे भी तो चाहिए, कब दे रहे हो, मैंने कहा आज रात को ही, बोली नहीं नहीं, एक काम करते है, कल सुबह छोटी और पायल को मसि के यहाँ भेजते है, किसी बहाने से वो शाम तक आएगी तब तक हम दोनों रास लीला करेंगे. मैं समझ गया ये साली भी बड़ी कुत्ती चीज़ है, वही हुआ सुबह उन्होंने दोनों को मसि के यहाँ भेज दी, और फिर सुरु हो गए खेल सास के साथ, सासु मा की चौड़ी गांड, बड़ी बड़ी चूच, चौड़ा पेट मोती चूतड़, भरा पूरा बदन मुझे कायल कर दिया, और उस दिन मुझसे दिन भर चुद्वाते ही रही, वो काफी एक्सपीरियंस थी, इस वजहस से व कामसूत्र का सारे पोज़ आजमाई, अब तो घर का गार्जियन ही चुद गयी और उन्हें पता भी था की मैं छोटी को भी आजकल चोद रहा हु, तो दर जिसका था हट गया, अब तो सिर्फ पायल नहाने जाती तो कुण्डी लगा देता छोटी को चोदने के लिए,

पर आजकल कुछ गड़बड़ हो गया है, पायल को सब बात मालूम हो गया है, की मैं तीनो को चोद रहा हु, तो पायल नाराज है आजकल मैंने सास को और छोटी को ही चोद रहा हु, आशा करता हु की मेरी कहानी आपको अच्छी लगी होगी, अगर अच्छी लगी हो तो निचे स्टार पे और फेसबुक पे लाइक जरूर करें प्लीज, आपका दोस्त मुकेश, दिल्ली से.

ससुराल में चुदक्कड़ साली की चुदाई कहानी

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हेलो मेरा नाम कृष्ण है मैं नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम का पुराण रीडर हु , मजा आ जाता है यहाँ जो कहानी है, आज मैं आपको अपने साली के बारे में एक सच्ची कहानी बताने जा रहा हु, उस दिन पता चला की मेरी साली कितनी चुदक्कड़ है, मेरी शादी के हए करीब १ साल हुए थे, मैं उस समय बेंगलुरु में रहता था, मैं वही जॉब और पढाई दोनों करता था, इसवजह से मैं शादी के कुछ दिन तक अपने वाइफ को अपने पास नहीं बुलाया था, जब मैं ६ महीने बाद अपने ससुराल गया तो मेरा आकर्षण तो मेरी वाइफ की तरफ था पर पर मेरी साली जो की मेरी वाइफ से सिर्फ एक साल ही छोटी थी उसका आकर्षण मेरी तरफ था क्यों की मैंने ये महसूस किया की जब भी मेरी वाइफ मेरे पास नहीं होती उसका सेक्सी आचरण कभी कभी मुझे कामुक बना देता था, क्यों की कभी वो अपने बूब को मुझसे टच करवाती तो कभी अपना हाथ मेरे में देती उस समय एक चीज मैंने और भी नोटिस किया की जब भी वो मुझे टच करती उसकी आवाज और हाथ दोनों ही कापते थे क्यों की जब की कोई लड़की कुछ गलत करती है तब उसका व्यव्हार ऐसा ही हो जाता है ऐसा मैंने पढ़ा है.
एक दिन की बात है वो बाथरूम में नहा रही थी वही पे टॉयलेट भी था मै वह गया क्यों की मुझे टॉयलेट जाना था तो गलती से मैंने बाथरूम का दरवाजा को धक्का लगा दिया वह पर मेरी शैली पहले से नहा रही थी दरवाजा अंडर से लॉक नहीं था मैंने उसे नंगी अवस्था में देख लिया, पर वो बिलकुल भी नहीं शरमाई ना तो कुछ वैसा रिएक्शन था, मैंने कहा सॉरी तो वो बोली इसमें सॉरी की क्या बात है, मुझे तो अच्छा लगा, मुझे तो ख़ुशी हुई की आपने आज मुझे इस अवस्था में देखा मैं हैरान रह गया.

मैंने तुरंत से वह से चला आया अपने कमरे में, थोड़ी देर के बाद मेरी शैली मेरे कमरे में आई उसके बाल जो की काले काले और बहुत ही लम्बे थे वो गिला था वो पंखे में सूखने के लिए और भी अपने बाल को फैला ली थी अब तो वो कमाल की लग रही थी, उसके चेहरे का नूर देखते ही बन रहा था, मैंने आज ताज उनको ऐसी रूप में नहीं देखा, मस्त सेक्सी लग रही थी. वो मुझे देखके मुस्कुराई और अपने होठ को अपने डाट से दबाई मैं समझ गया की उसके इरादे नेक नहीं है, उन्होंने पूछा कैसी लगी मैं आपको आज बाथरूम में, मैंने कहा कहा देख पाया आपको पूरी तरीके से मैं तो डर गया था इसलिए ठीक से नहीं देखा. उन्होंने कहा अच्छा जी, चलो आज दीदी और माँ दोनों मार्किट जाएगी तब मैं आपको दिखाउंगी की मैं क्या चीज़ हु, मैं समझ गया उस टाइम घर में कोई नहीं होगा, दिन के करीब १ बज रहे थे खाना खाकर लेट गया पर नींद कब आ गयी पता ही नहीं चला, जब नींद खुली तो देखा मेरी साली मुझे उठा रही है पूछ रही थी की चाय बनाऊ शाम के ४ बज गए है, दीदी और माँ दोनों मार्किट गयी है वो आपको नहीं बता पाई क्यों की आप सोये हुए थे.

मैंने कहा नहीं अभी नहीं बैठिये ना मेरे पास, तभी वो सेक्सी अंदाज़ में बोली क्यों क्या कोई गलत इरादा है क्या? मैंने कहा नहीं जी कोई गलत इरादा नहीं है जब इंसान भूखा रहता है तभी उसे खाने की इच्छा होती है, आजकल तो मेरा पेट भरा हुआ है, आपकी दीदी रात भर खिलाती है, तभी वो बोली क्यों जी रोज रोज एक ही चीज़ खाके बोर नहीं होते, मैंने कहा क्या कर कोई और भी तो चीज़ नहीं है, तभी तो बोली गलत “मैं हु ना” हॉट मिर्ची वाली, और ताजा हु चाहो तो चख के देख लो, मैंने कहा इधर आना वो थोड़ी करीब हो गयी मैंने उसके बूब को अपने हाथ से कास के दबाया.
वो इस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स की आवाज़ निकाली और मचलने लगी मैंने उसे किश किया वो भी मुझे एक डीप किश दी, पूरी तरीके से मेरे होठ को चाटने लगी और मेरे बाल में अपने उंगलिया घूमने लगी मैंने उसे अपने बहो में भरके उसे लिटा दिया और और उसके कपडे के ऊपर उठा दिया और ब्रा को पीछे से खोल दिया, उसके दो बड़े बड़े क्रिकेट के बाल के आकर को दो मस्त मस्त चूच मेरे सामने था, उसका ऊपर का भाग हलके पिंक कलर का था मैंने तो पागल हो गया क्या चीज़ था,

मैंने उसके चूच को दबाना और पीना शुरू कर दिया, वो भी मुझे अपनी बहो में समा लेना चाहती थी, तरह तरह की आवाज़ निकाल रही थी जिससे मैं और भी कामुक हो रहा था फिर मैंने उसके निचे के भी सारे कपडे उतार दिए, मेरी साली पूरी नंगी बाल बिखरे हुए मेरे सामने चुदने के लिए तैयार थी, मैंने अपना हाथ उसके बूर पे लगाया तो वो सिहर गयी क्यों की आजतक किसी ने भी उसके बदन को हाथ नहीं लगाया था, फिर मैंने उसके बूर में अपना ऊँगली करने की कोशिश की पर ऊँगली भी नहीं जा रहा था और मेरी साली मेरे हाथ को पकड़ ली, मैंने फिर से किश करना शुरू किया होठ से शुरू हुआ गर्दन तक होते हुए दोनों चूच को फिर नाभि में जीभ घूमना फिर दोनों पैर को फैलाकर मैंने उसके बूर के पास पहुंच कर जीभ से चाटना शुरू कर दिए, वो कराहने लगी बोली, बोली क्या कर रहे हो जीजा, अब तो ना तड़पाओ प्लीज, सील तोड़ दो मेरा, मेरे बूर का सील तोड़ दो ये आपके लिए ही है, अपने लैंड को बूर में घुसाओ ना प्लीज अब रहा नहीं जा रहा है, चोद दो मुझे अपनी रानी बना लो, मेरे बूर में लैंड घुसाओ, मैंने अपने लौड़ा को उसके बूर पे रख के एक धक्का लगाया मेरा लौड़ा मुस्किल से १ इंच ही गया होगा पर वो दर्द से कराह उठी, मैंने थोड़ा रूक गया फिर मैंने उसके चूच को सहलया फिर से अपने लौड़े में थोड़ा थूक लगाया और फिर अपने हाथ से उसके बूर पे सेट किया और इस बार पूरा का पूरा अंदर कर दिए, वो कराह उठी और आँख में आंसू आ गए मैंने उसे थोड़ा चुचकारा और प्यार किया और मैंने समझाया की पहली चुदाई में दर्द होता ही है, उसके बूर का खून मेरे लौड़े में लग चूका था, मैंने फिर उसे चोदना शुरू किया वो भी अपना दर्द भूलकर गांड उठा उठा के चुदवाने लगी, मैंने भी खूब चोदा करीब १ घंटे तक अलग अलग पोजीशन में. अब तो साली मेरी आधी घरवाली है, मैंने तो दोनों मजा ले रहा हु, आपको कहानी कैसी लगी जरूर बताये, निचे कमेंट जरूर करे, आपका मित्र : कृष्ण कुमार दुबे,

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hotgirlमेरे प्यारे दोस्तो आज मेरे एक पाठक ने ये कहानी भेजा है जो एक दम सही है आशा करती हू की आपको ये पसंद आएगा, आगे की कहानी आपके सामने प्रस्तुत है! कहानी मेरे पाठक की जुवानी…..
मेरा नाम रवि है है, ३८ वर्षीय, शादीशुदा, बाल-बच्चेदार आदमी हूँ, शादी को 1३ साल हो चुके हैं, एक बहुत ही शानदार पत्नी और दो बच्चे हैं।
मेरी एक साली है, नाम है पूजा मेरी पत्नी से २ साल और मुझ से ५ छोटी है,  उसकी शादी हो चुकी है लेकिन उसका पति एक दम लंगूर है, मेरी साली बहुत ही खूबसूरत है मस्त माल है,
जो भी उसको देखता है मुझे पक्का यकीन है कि कभी ना कभी उसके नाम की मुट्ठ ज़रूर मारता होगा। मतलब इतनी खूबसूरत और ज़बरदस्त कद-काठी की स्वामिनी है। मैंने खुद उसके नाम से अपने ठुल्लू को कई बार पीटा है।
तो किस्सा यूँ शुरू हुआ कि हम एक शादी में दिल्ली में इकट्ठे हुए। उधर लड़की की शादी थी तो पूरा बैन्क्वेट हॉल बुक था।
लड़की की शादी थी और वो भी रात की शादी। यह बात नवम्बर की है, मौसम बड़ा सुहावना, हल्की ठंड थी। सब अपने-अपने बेस्ट ड्रेस में सज-संवर कर शादी के मंडप में पहुँच चुके थे।
मैं भी परिवार सहित पहुँच चुका था। जाते ही रिश्तेदारों के साथ मेल-मिलाप के बाद सब अपने-अपने ग्रुप्स में बँट गए। हम पीने वाले अलग, लेडीज अलग, बच्चे अलग।
शादी रात को देर से होनी थी, 2-3 पैग लगा कर हल्का सा सुरूर बन गया था।
पीने के बाद मेरी आँखें पूजा को ढूँढ़ रही थीं कि साली साहिबा नहीं दिखीं। जब दिमाग़ में दारू चढ़ी हो तो दूसरी औरत वैसे ही अच्छी लगने लगती है, चाहे आपकी अपनी बीवी कितनी भी शानदार क्यों ना हो।
खैर मैं भी अपने साढू साहब के साथ पंडाल में चला गया, पैग मेरे हाथ में ही था।
आगे गए तो साढू भाई को कोई मिल गया और मैं आगे बढ़ गया। आगे से आ गई पूजा…
उफ्फ तौबा… क्रीम और डार्क ब्राउन को कॉंबिनेशन लांचे में तो वो ग़ज़ब की लग रही थी!
मेरे पास आकर बोली- अरे लोकी, कैसे हो?
‘ओ हैलो.. स्वीट-हर्ट, आई एम फाइन… पर तुम तो आज ग़ज़ब लग रही हो..!’
‘अच्छा.. थैंक्स..!’
‘बिल्कुल… मेरी फॅवरेट, चॉक्लेट आइस्क्रीम की तरह…!’ ये कह कर मैं घूम कर उसके पीछे जा खड़ा हुआ, अपने दोनों हाथ उसके कंधो पर रख कर उसके
कान में धीरे से बोला- जी करता है कि आज तो तुम्हें सर से लेकर पाँव तक चाट जाऊँ..!
कहने को तो मैंने कह दिया, पर मेरा दिल बड़े ज़ोर से धड़क रहा था।
वो बोली- अरे रहने दो.. सब बातें हैं तुम्हारी..!
अब क्योंकि बात तो चल रही थी आइसक्रीम की, पर बात के अन्दर की बात यह थी कि मैंने उसकी चूत चाटने की बात कर रहा था, समझ वो भी गई थी कि मैं क्या कह रहा हूँ।
मैंने कहा- सच में.. अगर आप इजाज़त दो तो..!
‘किस बात की इजाज़त..!’ उसने ज़रा नखरे से, ज़रा इतरा कर कहा।
‘चाटने की..!’ मैंने भी बेशर्मी से कहा, बिना अपने रिश्ते की मर्यादा का ख़याल रखे।
‘जूते पड़ेंगे जूते… और ये सारी चाट-चटाई भूल जाओगे..!’
‘अरे जानेमन एक बार चटवा कर तो देखो.. बाद में तुम्हारे जूते खाने भी मंज़ूर हैं…!’ मैंने भी कह ही दिया।
वो मुड़ी और मेरी आँखों में गहराई से देखा, जैसे कुछ ढूँढ रही हो।
‘क्या सच में चाट सकते हो तुम?’ उसके सवाल ने जैसे मेरे पाँव के नीचे से ज़मीन ही खिसका दी। मतलब वो चटवाने को तैयार थी।
मैंने भी जोश में आ कर कह दिया- ओह यस.. मैं अभी चाटने को तैयार हूँ.. अगर तुम चटवाने को तैयार हो तो..!
पहले तो पूजा मुस्कुराई और बोली- अगर मौक़े से भाग गए तो?
‘तो तुम्हारी जूती और मेरा सर..!’
‘रहने दो, तुम से नहीं होगा..!’
‘अरे क्यों नहीं.. मैं तो हमेशा करता हूँ, चाहो तो अपनी बहन से पूछ लो..!’
अब तो यह बिल्कुल साफ़ था कि चूत-चटाई की बात हो रही थी।
उसने फिर मुझे गौर से देखा- भागोगे तो नहीं?
‘क्यों क्या इतनी गंदी है कि मैं देख कर डर कर भाग जाऊँगा..!’
‘शट-अप.. मैं अपनी सफाई का बहुत ख्याल रखती हूँ..!’
‘ओके तो फिर चलो, देखते हैं कैसा टेस्ट है?’
‘अभी..? पर कहाँ?’
‘अरे ऊपर, बैन्क़इट हॉल के ऊपर के सब कमरे में मेहमानों के लिए बुक, किसी में भी घुस जाएँगे, कोई ना कोई तो खाली मिल ही जाएगा..!’
मैंने कहा और उसकी कलाई पकड़ कर चल पड़ा और वो भी मेरे पीछे-पीछे चलने लगी। ऊपर पहुँचे तो 2-3 कमरे देखने के बाद एक कमरा खुला मिला, उसमें किसी का सामान नहीं था, मतलब कोई भी आने वाला नहीं था।
हम छुप कर अन्दर घुसे और मैंने दरवाज़ा लॉक कर दिया।
पूजा बेड के पास जा कर खड़ी हो गई, मैं उसके पास गया, और उसे बेड पर बिठाया।
‘पूजा, क्या तुम सच में इसके लिए तैयार हो?’
आज मैंने पहली बार उसे नाम लेकर बुलाया था।
उसने ‘हाँ’ में सर हिलाया।
मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि जिस औरत पर सारी रिश्तेदारी के मर्द मरते हैं, वो मुझसे चूत चटवाने को कैसे तैयार हो गई और क्यों हो गई..!
खैर मैंने ये सब सोचना छोड़ कर उसके पाँव के पास से उसका लांचा ऊपर उठाया और घुटनों के ऊपर लाकर रख दिया, दो खूबसूरत सफेद संगमरमर सी तराशी हुई टाँगें मेरे सामने नंगी हो गईं।
मैंने उसके दोनों घुटनों को चूमा और उसको बेड पर लिटा दिया। उसने एक पिलो उठाया और अपने सर के नीचे रख लिया।
मैंने बड़े प्यार से सहलाते हुए उसका लांचा उसकी जाँघों तक उठाया, बहुत ही खूबसूरत, मखमली नर्म जांघें, मैंने उसकी जांघों को चूमा, चाटा, सहलाया…!
मैं महसूस कर रहा था कि मेरा स्पर्श उसको उत्तेजित कर रहा था। फिर मैंने उसका पूरा लांचा उठा कर उसके ऊपर रख दिया।
मेरी साली साहिबा ने कच्छी पहन ही नहीं रखी थी, उसकी गोरी-गोरी छोटी सी चूत और चूत में से बाहर झाँकती उसकी भगनासा मुझे दिखाई दी।
एक शानदार चूत जिसे मैं जी भर के चाट सकता था, क्योंकि मैंने तो इससे भी गंदी-गंदी चूतें चाटी थीं।
पूजा की चूत थोड़ी ऊपर को उभरी हुई थी, बड़ी सफाई से शेव की हुई, कोई बाल नहीं, खुशबूदार पाउडर लगा हुआ।
मैंने पहले आस-पास से शुरू किया, उसकी जांघों, पेडू और चूत के ऊपर से चुम्बन किया, पूजा को भी मज़ा आ रहा था, उसके अंगों का फड़कना, कूल्हों का उचकना बता रहा था कि मेरे हाथों और होंठों से उसे करेंट लगा था।
फिर मैंने अपना मुँह खोला और पूजा की पूरी चूत को अपने मुँह में ले लिया और मुँह के अन्दर ही अपनी जीभ से उसकी चूत के ऊपर से चाटा।
पूजा ने अपने दोनों हाथों से मेरा सर पकड़ लिया और अपनी टाँगें पूरी तरह से फैला दीं।
गोरी टाँगों पर रेड सैंडिल बहुत जँच रहे थे।
फिर मैंने अपनी पूरी जीभ पूजा की चूत में घुमाई, वो तड़प उठी, उसकी चूत गीली हो चुकी थी।
मैं बड़े जोश से उसकी चूत चाट रहा था, उसके मुँह से अजीब ओ ग़रीब आवाज़ें आ रही थीं और बीच-बीच में वो मुझे गालियाँ भी निकाल रही थी- साले कुत्ते.. और ज़ोर से चाट.. बहनचोद.. खा जा इसे.. हरामी..!’
मुझे उसकी गालियों की कोई परवाह नहीं थी। जब मैंने यह महसूस किया कि अब वो पूरी तरह से गर्म हो चुकी है तो मैंने नया पैंतरा आज़माया।
मैं उठ कर खड़ा हुआ और बोला- पूजा चल उठ और बेड के बिल्कुल सेंटर में लेट..!
‘क्यों.. क्या.. करोगे.. भी अब मेरे साथ?’
‘नहीं थोड़ा आराम से चाटूँगा, पर अगर तू बोलेगी तो तुझे चोद भी दूँगा, पर अभी तो सिर्फ़ तेरी चूत का पानी पीना है… और वो भी आराम से मज़े ले-ले कर..!’
पूजा खिसक कर पीछे हुई और बिस्तर के बीच में चली गई। मैंने अपने जूते उतारे और बेड पर पूजा से उलट डायरेक्शन में लेट गया यानी कि मेरा सर उसकी टाँगों में था और उसका सर मेरी टाँगों के पास था।
इसी पोज़ मैंने उसे अपने ऊपर लेटा लिया और उसकी चूत मेरे मुँह के ऊपर आ गई और उसने अपना सर मेरे लंड पर टिका लिया जो मेरी पैन्ट में क़ैद हुआ फुँफकार रहा था।
खैर.. जब मैंने दोबारा पूजा की चूत चाटनी शुरू की, तो उसकी चूत से जो भी पानी टपकता वो सीधा मेरे मुँह में आ रहा था।
थोड़ी देर बाद बिना मेरे कहे पूजा ने मेरी पैन्ट खोली और चड्डी समेत नीचे सरका दी और मेरा तना हुआ लंड आज़ाद हो गया।
पूजा ने उसे हाथ में पकड़ा और अपने खूबसूरत मरून रंग से रंगे हुए होंठों में पकड़ लिया।
अब मैं उसकी चूत चाट रहा था और वो ज़ोर-ज़ोर से मेरा लंड चूस रही थी। ज़ोर-ज़ोर से सर हिलने से उसके सारे बाल बिखर गए।
वो तो इतनी जोश में आ गई कि मेरा पूरा लंड मुँह में लेकर आगे-पीछे कर रही थी और मुझे लेटे-लेटे उसका मुँह चोदने का मज़ा मिल रहा था।
यह दौर चलता रहा। जब उसने अपने मुँह में साथ अपनी कमर भी ज़ोर-ज़ोर से हिलानी शुरू कर दी।
मैं समझ गया कि अब साली अपने चरम पर आ गई है और वो ही हुआ।
उसने तड़प कर अपनी दोनों जांघों को कस लिया और मेरा मुँह अपनी चूत के साथ भींच लिया।
मेरा सारा लंड उसके मुँह में उसके गले तक उतर चुका था।
मैं भी इस जोश को बर्दाश्त ना कर सका और उसके मुँह में ही झड़ गया। मेरा माल सीधा उसके गले से उसके पेट में उतर गया।
दो मिनट पूरी शान्ति से हम वैसे ही लेटे रहे। फिर वो उठी, मेरा लंड अपने मुँह से निकाला।
मेरा मुँह अपनी जाँघों से आज़ाद किया और अपने कपड़े ठीक किए, फिर बाथरूम में चली गई।
फ्रेश को कर वो सीधी नीचे ब्यूटीशियन के पास चली गई।
मेरा सारा नशा उतर चुका था। मैं भी ठीक-ठाक हो कर नीचे चला गया और शादी में मसरूफ़ हो गया।
उसके बाद मैं और पूजा एक-दूसरे के सामने नहीं आए।
शादी संपन्न हो गई और हम सब अपने-अपने घर आ गए। उसके बाद मैंने फिर से पूजा से बात करने की कोशिश की कि चलो दोबारा कुछ करते हैं, पर उसने कोई मौक़ा नहीं दिया।
आज 6 महीने गुज़र चुके हैं और वो अपने घर में खुश है और मैं अपने घर में उसकी याद में कभी-कभी मुट्ठ मार लेता हूँ कि कभी तो पूजा मेरे नीचे आएगी।मेरे प्यारे दोस्तो आज मेरे एक पाठक ने ये कहानी भेजा है जो एक दम सही है आशा करती हू की आपको ये पसंद आएगा, आगे की कहानी आपके सामने प्रस्तुत है! कहानी मेरे पाठक की जुवानी…..
मेरा नाम रवि है है, ३८ वर्षीय, शादीशुदा, बाल-बच्चेदार आदमी हूँ, शादी को 1३ साल हो चुके हैं, एक बहुत ही शानदार पत्नी और दो बच्चे हैं।
मेरी एक साली है, नाम है पूजा मेरी पत्नी से २ साल और मुझ से ५ छोटी है,  उसकी शादी हो चुकी है लेकिन उसका पति एक दम लंगूर है, मेरी साली बहुत ही खूबसूरत है मस्त माल है,
जो भी उसको देखता है मुझे पक्का यकीन है कि कभी ना कभी उसके नाम की मुट्ठ ज़रूर मारता होगा। मतलब इतनी खूबसूरत और ज़बरदस्त कद-काठी की स्वामिनी है। मैंने खुद उसके नाम से अपने ठुल्लू को कई बार पीटा है।
तो किस्सा यूँ शुरू हुआ कि हम एक शादी में दिल्ली में इकट्ठे हुए। उधर लड़की की शादी थी तो पूरा बैन्क्वेट हॉल बुक था।
लड़की की शादी थी और वो भी रात की शादी। यह बात नवम्बर की है, मौसम बड़ा सुहावना, हल्की ठंड थी। सब अपने-अपने बेस्ट ड्रेस में सज-संवर कर शादी के मंडप में पहुँच चुके थे।
मैं भी परिवार सहित पहुँच चुका था। जाते ही रिश्तेदारों के साथ मेल-मिलाप के बाद सब अपने-अपने ग्रुप्स में बँट गए। हम पीने वाले अलग, लेडीज अलग, बच्चे अलग।
शादी रात को देर से होनी थी, 2-3 पैग लगा कर हल्का सा सुरूर बन गया था।
पीने के बाद मेरी आँखें पूजा को ढूँढ़ रही थीं कि साली साहिबा नहीं दिखीं। जब दिमाग़ में दारू चढ़ी हो तो दूसरी औरत वैसे ही अच्छी लगने लगती है, चाहे आपकी अपनी बीवी कितनी भी शानदार क्यों ना हो।
खैर मैं भी अपने साढू साहब के साथ पंडाल में चला गया, पैग मेरे हाथ में ही था।
आगे गए तो साढू भाई को कोई मिल गया और मैं आगे बढ़ गया। आगे से आ गई पूजा…
उफ्फ तौबा… क्रीम और डार्क ब्राउन को कॉंबिनेशन लांचे में तो वो ग़ज़ब की लग रही थी!
मेरे पास आकर बोली- अरे लोकी, कैसे हो?
‘ओ हैलो.. स्वीट-हर्ट, आई एम फाइन… पर तुम तो आज ग़ज़ब लग रही हो..!’
‘अच्छा.. थैंक्स..!’
‘बिल्कुल… मेरी फॅवरेट, चॉक्लेट आइस्क्रीम की तरह…!’ ये कह कर मैं घूम कर उसके पीछे जा खड़ा हुआ, अपने दोनों हाथ उसके कंधो पर रख कर उसके
कान में धीरे से बोला- जी करता है कि आज तो तुम्हें सर से लेकर पाँव तक चाट जाऊँ..!
कहने को तो मैंने कह दिया, पर मेरा दिल बड़े ज़ोर से धड़क रहा था।
वो बोली- अरे रहने दो.. सब बातें हैं तुम्हारी..!
अब क्योंकि बात तो चल रही थी आइसक्रीम की, पर बात के अन्दर की बात यह थी कि मैंने उसकी चूत चाटने की बात कर रहा था, समझ वो भी गई थी कि मैं क्या कह रहा हूँ।
मैंने कहा- सच में.. अगर आप इजाज़त दो तो..!
‘किस बात की इजाज़त..!’ उसने ज़रा नखरे से, ज़रा इतरा कर कहा।
‘चाटने की..!’ मैंने भी बेशर्मी से कहा, बिना अपने रिश्ते की मर्यादा का ख़याल रखे।
‘जूते पड़ेंगे जूते… और ये सारी चाट-चटाई भूल जाओगे..!’
‘अरे जानेमन एक बार चटवा कर तो देखो.. बाद में तुम्हारे जूते खाने भी मंज़ूर हैं…!’ मैंने भी कह ही दिया।
वो मुड़ी और मेरी आँखों में गहराई से देखा, जैसे कुछ ढूँढ रही हो।
‘क्या सच में चाट सकते हो तुम?’ उसके सवाल ने जैसे मेरे पाँव के नीचे से ज़मीन ही खिसका दी। मतलब वो चटवाने को तैयार थी।
मैंने भी जोश में आ कर कह दिया- ओह यस.. मैं अभी चाटने को तैयार हूँ.. अगर तुम चटवाने को तैयार हो तो..!
पहले तो पूजा मुस्कुराई और बोली- अगर मौक़े से भाग गए तो?
‘तो तुम्हारी जूती और मेरा सर..!’
‘रहने दो, तुम से नहीं होगा..!’
‘अरे क्यों नहीं.. मैं तो हमेशा करता हूँ, चाहो तो अपनी बहन से पूछ लो..!’
अब तो यह बिल्कुल साफ़ था कि चूत-चटाई की बात हो रही थी।
उसने फिर मुझे गौर से देखा- भागोगे तो नहीं?
‘क्यों क्या इतनी गंदी है कि मैं देख कर डर कर भाग जाऊँगा..!’
‘शट-अप.. मैं अपनी सफाई का बहुत ख्याल रखती हूँ..!’
‘ओके तो फिर चलो, देखते हैं कैसा टेस्ट है?’
‘अभी..? पर कहाँ?’
‘अरे ऊपर, बैन्क़इट हॉल के ऊपर के सब कमरे में मेहमानों के लिए बुक, किसी में भी घुस जाएँगे, कोई ना कोई तो खाली मिल ही जाएगा..!’
मैंने कहा और उसकी कलाई पकड़ कर चल पड़ा और वो भी मेरे पीछे-पीछे चलने लगी। ऊपर पहुँचे तो 2-3 कमरे देखने के बाद एक कमरा खुला मिला, उसमें किसी का सामान नहीं था, मतलब कोई भी आने वाला नहीं था।
हम छुप कर अन्दर घुसे और मैंने दरवाज़ा लॉक कर दिया।
पूजा बेड के पास जा कर खड़ी हो गई, मैं उसके पास गया, और उसे बेड पर बिठाया।
‘पूजा, क्या तुम सच में इसके लिए तैयार हो?’
आज मैंने पहली बार उसे नाम लेकर बुलाया था।
उसने ‘हाँ’ में सर हिलाया।
मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि जिस औरत पर सारी रिश्तेदारी के मर्द मरते हैं, वो मुझसे चूत चटवाने को कैसे तैयार हो गई और क्यों हो गई..!
खैर मैंने ये सब सोचना छोड़ कर उसके पाँव के पास से उसका लांचा ऊपर उठाया और घुटनों के ऊपर लाकर रख दिया, दो खूबसूरत सफेद संगमरमर सी तराशी हुई टाँगें मेरे सामने नंगी हो गईं।
मैंने उसके दोनों घुटनों को चूमा और उसको बेड पर लिटा दिया। उसने एक पिलो उठाया और अपने सर के नीचे रख लिया।
मैंने बड़े प्यार से सहलाते हुए उसका लांचा उसकी जाँघों तक उठाया, बहुत ही खूबसूरत, मखमली नर्म जांघें, मैंने उसकी जांघों को चूमा, चाटा, सहलाया…!
मैं महसूस कर रहा था कि मेरा स्पर्श उसको उत्तेजित कर रहा था। फिर मैंने उसका पूरा लांचा उठा कर उसके ऊपर रख दिया।
मेरी साली साहिबा ने कच्छी पहन ही नहीं रखी थी, उसकी गोरी-गोरी छोटी सी चूत और चूत में से बाहर झाँकती उसकी भगनासा मुझे दिखाई दी।
एक शानदार चूत जिसे मैं जी भर के चाट सकता था, क्योंकि मैंने तो इससे भी गंदी-गंदी चूतें चाटी थीं।
पूजा की चूत थोड़ी ऊपर को उभरी हुई थी, बड़ी सफाई से शेव की हुई, कोई बाल नहीं, खुशबूदार पाउडर लगा हुआ।
मैंने पहले आस-पास से शुरू किया, उसकी जांघों, पेडू और चूत के ऊपर से चुम्बन किया, पूजा को भी मज़ा आ रहा था, उसके अंगों का फड़कना, कूल्हों का उचकना बता रहा था कि मेरे हाथों और होंठों से उसे करेंट लगा था।
फिर मैंने अपना मुँह खोला और पूजा की पूरी चूत को अपने मुँह में ले लिया और मुँह के अन्दर ही अपनी जीभ से उसकी चूत के ऊपर से चाटा।
पूजा ने अपने दोनों हाथों से मेरा सर पकड़ लिया और अपनी टाँगें पूरी तरह से फैला दीं।
गोरी टाँगों पर रेड सैंडिल बहुत जँच रहे थे।
फिर मैंने अपनी पूरी जीभ पूजा की चूत में घुमाई, वो तड़प उठी, उसकी चूत गीली हो चुकी थी।
मैं बड़े जोश से उसकी चूत चाट रहा था, उसके मुँह से अजीब ओ ग़रीब आवाज़ें आ रही थीं और बीच-बीच में वो मुझे गालियाँ भी निकाल रही थी- साले कुत्ते.. और ज़ोर से चाट.. बहनचोद.. खा जा इसे.. हरामी..!’
मुझे उसकी गालियों की कोई परवाह नहीं थी। जब मैंने यह महसूस किया कि अब वो पूरी तरह से गर्म हो चुकी है तो मैंने नया पैंतरा आज़माया।
मैं उठ कर खड़ा हुआ और बोला- पूजा चल उठ और बेड के बिल्कुल सेंटर में लेट..!
‘क्यों.. क्या.. करोगे.. भी अब मेरे साथ?’
‘नहीं थोड़ा आराम से चाटूँगा, पर अगर तू बोलेगी तो तुझे चोद भी दूँगा, पर अभी तो सिर्फ़ तेरी चूत का पानी पीना है… और वो भी आराम से मज़े ले-ले कर..!’
पूजा खिसक कर पीछे हुई और बिस्तर के बीच में चली गई। मैंने अपने जूते उतारे और बेड पर पूजा से उलट डायरेक्शन में लेट गया यानी कि मेरा सर उसकी टाँगों में था और उसका सर मेरी टाँगों के पास था।
इसी पोज़ मैंने उसे अपने ऊपर लेटा लिया और उसकी चूत मेरे मुँह के ऊपर आ गई और उसने अपना सर मेरे लंड पर टिका लिया जो मेरी पैन्ट में क़ैद हुआ फुँफकार रहा था।
खैर.. जब मैंने दोबारा पूजा की चूत चाटनी शुरू की, तो उसकी चूत से जो भी पानी टपकता वो सीधा मेरे मुँह में आ रहा था।
थोड़ी देर बाद बिना मेरे कहे पूजा ने मेरी पैन्ट खोली और चड्डी समेत नीचे सरका दी और मेरा तना हुआ लंड आज़ाद हो गया।
पूजा ने उसे हाथ में पकड़ा और अपने खूबसूरत मरून रंग से रंगे हुए होंठों में पकड़ लिया।
अब मैं उसकी चूत चाट रहा था और वो ज़ोर-ज़ोर से मेरा लंड चूस रही थी। ज़ोर-ज़ोर से सर हिलने से उसके सारे बाल बिखर गए।
वो तो इतनी जोश में आ गई कि मेरा पूरा लंड मुँह में लेकर आगे-पीछे कर रही थी और मुझे लेटे-लेटे उसका मुँह चोदने का मज़ा मिल रहा था।
यह दौर चलता रहा। जब उसने अपने मुँह में साथ अपनी कमर भी ज़ोर-ज़ोर से हिलानी शुरू कर दी।
मैं समझ गया कि अब साली अपने चरम पर आ गई है और वो ही हुआ।
उसने तड़प कर अपनी दोनों जांघों को कस लिया और मेरा मुँह अपनी चूत के साथ भींच लिया।
मेरा सारा लंड उसके मुँह में उसके गले तक उतर चुका था।
मैं भी इस जोश को बर्दाश्त ना कर सका और उसके मुँह में ही झड़ गया। मेरा माल सीधा उसके गले से उसके पेट में उतर गया।
दो मिनट पूरी शान्ति से हम वैसे ही लेटे रहे। फिर वो उठी, मेरा लंड अपने मुँह से निकाला।
मेरा मुँह अपनी जाँघों से आज़ाद किया और अपने कपड़े ठीक किए, फिर बाथरूम में चली गई।
फ्रेश को कर वो सीधी नीचे ब्यूटीशियन के पास चली गई।
मेरा सारा नशा उतर चुका था। मैं भी ठीक-ठाक हो कर नीचे चला गया और शादी में मसरूफ़ हो गया।
उसके बाद मैं और पूजा एक-दूसरे के सामने नहीं आए।
शादी संपन्न हो गई और हम सब अपने-अपने घर आ गए। उसके बाद मैंने फिर से पूजा से बात करने की कोशिश की कि चलो दोबारा कुछ करते हैं, पर उसने कोई मौक़ा नहीं दिया। आपको ये कहानी कैसी लगी आप ज़रूर कॉमेंट करेंगे,

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