अपने मरीज से चुदने के बाद मेरे पति ने मुझे घर से निकाल दिया

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मैं अलका आप सभी का नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पर बहुत बहुत स्वागत कर रही हूँ. मैं आपको अपनी कहानी अपनी जुबानी सुना रही हूँ. ये सुनकर आपका दिल दहल जाएगा और आपकी आँखें खुल जाएँगी. मैं एक बहुत ही सताई हुई औरत हूँ. मैं अमेठी की रहने वाली हूँ. मेरे पति छोटेलाल बवासीर के डॉक्टर थे. वो बहुत ही सफल डॉक्टर थे. उनके हाथ में बहुत हुनर था. बवासीर, पाइल्स, फिसेर, फेचुला का वो बहुत सफल इलाज करते थे. मेरे पति घर ही अपना क्लिनिक चलाते थे. मेरे मोहल्ले के सभी लोग मुझको डॉकटराइन डॉकटराइन कहकर बुलाते थे. उन दिनों में मेरी मेरे मोहल्ले में तूती बोलती थी.

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पुरे मोहल्ले में मेरा घर ही दो मंजिला था. जहाँ मेरे सभी पडोसी बहुत गरीब थे, वही हम बहुत अमीर थे. हम लोग बासमती चावल रोज खाते थे. अच्छे महंगे कपड़े पहनते थे. मेरे घर में महंगे महेंगे सोफे थे. मैं भी कभी कभी अपने पति छोटेलाल के साथ क्लिनिक में बैठती थी. मेरे पति का काम बहुत बढ़िया चल रहा था. रोजाना हम ८ से १० हजार कमा लेते थे. कुछ दिन बाद मेरे पति के क्लिनिक पर महबूब अली नामक एक मरीज आने लगा. वो मुस्लिम था. मेरे पति कुछ दिनों के लिए शहर से बाहर गए हुए थे, इसलिए मैं उसके बवासीर का इलाज करने लगी. महबूब अली एक बहूत ही दिलचस्प आदमी थी. वो शेरो शायरी करता था. जब भी वो मेरे पास इलाज के लिए आता था कोई ना कोई अपना लिखा शेर जरुर सुनाता था.

धीरे धीरे मेरी उससे नजदीकियां बढने लगी. एक दिन जब वो आया तो मैं भी बड़े रोमांटिक मूड में थी. मैंने कुछ शेर लिखे और उसे सुना दिए. महबूब अली ने मेरा हाथ पकड़ लिया और मेरे होंठो पर चुम्मी ले ली. ‘अलका जी!! आप बहुत खूबसूरत है!!’ महबूब बार बार कहता था. मुझे उससे प्यार हो गया था. मैंने उससे कह दिया. महबूब ने मुझे वहीँ क्लिनिक में पकड़ लिया और मेरे हाथ पकड़ के मेरे दोनों मस्त मस्त गुलाबी होठों पर उसने चुम्मा ले लिया. फिर मेरे होंठ वो पीने लगा. मैं उन दोनों बड़ी जवान थी. २५ साल की मस्त माल थी मैं. मैं इतनी गोरी और लाल रखी थी की लोग कहते थे मेरे ये गाल गाल नही बल्कि खर्बुज्जे है.

महबूब क्लिनिक में ही मेरे होठ पीने लगा. मैंने भी कोई ऐतराज नही किया. क्यूंकि मैं भी उससे पट गयी थी और उससे प्यार करने लगी थी. क्लिनिक में एक लम्बी मेज थी जहाँ मेरे पति मरीजों का इलाज करते थे. महबूब ने मुझको उसी ६ फुट लम्बी मेज पर लिटा दिया. मैंने उस दिन गुलाबी रंग की साड़ी पहन रखी थी. मेरे डी साइज़ के बड़े बड़े मम्मे साड़ी के उपर से दिख रहें थे. महबूब ने मेरे मम्मों पर अपना हाथ रख दिया. मैं तिलमिला गयी. मैं जान गयी थी की वो मरीज महबूब मुझको चोदना चाहता है. मैं भली भांति जानती थी. महबूब मेरे मस्त मस्त मम्मो को दबाने लगा. मैंने कुछ नही कहा. कुछ देर तक वो मेरे होंठ पीता रहा. फिर उसने मेरे ब्लौस के बटन खोल दिए. मेरी ब्रा जो मैंने पहन रखी थी, उतार दी और मेरे मस्त मस्त डी साइज़ की छातियों को दबाने लगा. मुझे बहुत मजा आया. फिर महबूब मेरे दूध को पीने लगा. सच में मैं निहाल हो गयी.

मेरे डॉक्टर पति से भी अच्छी तरह से वो मेरे दूध पी रहा था. मेरी छातियों को वो अपने हाथ से जोर जोर से दबा रहा था और सहला रहा था. मैं बहुत मजा मार रही थी. मैं अच्छी तरह से जानती थी की जो आदमी इतनी अच्छे तरह से मेरी छातियाँ पी सकता है, वो मुझे अच्छी तरह से चोद भी सकता है. महबूब ने बड़ी देर तक मेरे दोनों मस्त मस्त हेवी साइज़ के मम्मे पिए. फिर उसने मेरी साड़ी उपर उठा दी. उसने क्लिनिक का पर्दा खीच दिया जिससे हम दोनों आशिकों की रासलीला कोई ना देख सके. बाहर लाबी में १५ २० मरीज मेरा इन्तजार कर रहें थे. और मैं यहाँ अपने नए आशिक से चुदवाने जा रही थी. मैंने कोई फ़िक्र नहीं की. महबूब अली ने मेरी साड़ी उपर उठा दी. मैंने गुलाबी रंग की साड़ी के रंग से मैचिंग पैंटी पहन रखी थी. महबूब मेरी गदराई बड़ी सी उभरी चूत को देखकर ललचा गया. उसने तुरंत अपना हाथ मेरी बुर पर लगा दिया और पैंटी के उपर से मेरी बुर पर अपनी उँगलियाँ सहलाने लगा. मुझे इस शायर से प्यार हो गया था. हाँ, मैं इससे चुदवाना चाहती थी.

मैं दिल धक धक करने लगा. महबूब बड़ी देर तक अपनी उँगलियों से पैंटी के उपर से मेरी बुर सहलाता रहा. मेरी पैंटी बहुत कसी थी. मेरी चूत बड़ी मस्त थी. अगर कोई भी मर्द मुझे पैंटी में देख लेता तो कम से कम १ बार तो मुझको चोदना ही चाहता. महबूब का भी कुछ ऐसा ही हाल था. वो बार बार अपनी ऊँगली मेरी बुर पर गुलाबी पैंटी पर सहला रहा था. मैं उसकी चाल समझ रही थी. वो मुझे जादा से जादा तडपाना चाहता था. फिर महबूब से पैंटी के उपर से ही मेरी बुर के अंडर ऊँगली डाल दी और बड़ी गहरी गहरी रगड देने लगा. मैं तड़प उठी. मादरचोद महबूब बड़ा कमीना आदमी निकल गया ना तो वो मुझे चोद रहा था, और ना ही मेरी गांड मार रहा था. मैं गुस्सा हो गयी.

अबे, माँ के लौड़े, सुहरा क्या रहा है?? चोदना है तो चोद, वरना अपनी माँ चुदा!! मैंने गुस्से में कह दिया.

महबूब जाग उठा. उसने तुरंत अपनी पैंट खोल के अपना बड़ा सा लौड़ा निकाला. मेरी गुलाबी पैंटी को उसने एक ओर खिसका दिया. मेरी चूत अब दिखने लगा. महबूब ने तुरंत अपना लौड़ा मेरी बुर पर रखा और जोर का धक्का दिया. उसका मोटा लौड़ा मेरे बोसडे में दाखिल हो गया. महबूब मुझको चोदने लगा. ऊउई माँ !! आआआ माँ माँ माँ !! की आवाज करते हुए मैं चिल्ला चिल्ला कर चुदवाने लगी. महबूब ने मेरी साड़ी दोनों हाथों से पकड़ रखी थी, जिससे वो नीचे लटक कर गन्दी ना हो जाए. वो मुझे धचक धचक करके पेल रहा था. मैं पेलवा रही थी. उधर बाहर मेरे मरीज डॉकटराइन डॉकटराइन करके बुला रही थी. मैं खामोश थी क्यूंकि मैं अपने मरीज से चुदवा रही थी. मैं अपने प्रिय मरीज के साथ गुलछर्रे उड़ा रही थी. मैं जवाब भी नही डे सकती थी. महबूब मुझे फट फट करके चोद रहा था. उसके मोटे लौड़े को मैं अपनी योनी को साफ साफ महसूस कर सकती थी. उसका मोटा लौड़ा मेरी बुर को अच्छे से चोद रहा था. मैं उसकी ताकत और उसकी हनक को साफ साफ महसूस कर सकती थी.

मैं किसी मुर्गी की तरह अपने दोनों पैरों को फैलाये हुए थी. मेरा मरीज महबूब आज मुझको चोद चोदकर मेरी चुदास का इलाज कर रहा था. जहाँ मेरे पति का लौड़ा बड़ा पतला और छोटा सा था वहीँ महबूब का लौड़ा बड़ा मोटा था गधे के लौड़े जैसा सा था. वो मेरे भोसड़े को अपने लौड़े से फाड़ रहा था. अपने लौड़े से चोद चोदकर मेरी चुदास और वासना का इलाज कर रहा था. महबूब ने मुझे २ बार उसी भीड़ भडक्का वाली क्लिनिक में ठोका और मेरी चूत में ही माल गिरा दिया. मुझे चोदकर जब वो बाहर निकला वो बाकी मरीज उसे बड़ी गौर से देखने लगे. फिर मैं उस पर्दे से बाहर निकली. कुछ मरीज शक करने लगे की मैंने उस मरीज से क्लिनिक में ही चुदवा लिया है. ३ दिन बाद मेरे पति लौट आये. अब मैं घर में ही थी, क्यूंकि अब पति आ गए थे. अब वो ही मरीजों का इलाज कर रहें थे. एक दिन मेरे पति ने कमरे में सगी cctvफुटेज चेक की थी तो उनकी आँखें ही फटी रह गयी. महबूब अली के साथ मेरी चुदाई पूरी की पूरी रिकॉर्ड हो गयी थी उस कैमरे में.

ना तो महबूब को इसकी फ़िकर रही और ना मुझे इसका ख्याल रहा. मेरे पति ने उस दिन मुझे चप्पल झाड़ू से खूब मारा.

बता छिनाल , कब तेरा उस मरीज से टांका भिड़ा?? कितने बार उससे अपना भोसड़ा फड़वा चुकी है??? बता छिनाल, मुझे अपनी सब करतूत बता?? मेरे पति छोटेलाल ने मेरा झोटा [बाल] पकड़ के पूछा

मैंने सिर्फ एक बार उससे अपनी चूत फड़वाई है !! मैंने पति को बताया

क्या तू उससे प्यार करती है?? उन्होंने पूछा

हाँ मैंने जवाब दिया.

मेरे पति ने मुझे १५० २०० चपलें मेरे मुँह पर, पीठ गले पर मारी. मेरा मुँह सूज गया. फिर मेरे पति ने मुझ पर लात, घूसों की बौछार कर दी. मुझको उसने किसी पालतू कुतिया की तरह पीटा. १० दिन तक मेरे पति ने मुझसे बात नही की. मैंने कसम खाकर कहा की अब मैं महबूब अली ने नही चुदवाउंगी. पर एक दिन महबूब मेरी क्लिनिक पर आ गया. किस्मत से आज भी मेरे पति किसी काम से बाहर गए हुए थे. महबूब रो रोकर मुझसे अपनी मुहब्बत का इजहार करने लगा. मैं कमजोर पड़ गयी. हम दोनों गले लग गए, हीर रांझा की तरह एक दूजे के सीने से चिपक गए. महबूब इस बार भी जब मेरे होठ पीने लगा तो मैं कुछ नही कर सकी. धीरे धीरे उसके हाथ मेरे मम्मों पर जाने लगे. एक बार फिर से वो मुझे मरीज देखने वाली मेज पर ले गया और पर्दा खींचकर उसने मुझे खूब पेला. मुझे भी मौज आ रही थी इसलिए मैंने भी महबूब से खूब पेलवाया. इस बार भी हम दोनों लै़ला मजनू भूल गए की कैमरे में हमारी चुदाई रिकॉर्ड हो रही है.

मेरे पति ने शाम को जब क्लिनिक बंद की तो फिर से हमारी चुदाई की रिकॉर्डिंग उनको मिल गयी. मेरे पति ने मुझको धक्के मारकर घर से निकाल दिया.

जा छिनाल, अगर तुझे अब उस मरीज से ही चुदवाना है तो उसी के पास जाकर अपना मुँह काला कर !! मेरा पति बोला.

मैं महबूब के घर गयी तो देखा की बहुत छोटा सा घर था. उसके घर में उसकी बीबी, और ८ बच्चे थे. घर कम चिड़ियाघर जादा लगता था. मुझे देखकर महबूब अली की बीबी उससे मेरे बारे में पूछताछ करने लगी. जब उसको पता चला की महबूब का मुझसे नायाजय चुदाई का रिश्ता है तो उसने महबूब से बहुत झगडा किया. फिर भी महबूब ने मुझे रहने के लिए एक कमरा दे दिया. वो रात मेरी उसके घर में पहली रात थी. मेहबूब के बच्चे समझ नही पा रहें थे की मुझे क्या कहे. अम्मी कहे या खाला कहे. जब उसकी बीबी को पता चला की मैं हिंदू हूँ तो उसने पुरे घर में कोहराम मचा दिया. रात को १२ बजे महबूब चुपके से मेरे पास आ गया.

अलका! दरवाजा खोल! मैं महबूब!! वो बोला

अपने जानम की आवाज सुनकर मैं उसे एक बार में पहचान गयी. मैं दरवाजा खोल दिया. महबूब मेरे सीने से लग गया. अपनी बीबी के खौफ से उसने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया. घंटों हम दोनों एक दूसरे की बाहों में लिपटे रहे. फिर महबूब ने मुझसे कपड़े उतारने को कहा. मैं सारे कपड़े निकाल दिए. मेरा यार महबूब मेरे दूध पीने और दाबने लगा. मुझे बड़ा मजा आया. अपने पति से नाइंसाफी करने का मुझे जरा भी पछतावा नही था. महबूब मस्ती से मेरे दूध पी रहा था. मेरी छातियों को जोर जोर से दबोट रहा था, मेरे मम्मो को दाब रहा था. फिर महबूब ने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया. अपना मोटा सा लौड़ा उसने मेरे दोनों मम्मों के बीच में डाल दिया. और मेरे बेहद नरम नरम मम्मो को वो चोदने लगा. मुझे तो बड़ा मजा आया दोस्तों. बड़ी देर तक वो मेरी छातियों को चोदता रहा. फिर उसने मेरी बुर फाड़ के रख दी. ये कहानी आप नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहें थे.

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कामबाली आंटी की कुंवारी बेटी की टाइट बूर की चुदाई

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नमस्कार दोस्तों,  मेरा नाम किशन है और में बर्दमान का रहने वाला हूँ. में एक इंजिनियर हूँ और में एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता हूँ. दोस्तों ऐसे मैं कोई स्टोरी राइटर नहीं हु, पर आज आपके लिए एक बड़ी ही मस्त चुदाई की कहानी लेके आया हु, आशा करता हु की आपको मेरी ये कहानी अच्छी लगेगी. दोस्तों में आज आप सभी को मेरे पहले सच्चे सेक्स अनुभव के बारे में आज आप लोगो को बताना चाहता हूँ और अब में आपको अपनी सच्ची कहानी सुनाता हूँ. दोस्तों यह तब की घटना है जब में उन दिनों अपनी इंजिनियरिंग की पढ़ाई कर रहा था और मुझे अपने हॉस्टल जहाँ पर में रह रहा था उस जगह कुछ समस्या हो रही थी, इसलिए मैंने एक फ्लैट किराए पर ले लिया और अपना वो हॉस्टल छोड़ दिया और उसके बाद मैंने खाना पकाने के लिए एक बंगाली नौकरानी को अपने फ्लैट में काम पर रख लिया जिसकी उम्र करीब 40 साल थी. वो दिखने में बहुत सेक्सी थी और उसके फिगर का आकार 36-28-36 और उसके चूचियों उस उम्र में भी एकदम गोल गोल थे. उसके गोरे भरे हुए बदन को देखकर पता ही नहीं चलता था कि उसकी उम्र 40 साल थी और वो रोज सुबह मेरे फ्लैट पर आती थी और मेरे लिए खाना बनाकर चली जाती और उसके चले जाने के बाद में उठकर नहा धोकर नाश्ता करके अपने कॉलेज चला जाता. फिर वो शाम को 7 बजे करीब वापस मेरे फ्लेट पर आती और घर का कुछ बचा हुआ काम करने के साथ साथ मेरे लिए खाना बनाकर वो वापस कुछ घंटो में चली जाती थी.
दोस्तों उसकी एक बेटी भी थी जिसका नाम रूपा और जैसा उसका नाम ठीक वैसा ही उसका रूप रंग था. वो दिखने में बड़ी ही आकर्षक लगती और वो भी कभी कभी अपनी माँ के साथ उसके कामें में हाथ बटाने के लिए मेरे घर पर आया करती थी और इसलिए मेरी उससे बहुत अच्छी जान-पहचान, बातें और कभी-कभी हंसी-मजाक कर लिया करता था. वो अपनी माँ के साथ बहुत मन लगाकर मेरे घर के सभी काम किया करती और फिर कुछ घंटे रुककर चली जाती. दोस्तों सच कहूँ तो वो मुझे मन ही मन बहुत अच्छी लगती और में उसकी तरफ हमेशा आकर्षित रहता में ही आगे बढ़कर उससे बातें शुरू करता और वो मेरी हर बात का हंसकर जवाब दिया करती थी. एक दिन रूपा की माँ ने मुझसे कहा कि उसकी बेटी रूपा जो कि उस समय आठवी क्लास में पढ़ती थी वो अपनी क्लास के पेपर में फैल हो गई है और उसका वैसे पढ़ाई लिखाई में इतना मन भी नहीं लगता था. फिर मैंने उनसे कहा कि आप उसको कोई अच्छे से प्राइवेट टीचर से बात करके इसको पढ़ाने क्यों नहीं भेजती हो? तो मेरे मुहं से यह बात सुनते ही वो रो पड़ी और उसकी आखों से आंसू बाहर आने लगे और वो मुझसे कहने लगी कि में बहुत ग़रीब हूँ और मुझे इतना काम करने के बाद भी अपने परिवार का पेट पालने में ही बहुत मुश्किल होती है तो आप ही मुझे बताए कि में अपनी बेटी को कैसे किसी के घर पर भिजवाकर इसकी अच्छी पढ़ाई करवाऊँ और उसके लिए मुझे पैसे कहाँ से मिलेंगे? फिर मैंने उससे पूछा कि आपका पति क्या काम करता है? तब वो कहने लगी कि उसका पति कुछ समय पहले तक एक कपड़े की फेक्ट्री में काम किया करता था, लेकिन अचानक से एक दिन वो फेक्ट्री घाटे में चले जाने की वजह से बंद हो गई और उनका पति बेरोज़गार हो गया. वो अभी एक छोटी सी किराने की दुकान चलाता है, लेकिन उसमें बहुत ही कम आमदनी हो पाती है और फिर वो मुझसे बोली कि आप अगर बुरा ना माने तो में आपसे एक बात कहूँ? फिर मैंने कहा कि हाँ बोलो क्या कहना है? तब उसने मुझसे कहा कि आप ही कभी कभी थोड़ा समय निकालकर मेरी बेटी को पढ़ा दिया कीजिए. फिर मैंने तुरंत उससे कहा कि हाँ ठीक है, लेकिन में इसके लिए तुमसे कोई पैसा वैसा नहीं लूँगा और वो मेरे मुहं से यह बात सुनकर बहुत खुश हो गई और वो मुझे दुआ देने लगी. दोस्तों उसके बाद रूपा को वो अपने साथ पढ़ाने के लिए मेरे फ्लैट पर अब हर दिन लाने लगी और में उसको पढ़ाने लगा.
फिर एक दिन में उसको पढ़ा रहा था और रूपा मेरे सामने बैठकर पढ़ रही थी. उसने उस समय एक ढीली सी कमीज पहनी हुई थी जिसकी वजह से जब भी वो नीचे झुककर कुछ लिख रही थी और तब मुझे उसके खुले हुए गोरे मस्त चूचियों नज़र आ जाते उफफफफ्फ़ वाह क्या मस्त चूचियों थे उसके एकदम गोल टाईट जैसे कि वो कोई बड़े आकार की नारंगी हो और में उसको देखकर बहुत आकर्षित होने लगा और मैंने उस दिन पहली बार सोचा कि कैसे रूपा को चोदा जाए? लेकिन में डर रहा था कि अगर बाहर किसी लोगों को पता चल जायेगा तो हम दोनों के साथ बहुत बुरा होगा और मेरे साथ साथ उसकी भी बहुत बदनामी होगी, लेकिन मेरा दिल इतनी बातें सोचने के बाद भी रूपा की चुदाई करने के लिए बड़ा बेचैन था और में उसको पढ़ाते समय कभी उसके हाथ को पकड़कर समझाने लगता तो कभी उसकी जांघो पर अपना हाथ रखकर छूकर उसको बताने लगता, लेकिन वो कभी भी मुझे कुछ नहीं कहती और ना ही मेरी किसी भी हरकत का विरोध करती जिसकी वजह से में धीरे धीरे आगे बढ़ता चला गया और में अपने साथ उसकी मस्त जमकर चुदाई के सपने हर समय देखने लगा था में उसकी सुन्दरता को देखकर अब बिल्कुल पागल हो चुका था और एक दिन शाम को मुझे वो मौका मिल ही गया जिसकी मुझे इतने दिनों से तलाश थी.

दोस्तों उस दिन रूपा मेरे घर पर अकेली ही आई थी और मेरे पूछने पर वो मुझसे बोली कि उसकी माँ की तबीयत आज ठीक नहीं है इसलिए उसको आज अकेले ही आना पड़ा और इतना कहकर वो अपना काम करने लगी. फिर उस समय उसको अकेला देखकर मैंने मन ही मन में ठान लिया था कि आज किसी भी तरह से इसकी चुदाई का वो अधूरा काम पूरा करना ही पड़ेगा और यह बात सोचकर में बहुत हो गया. फिर मैंने देखा कि रूपा उस समय रसोई में अपना काम कर रही थी और मैंने उससे कहा कि आज मेरा सर बहुत ज़ोर से दर्द हो रहा है क्या तुम थोड़ा बाम लगा दोगी? और वो मेरे उस काम के लिए तुरंत तैयार हो गई और वो अपना काम वहीं वैसा ही छोड़कर सीधा मेरे साथ मेरे कमरे में आकर मेरे सर को दबाने लगी और उस पर अपने नरम हाथों से बाम लगाने लगी. फिर मैंने उस समय अपनी दोनों आंखे बंद कर रखी थी. फिर तभी अचानक से मैंने जानबूझ कर अपना एक हाथ बीच हटाने के बहाने मैंने उसके चूचियों को छू लिया जिसकी वजह वो झट से थोड़ा सा पीछे हट गई तो में बिल्कुल अंजान बनकर उससे पूछने लगा कि क्या हुआ? लेकिन वो कुछ नहीं बोली और थोड़ा सा शरमा गई. फिर मैंने देखा कि उसका गाल शरम से एकदम लाल हो गया था और तब मैंने सही मौका देखकर तुरंत उसको अपनी बाहों में जकड़कर उसके नरम गुलाबी होंठो पर एक जबरदस्त किस कर दिया और उसी समय मैंने उसके चूचियों को भी पकड़ लिया. दोस्तों में अपने मन की बात कहूँ तो उस दिन मैंने पहली बार उसके पूरे चूचियों का आकार और उसकी गोलाई और चूचियों को छूकर महसूस किया कि वो एकदम रुई की तरह मुलायम थे. तभी कुछ देर बाद उसने एक झटके से मुझे अपने से दूर हटा दिया और वो रोने लगी. दोस्तों उसको रोता हुआ देखकर मेरे तो सर से पसीना छूट गया क्योंकि में अब यह बात सोच रहा था कि अगर वो बाहर सभी को मेरी इस हरकत के बारे में बता देगी तो मेरी बहुत बदनामी हो जायेगी और में किसी को कुछ भी कहने लायक नहीं रहूँगा और फिर मैंने बहुत ही धीरज से काम लिया और अब में उसको समझाने लगा. में उससे बोला कि तुम मुझसे इस तरह से डर क्यों रही हो? यह तो बस मैंने मज़े करने के लिए किया था और में तो कभी भी तुम्हारा बुरा नहीं चाहूँगा. में हमेशा तुम्हे फ्री में पढ़ाऊंगा और तुम्हे कंप्यूटर सिखाऊंगा और इंग्लिश सिखाऊंगा और तुम्हे एक अच्छी सी नौकरी मिल जाये इस लायक बनाऊँगा. दोस्तों ये कहानी आप नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पर पड़ रहे है.

फिर इस तरह में उसको कुछ देर समझाता रहा और उसके साथ-साथ में उसकी पीठ को भी सहलाता रहा जिसकी वजह से उसने अब रोने के साथ साथ मेरा विरोध करना बंद कर दिया था. अब थोड़ी देर के बाद मैंने उसको एक बार फिर से अपनी तरह लेकर किस किया और इस बार वो मुझसे कुछ भी नहीं बोली. फिर में तुरंत समझ गया कि अब मेरा काम बन सकता है क्योंकि वो भी अब धीरे धीरे मेरे साथ मज़े करने लगी थी और में अब उसके चूचियों को धीरे धीरे दबाने लगा था. वाह दोस्तों उफफफ्फ़ क्या मस्त चूचियों थे उसके? एकदम नरम रुई जैसे और फिर मैंने महसूस किया कि जब में उसके निप्पल को सहलाने लगा तो वो गरम होकर एकदम से बेकाबू हो गयी और वो मुझसे लिपटकर मेरी बाहों में आकर मुझे वो पागलों की तरह किस करने लगी. फिर वो लगातार मुझे चूमने लगी थी और उसकी तेज़ी से चलती गरम गरम सांसे मुझे मेरी गर्दन व् गालों पर महसूस होने लगी थी और वो उस समय बहुत जोश में थी. फिर में अब तुरंत समझ गया कि लोहा बहुत गरम हो चुका है बस इस पर मेरा हथोड़ा मारने की देरी ही है मन में यह बात सोचकर मैंने उसके कपड़े एक ही जोरदार झटके में उतार लिया. उसके बाद मेरी क्या हालत थी में किसी भी शब्दों में लिखकर नहीं बता सकता उसका वाह उफफफ्फ़ क्या मस्त आकार का गोरा फिगर था. वो एकदम सेक्स बॉम्ब लग रही थी. अब वो मेरे सामने सिर्फ़ पेंटी पहने हुए थी और उसने ब्रा नहीं पहनी हुई थी उसके गोरे भरे हुए बदन को बिना कपड़ो के देखकर मेरा लंड तो उस समय बेकाबू हो रहा था. अब मैंने तुरंत अपनी भी पेंट और टी-शर्ट को जल्दी से उतार दिया और में रूपा के पूरे कामुक गरम बदन को पागलों की तरह चूमने चाटने लगा, जिसकी वजह से वो भी अब तड़पने लगी थी. फिर कुछ देर चूमकर नीचे आते हुए मैंने उसकी पेंटी को भी उतार दिया और अब में अपनी फटी हुई चकित नजरों से उसकी वर्जिन बूर को देखने लगा, क्योंकि ऐसा मस्त सेक्सी नजारा में आज पहली बार देख रहा था और इसके पहले मैंने कभी भी सही में बूर नहीं देखी थी. मैंने जो भी अब तक देखा था वो बस ब्लू फिल्म में ही देखा था और फिर उसकी उभरी हुई बूर को देखकर मेरे अंदर एक अजीब सा जोश आ रहा था. मैंने देखा कि उसकी बूर में छोटे छोटे नरम झांट के बाल थे और वो बहुत सुंदर कामुक नजर आ रहे थे. फिर में उसकी बूर में अपनी उंगली को डालकर बूर के दाने को सहलाने लगा, जिसकी वजह से अब वो धीरे धीरे सिसकियाँ लेने लगी और मेरे ऐसा करने की वजह से कुछ ही देर में उसकी बूर अब बिल्कुल गीली हो गई थी और जब में अपनी उंगली को बूर के अंदर डालने की कोशिश करने लगा तो मैंने महसूस किया कि उसकी बूर बहुत टाइट थी. फिर मेरे कुछ देर तक बूर में उंगली डालने की वजह से वो और भी ज्यादा जोश में आकर तड़पने लगी.

अब मैंने 69 पोजीशन में आकर उससे मेरा लंड चूसने के लिए बोला और में उसकी वर्जिन बूर को चाटने चूसने लगा और मुझे ऐसा करने में बड़ा जोश और मज़ा आ रहा था और उसकी बूर अब बिल्कुल गीली हो गयी थी और मेरा लंड एकदम तनकर डंडे जैसा हो गया था. वो उसकी प्यासी वर्जिन बूर को सलामी देने लगा था. मुझसे अब और सहन नहीं हो रहा था तो मैंने उसी समय उठकर उसको बेड पर लेटा दिया और उसके दोनों पैरों को फैलाकर मैंने अपने लंड को उसकी बूर के मुहं पर रखकर एक हल्का सा धक्का दे दिया जिसकी वजह से मेरा लंड करीब एक इंच बूर के अंदर चला गया, लेकिन अब रूपा उस धक्के की वजह से दर्द से चीख उठी और वो कहने लगी आह्ह्ह में मर गई ऊईईईइ माँ मुझे बहुत दर्द हो रहा है ऊह्ह्ह्हह अब छोड़ दो मुझे, में मर जाउंगी और अब वो बहुत ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने के साथ साथ दर्द से छटपटाने लगी. फिर उसकी उस हालत को देखकर में तुरंत समझ गया कि उसकी बूर की सील मेरे उस धक्के की वजह से अब फट चुकी है इसलिए वो इतना उठपड़ रही है. फिर मैंने धक्के देना बंद करके में उसके एक निप्पल को अपने मुहं में लेकर चूसने लगा और कुछ देर बाद मैंने फिर से थोड़ा दबाव करके अपने लंड का सुपाड़ा उसकी बूर पर रख दिया.

अब मेरा लंड करीब चार इंच अंदर चला गया और वो एक बार फिर से चीखने लगी, लेकिन कुछ देर तक धीरे-धीरे धक्के देने के साथ साथ उसकी निप्पल चूसने चूचियों को सहलाने की वजह से वो अब दर्द कम होने पर मोन करने लगी थी और में भी सही मौका देखकर अपने लंड को आगे पीछे करने के साथ साथ अपनी स्पीड को पहले से ज्यादा तेज करने लगा था और तभी मैंने देखा कि वो भी अब अपनी दोनों आंखे बंद करके मेरे साथ अपनी पहली चुदाई का मज़ा लेने लगी थी और में लगातार जोरदार धक्के देता रहा. फिर करीब बीस मिनट तक अलग अलग तरह से रूपा को चोदने के बाद वो भी अब झड़कर बिल्कुल शांत हो गई और कुछ ही मिनट में मेरा भी वीर्य उसकी बूर के अंदर निकल गया और कुछ देर उसके ऊपर लेटे रहने के बाद मैंने उससे पूछा क्यों तुम्हे यह सब मज़ा मस्ती कैसी लगी? तो वो मुस्कुराकर बोली कि थोड़ा दर्द तो मुझे अब भी हो रहा है, लेकिन मुझे आज तक पता ही नहीं था कि चुदाई करवाने में इतना मज़ा भी आता है, इसलिए अब आज से मुझे अपनी चुदाई आपसे करवाने के लिए ऐसा हर दर्द कबूल है क्योंकि आज में एक कुंवारी लड़की से एक औरत बन गई हूँ और आज अपने मुझे वो सुख देकर मेरे ऊपर बहुत बड़ा अहसान किया है इसलिए मुझे अब आप जब भी जी चाहे कैसे भी चोद देना, मुझे आपके साथ यह सब करना बहुत अच्छा लगेगा और में कभी भी आपसे मना नहीं करूंगी.

फिर मैंने उससे बोला कि देखना तुम्हारा यह दर्द जल्दी ही ठीक हो जाएगा और तुम देखना अगली बार जब हम दोबारा चुदाई करेंगे तब तुम्हे बिल्कुल भी दर्द नहीं होगा और तुम्हे सिर्फ़ मज़ा आएगा और फिर दोस्तों जब में उसको अपनी गोद में उठाकर बाथरूम ले जाने के लिए मैंने उसको उठाया तो मैंने देखा कि बेड शीट उसकी बूर से निकले उस खून से भीग गई थी और उसको बाथरूम से वापस लाने के बाद मैंने उस गंदी बेड शीट को बदलकर उसकी जगह दूसरी को बिछा दिया ताकि उसकी माँ को किसी भी तरह का कोई शक ना हो जाए और मैंने उसको बाथरूम में ले जाकर उसकी बूर पर पानी डालकर अच्छी तरह से धो डाला और बूर के साफ हो जाने के बाद वो मेरे लिए रसोई में जाकर खाना बनाकर वापस हंसी ख़ुशी अपने घर पर चली गई और वो जाते समय मेरी तरफ मुस्कुराते हुए कहने लगी कि में कल फिर से आउंगी और वो मुझसे यह बात बोलकर चली गई और में उसकी पहली बार चुदाई से मन ही मन बहुत खुश होकर उसके बारे में सोचता हुआ ना जाने कब सो गया. दोस्तों उसके बाद भी मैंने रूपा को कई बार चोदकर उसकी इच्छा को पूरा किया और उसने हर बार मेरा पूरा-पूरा साथ दिया ..
तो दोस्तों मेरी ये कहानी कैसी लगी. जरूर बताएं, मुझे आशा है की आपको नॉनवेज स्टोरी पे ये कहानी अच्छी लगी होगी. मैं आपके लिए दूसरी कहानी जल्द ही लेके आने बाला हु,

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दोस्तों आज मैं पहली बार नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पर अपनी एक कहानी लेके आया हु. आशा करता हु की आपको बहूत अच्छा लगेगा. मेरा नामकमलेश है, उमर 24 साल, यह सूरत की एक कहानी है. मेरे घर में मेरी माँ सुनैना, 39 साल और बहन कशिश,18 साल और हमारा नोकर रंजय 24 साल, रहते हैं. मेरे बाप बाबुलाल ने माँ को तलाक़ दे दिया है और वो हम से अलग रहता है. कहते है की माँ और पिता जी का तलाक़ इस कारण हुआ की माँ पिता जी से
16 साल छोटी थी और पिता जी माँ को संतुष्ट नहीं कर पाते थे.

मेरी माँ सुनैना 5 फीट 5 इंच कद, गदराया बदन, गोरा रंग, भारी भारी चुचि, मस्त चूतड़ हैं जो की वो मटकती हुई चलती है. हमारा किरायेदार पटेल साहब भी माँ पर लाइन मारता है. लेकिन माँ उसको घास नहीं डालती. पटेल साहब की उमर कोई 45 साल की होगी लेकिन ना जाने क्यों माँ उसको पसंद नहीं करती.

मेरे दोस्त ऋषभ की बहन कविता मेरी बहन की पक्की सहेली है जो हमरे घर अक्सर आती रहती है. मैं क्योकि की जवानी की दहलीज पार कर चुका हूँ, मुझे चुदाई की नॉलेज अपने दोस्तों से मिल चुकी है. हम सेक्स की किताबें पढ़ चुके हैं. एक दिन मेरे दोस्त ऋषभ ने मुझे एक क़िताब दिया,” जवानी की नादानी” जिस किताब का हीरो अपनी सग़ी बहन को चोद लेता है. दोनो भाई बहन चुदाई की आग में जल रहे होते हैं और एक दूसरे से शारीरिक संबंध बना लेते हैं. क़िताब पढ़ते हुए मेरा लंड खड़ा हो गया और मेरा ध्यान अपनी बहन कविता की तरफ चला गया. कविता माँ का दूसरा रूप है, बस उसकी चूची और चूतड़ माँ से कुछ छोटे हैं, लेकिन हैं माँ की चूची से भी अधिक टाइट. क़िताब का हीरो कहानी में अपनी बहन को चोद रहा था और मैं अपना लंड मुठियाते हुए कशिश को नंगा कर के चोदने की कल्पना कर रहा था. उस दिन जब मेरा लंड छुटा तो इतना रस निकला जितना आज तक नहीं निकला था. मैने लंड सॉफ किया और किताब को छुपा कर अपनी अलमाँरी में रख दिया.

उस दिन मैं ऋषभ के साथ बैठा दोपहर को शराब पी रहा था, तो ऋषभ ने मुझे कहा,”कमलेश, ज़रा जल्दी कर लो आज मैं अपनी बड़ी दीदी के यहाँ जा कर उसको चोदने वाला हूँ और मुझे ठीक वक्त पर पहुँचना है, अगर तुम भी चूत का स्वाद चखना चाहते हो तो मेरे साथ चलो, मेरी दीदी की ननद भी चुदाई की शौकीन है, उसको तेरे हवाले कर दूंगा, तू तो जानता ही है के मेरे जीजाजी शुगर के मरीज़ हैं और दीदी को संतुष्ट नहीं कर पाते. जीजू के कहने पर ही दीदी की चुदाई करता हूँ.”

मैने उमड़ते हुए बादल देख कर कहा,” मेरे दोस्त, एसा निमंत्रण मैं ठुकरा तो नहीं सकता लेकिन मैं तेरे साथ फिर कभी चलूंगा, आज मुझे माँ की कमर दर्द की दवाई ले कर जाना है, तू चल, लेट हो रहा है, मैं भी चलता हूँ, बारिश कभी भी शुरू हो सकती है,” मेरे कहते ही बारिश शुरू हो गयी. ऋषभ ने स्कूटर स्टार्ट किया और चल दिया और मैं पैदल घर चल पड़ा. बारिश इतनी तेज़ हो गयी की मैं बिल्कुल भीग गया. ये कहानी आप नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पे पढ़ रहे है

मैने दवा ली, एक क्वॉर्टर लिया जो की मैं घर जा कर पीना चाहता था और घर चल पड़ा. बारिश ज़ोरों पर गिर रही थी. आसमाँन में घने काले बादल छा चुके थे. घर में चारों तरफ अंधेरा हो चुका था. मैं माँ के कमरे की तरफ बड़ा. मैं माँ को मेडिसिन देकर. अपनी सेक्सी किताब पढ़ कर शराब पी कर मूट मारना चाहता था. लेकिन जेसे ही माँ के रूम के पास पहुँचा तो माँ के करहाने की आवाज़ें आ रही थी, उईईए, मैं मरी, मेरी माँ , बहुत दर्द हो रहा है,” मैने सोचा की माँ की कमर दर्द हो रही है और मैं मेडिसिन लाने में लेट हो चुका था.

लेकिन जब मैने माँ के कमरे में झाँका तो माँमला कुछ और ही था. मेरी माँ सुनैना नंगी फर्श पर घुटनो और हाथों के बल झुकी हुई थी, रंजय पूरा नंगा माँ के चूतडों के पीछे खड़ा हो कर उसकी चूत में अपना लंड डाल रहा था. रंजय का लंड कुछ इतना बड़ा था की माँ उसको अपनी चूत में लेने में असमर्थ थी. रंजय माँ को कुतिया की तरह चोदने में लगा हुआ था, उसकी आँखें बंद थी, वरना वो मुझे ज़रूर देख लेता. मेरी माँ कामुकता देवी लग रही थी, उसकी बड़ी बड़ी चूची नीचे को लटक रही थी और उसके चूतड़ ऊपर की तरफ उठे हुए थे. उसका गोरा जिस्म बल्ब की रोशनी में चमक रहा था.

रंजय ने लंड एक बार बाहर निकाला, उस पर ढेर सारा थूक लगाया और फिर से डाल दिया माँ की चूत में. चिकनाई की वजह से इस बार लंड माँ की चूत में चला गया, ” सुनैना, मेरी रानी, अब तो ठीक है मेरी जान, आज कितने दीनो के बाद मौका मिला है तुझे चोदने का, माँ कसम तू बहुत टाइट हो. ओह्ह सुनैना, मेरी रानी तेरी चूत दिन ब दिन टाइट होती जा रही है, तू और भी जवान हो रही है, मुझसे ऐसे चुदवाना, मेरी सुनैना, तुझे चोद चोद कर मेरा लंड गधे के लंड समान हो गया है, हा बहुत मज़ा आ रहा है रानी.”

माँ भी कामुकता की आग में जल रही थी और उसने अपनी गांड रंजय के लंड पर माँरना शुरू कर दिया,” रंजय मेरे राजा, चोद ले अपनी रानी को, अपनी सुनैना को, मैं भी तेरे इस मस्ताने लंड की प्यासी हूँ, मादरचोद अगर तुम ना होता तो मैं तो लंड बिना तड़प कर ही मर जाती, मेरा पति तो कुछ करने के काबिल ही नहीं रहा, साला नामर्द. मेरा रंजय तेरे लंड पे वारी जाऊ, साले चोद मुझे कुत्ते ” रंजय दनादन माँ की गांड पर अपने लंड का परहार पीछे से करने लगा.

मेने हाथों में मेडिसिन पकड़ी हुई थी लेकिन मेरा ध्यान अंदर अपनी माँ की चुदाई में इतना खो चुका था की मुझे और कुछ याद नहीं रहा. रंजय माँ पर हमला कर रहा था और कह रहा था,” सुनैना, आज तुझे चोदते हुए 8 साल हो चुके हैं, लेकिन तू तो हर दिन और भी निखर रही हो मेरे लंड से चुदवा कर, साली अब किसी और जवान चूत का भी बंदोबस्त कर अपने सांड रंजय के लिए, अब तो तेरी बेटी कशिश भी तैयार हो चुकी है, कब चुद्वायगी उसको मेरे लंड से, मेरी सुनैना, साली दिन रात तुम माँ बेटी की खिदमत करूँगा, आ.आ..आई उफफफफ्फ़, बहनचोद तेरी टाइट चूत मेरे लंड को निचोड़ रही है, साली सुनैना मैं झर रहा हूँ, मेरा रस तेरी चूत में गिरने को है, ओह मादरचोद मैं झड़ा,” सुनैना ने जल्दी से अपनी गांड रंजय के लंड से दूर खींच ली. माँ की चूत का रस भी ज़मीन पर गिर रहा था. उसने रंजय का हाथ अपनी चूत पर रखा और वो बिना बोले माँ की चूत को रगड़ने लगा और माँ रंजय के लंड को चूसने लगी.

मैं समझ गया की माँ गर्भ धारण नहीं करना चाहती थी. इसी लिए उसने रंजय का लंड छुटने से पहले बाहर निकल दिया था. मैं चुपके से अपने रूम में गया और पेग बना कर पीने लगा. थोड़ी देर में रंजय अपनी क्वॉर्टर्स में चला गया और माँ बाहर अपनी दोस्त के घर चली गयी. मूठ मारने से पहले मैं देखना चाहता था की घर में कोई है तो नहीं. मैं जब अलमारी से सेक्स की किताब निकालने लगा तो हैरान रह गया की किताब वहाँ नहीं थी. मैं डर गया. किताब किसी के हाथ तो नहीं लगी. मैं सभी रूम की तलाशी लेने लगा. कशिश के रूम के पास जा कर मेरे कदम ठिठक गये. अंदर से आवाज़ें आ रही थी,” चूस कशिश साली मेरी चूत चूस, मेरी चूची भी , बहनचोद मेरी चूत शांत नहीं हो रही, मुझे शांत कर दे मेरी रानी,” आवाज़ यक़ीनन कविता की थी. मैने अंदर झाँका तो देखा की कशिश और कविता नंगी बिस्तर पर लेटी हुई थी और कशिश अपनी सहेली की चूत में ज़ुबान डाल कर चाट रही थी. कविता की जांगे मेरी बहन के चेहरे पर कसी हुई थी और कविता कशिश के सिर में हाथ फेर रही थी.

मेरा लंड कुतुबमीनार की तरह खड़ा हो गया और मेरे देखते ही देखते दोनो 69 पोज़िशन में चली गयी. मेरी सेक्स वाली किताब बिस्तर पर खुली पड़ी थी. इन लडकियों का क्या करना है? मैं फिर अपने कमरे में आई तो मेरा सेल फोन बज उठा. फोन ऋषभ का था.”विलास, यार यहाँ तो सारा प्रोग्राम चोपट हो गया, मेहमान आए हुए हैं. मैं लंड खड़ा कर के गया था दीदी को चोदने लेकिन लंड हाथ में ले कर वापिस आ गया हूँ,

अगर फ्री होतो आ जाओ, शराब पीते हैं दोनो दोस्त,” मैने अपनी आवाज़ दबाते हुए जवाब दिया,” साले अगर चुदाई ही करनी है तो मेरे घर चले आवो. तेरी बड़ी दीदी की चूत नहीं मिली तो ना सही, आज तुझे सील बंद चूत दिलवा देता हूँ, जल्दी से एक बोतल दारू लेते आना, साले अपनी कुँवारी बहन चुदवाने वाला हूँ तुझसे, हा बहनचौद कशिश को चौदेगा क्या. मैने ऋषभ को ये नहीं बताया की मैं भी उसकी बहन को चोदने वाला हूँ

मैने कशिश के रूम का डोर खोल दिया. मेरी बहन और कविता एक गहरे बंधन में केद थी. कविता की नज़र मुझ पर पड़ी तो कशिश की चूत से अपना मूह खींचते हुए बोली,”कमलेश भैया आप? हम तो बस यूही बस..” कशिश ने मुझे देखा तो पैरों पर गिर पड़ी,’ भैया, माँ को मत बताना, हम आप की किताब पढ़ कर बहक गयी थी, माफ़ कर दो भैया,” और अपने नंगे जिस्म को ढकने लगी. मैने हाथ बढ़ा कर अपनी बहन की मस्त चुचि को पकड़ लिया और दूसरे हाथ से कविता की जाँघ को सहला दिया,” सुनो मेरी बहना मेरी बात ध्यान से सुनो, तुम दोनो क्या कर रही हो मुझे इससे से कोई एतराज़ नहीं है. तुम दोनो ही जवान हो, तुम्हारे बदन जवानी की आग में जल रहे हैं और तुम्हारी चूत को सिर्फ़ जवान लंड ही ठंडी कर सकते हैं. तुमको लंड चाहिए और मुझे चूत. शोर मत करो मेरी बहनो, तुम दोनो की चूत के लिए मोटे तगड़े लंड मिल जाएँगे अगर तुम वो ही करो जो मैं कहता हूँ. बोलो मंज़ूर है?”

दोनो लड़कियाँ मुझे मुह फाड़ कर देखने लगी. मैने अपनी पेंट उतार दी और कविता को अपने कमरे में जाने को कहा. वो बिना बोले नंगी ही मेरे रूम में चली गयी. मैने कशिश को सारा प्लान बता दिया. तभी ऋषभ पहुँच गया. मैने दो ग्लास में शराब भर कर उसको दे दिया और कमरे में भेज दिया जहाँ मेरी बेहन चुदाई के लिए तड़प रही थी. ऋषभ दंग रह गया,” साले अपनी सग़ी बहन पेश कर रहा हूँ तुझे, चोद ले इसको जिस तरह तू चाहे और मैं चल के अपना माल चोदता हूँ, तुझे कोई एतराज़ तो नहीं?” मैने कशिश की गांड पर हाथ मारते हुए कहा.

ऋषभ जल्दी से कपड़े उतारने लगा. कविता बेसब्री से मेरा इंतज़ार कर रही थी. मैने एक ग्लास उसको पीला दिया और शराब की बूँदें उसकी चुचि पर डालने लगा. कविता तड़पने लगी .,” ., . क्या कर रहे हो, मेरी चूत में आग लगी हुई है, मेरा बदन जल रहा है, मेरे जलते बदन को शांत कर दोकमलेश भैया, मेरी चूत में अपना लंड पेल दो भैया, तुम तो मेरी आग और भड़का रहे हो मेरे भैया, चोद लो अपनी बेहन को हाईईईई मेरे भाई, यह कैसी जलन है मेरी चूत में जो मुझे सोने भी नहीं देती, आज मुझे अपना लो भैया, मेरी चूत पर अपने लंड की मोहर लगा दो मेरे भाई, एक बहन अपने भाई से लंड की भीख मांगती है, भैया चोदो मुझे,” मेरा हाथ कविता की चूत को रगड रहा था जिससे रस की धारा बहने लगी. साली लौंडिया पूरी तरह से गरम हो चुकी थी.

देर करना मुनासिब नहीं था. लेकिन मैं अपनी बहन की चूत को चाट कर उसकी चूत रस को चखना चाहता था. मैने उसकी टाँगें खोल कर अपना मुहँ उसकी चूत में धकेल दिया और अपना लंड उसके मूह में डाल दिया. नमकीन अमृत की धारा मेरे मुहँ में गिरी और कविता मेरे लोडे को लोलीपोप की तरह चूसने लगी. मैने उसकी गांड को पकड़ कर खींच लिया और मेरी ज़ुबान उसकी चूत की गहराई में चली गयी. हम दोनो हाँफ रहे थे। ये कहानी आप नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पे पढ़ रहे है

तब मैने उसको सीधा लिटा दिया, जांघों को फैला कर अपना लंड चूत पर रख दिया. कविता की चूत भट्टी की तरह गरम थी. मैने दक्का मारा और मेरा लंड दनदनादन हुआ उसकी कुँवारी चूत में चला गया,” आआआआआ, भैया, धीरे से पेलो, दर्द होता है, आराम से छोड़ो अपनी कुँवारी बहन को, अहह भैया, अब ठीक है, पेल दो पूरा लंड अब मेरी चूत में, हाँ भैया चोद डालो मुझे, आज मेरी सील तोड़ डाली है तुम ने भाई, चोद लो मुझे,” मैं धीरे से चुदाई कर रहा था और मेरा पूरा लंड कविता की चूत खा चुकी थी. मैने धक्के मारने शुरू कर दिए और चुचि को मुहं में ले कर चूसना शुरू कर दिया.

चुदाई पूरे ज़ोरों से चलने लगी,” ओह कविता, मेरी बहन आज मैं पहली चूत चोद रहा हूँ और वो भी अपनी बहन की, मेरी बहना चूत टाइट है तेरी चूत , तेरा भैया आज तुझे वो आनंद देगा जो तुम ने कभी ना देखा होगा, मेरा लंड धन्य हो गया तेरी चूत में जा कर, मेरी बहना, दूसरे कमरे में ऋषभ कशिश की चुदाई कर रहा है, आज भगवान आज दो दोस्त एक दूसरे से अपनी बहनो को चुदवा रहे है, आह्ह्ह्ह कविता मेरा रस निकल रहा है, मैं झड़ रहा हूँ। तेरी प्यारी चूत के अंदर मेरी बहन। उधर कविता की भी पहली बारी होने से वो भी जल्दी ही झड़ने लगी.

मेरे लंड का फव्वारा कविता की चूत में जा गिरा और हम दोनो झड़ गये. दूसरे रूम से ऋषभ और कशिश की चुदाई की आवाज़ सुन रही थी। जब वो भी फ्री हो गये तो हम उनको मिलने चले गये तो दोस्तो कैसी लगी मेरी आपको स्टोरी।

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कैसे मैंने अपनी मामी को चोदा अपने मोटे लौड़े से उनकी चूत फाड़ी

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हेल्लो दोस्तों, तो केसे है आप लोग आज मे आप लोगो को एक सेक्सी कहानी बताने जा रहा हू जो मेरे साथ पिछले हफ्ते ही हुई है… तो मैंने सोचा क्यों ना अपने नॉनवेज स्टोरी डॉट के के दोस्तों को भी बताऊँ, की कैसे मेरे अपने मामी की चुदाई की.

सब लोग चुदाई करते है. आजकल का ज़माना ही ऐसा है की बिना चूत के या बिना लंड के कोई नहीं रह सकता, अगर आपने अभी तक किसी को चोदा नहीं है या चुदवाया नहीं है तो बेकार है यार. आजकल तो चूत और लंड के बिना कोई लाइफ है. इसलिए मैं तो कहता हु, चोदो और चुद्वाओ.

मैं ग्यारहवी क्लास का स्टूडेंट हू लेकिन मेरी कोई गर्ल फ्रेंड नही है ऐसा नही है की मे स्मार्ट नही हू लेकिन मे फेस बुक या सोशल मीडिया ज़्यादा यूज़ करता इसलिए मेरी कोई गफ़ नही है पर दोस्तों जब से मैंने रिलायंस का जिओ लिया हु तब से मैंने भी कई सारे हॉट लड़कियों के फ्रेंड रिक्वेस्ट आये है और मैंने भी भेजे है.

ऊप्स सॉरी मेने आपको ज़्यादा बोर कर हो माफ़ी चाहता हु. पर ये पक्का है आज जो मैं आपको कहानी सुनाने जा रहा हु उससे आपका लंड जरूर खड़ा हो जायेगा. चलो दोस्तों अब मैं शुरुआत करता हु.

जब मे 8त क्लास मे था तब मेरे छोटे वाले मामा ने शादी की थी मोनिका मामी से (बहूत ही हॉट है. मैंने इनका नाम यहाँ पर चेंज कर दिया है. क्यों की मैं उनसे बहूत प्यार करता हु. उम्र में बड़ी है तो क्या हुआ)

मेरी मामी बहूत ज़्यादा हॉट आंड सेक्सी है उनकी आगे करीब 22 की होगी और उनका फिगर एकदम मस्त वो बिल्कुल भी मोटी नही थी बल्कि एकदम स्लिम क्या बातौ उनका फिगर एकदम झालिया झट्ट (नामे चेंज्ड क्यूकी क्या पता स्टोरी ब्लॉक भी हो सकती है ना इसलिए)….

मे जबसे 9त मे था तबसे मेरे अंदर मोनिका मामी के लए फीलिंग्स बढ़ गयी थी मे बस उन्ही के बारे मे सोचता करता था और उनके फोटो को देख के ही मुट्त् मारता था…

धीरे धीरे मेरी फीलिंग्स बढ़ती गयी लेकिन फिर मामी प्रेग्नेंट हो गयी और उन्होने एक बच्चे को जनम दिया..
उसके बाद से मामी और भी ज़्यादा हॉट और गोरी हो गयी…

तो मेजर टर्निंग पॉइंट तब आया जब मे 11th मे था और मेरी गर्मिो की छुट्टी पड़ी..

मेने सोचा मे एक हफ्ते के लए अपने मामा के घर पे जाो दिल्ली और मेने अपना सामान पॅक करलिया और वाहा चला गया…
वहा पे मेरे दो मामा और दो मामिया थी…

एक तो मोनिका मामी और एक अंजू मामी लेकिन सबसे ज़्यादा हॉट तो मोनिका मामी ही थी..

जब मे वहा पहुचा तो सब काफ़ी खुश हुए क्यूकी मे बचपन से ही सबका लाड़ला था… उस घर मे मेरे मामा मामी ही रहते थे.
मे मोनिका मामी के लए एक सुंदर सा पर्स लेके गया था जो की मेने उन्हे दिया था उसी दिन जब वो किचन मे थी..

वो पर्स देख के इतना खुश हुई की उन्होने मेरे गालो पे किस किया… मे सच बता नहीं सकता उस वक्त की फीलिंग बस फिर क्या मेने प्लान बना लिया की अब मुझे मामी के साथ करके ही रहना है..

अगले दिन सुबह दोनो मामा ऑफीस चले गये तो वो मुझे भी ले गये क्यूकी रास्ते मे से बड़ी मामी के लए दवाई लेनी थी तो मेने सोचा क्यू ना मे नींद की दावा भी लेलू और मेने ऐसा ही किया…

फिर मे घर तक पैदल आया और मेने नींद की गोली पॉकेट मे रखली…
मेने प्लान बनाया की मे दोनो मामी को कुछ ना कुछ करके ये नींद की दावा दे दूँगा ताकि कोई प्राब्लम ना हो..

मेने दोपहर के खाने मे चुपके से ये सब डाल दिया और मामी से पेट दर्द का बहाना मारके कह दिया की मे थोड़ी देर बाद खा लूँगा…

खाना खाने के बाद दोनो मामी को नींद आने लगी…
अब दोपहर का टाइम तो था ही इसलिए वो दोनो सोने चले गये बिना कुछ शक किए…
मेने करीब 10मीं तक टीवी देखा और फिर जाके चेक किया की दोनो मामिया सो तो गयी हैईना…

दोस्तों अब आपको क्या बताऊँ दोनों सो गई क्यों की नींद की गोली काम कर गई थी.

फिर मेने बड़ी मामी के कमरे का दरबाजा बंद किया और मोनिका मामी के रूम मे गया…
वाह क्या लग रही थी मामी सोते हुए भी ..मामी ने ब्लू कलर का सूट पहना था और क्या लग रही थी मे उनके बेड पे गया और उन्हे किस करना स्टार्ट दर दिया….उम्म उनके गुलाबी रसीले होठ बस मान कर रहा था चूमते ही जाो चूमते ही जाऊं

मे करीब 10 मीं तक उनके गुलटबी चूस्ता रहा फिर मेने मामी का सूट उतारा उन्होने अंदर ब्लॅक कलर का ब्रा पहना हुआ था मेने ब्रा का हुक पीछे से खोला और वाह क्या बूब्स थे उनके एकदम गोरे और सेक्सी …

फिर मेने उनके बूब्स दबाना और चूसना शुरू किया उनके बूब्स तो बस कटाल थे कटाल… उनके पिंक निपल्स को चूसने का मज़ा ही कुछ और था… फिर मेरे अंदर बहूत जोश आ गया और आए भी क्यू ना इतनी सेक्सी मामी हो सकती है भला…

मेने मामी का सलवार(लेगिंग) उतारी और उनकी ब्लॅक पनटी भी उनकी चूत पे कोई बाल नही था..उनकी चूत के दर्शन होते ही तो मे बावरा हो गया मेने अपना होश खो दिया और अपने सारे कपड़े उतार के फेंक दिए…मेरा लॅंड जो की अब सातवे आसमान मे था मामी की कोमल और प्यारी चूत मे घुसाया और बड़ी आसानी से वो अंदर घुस गया…

वो कोमल एहसास मे कभी नही भूल सकता मेने फिर ज़ोर ज़ोर से अंदर बाहर अंदर बहार करना शुरू कर दिया.. उनकी चूत और उनकी चूचियां और होठ तीनो एक साथ यूज़ करना शुरू किया और मैं कुछ ज्यादा ही सेक्सी और गरम हो गया और क्या बताऊँ दोस्तों मैं थोड़े देर में ही झड़ गया.

और मेरी तो सारी ताक़ात ही ख़तम सी हो गयी.. मे यू ही नंगा मामी के उपर लेट गया.
फिर आधे घंटे बाद मेने फटाफट से कपड़े पहने और मामी को भी पहनाई ताकि किसी को कोई शक ना हो और मामी को भी कपड़े पहनाए..

फिर मेने बड़ी मामी का दरबाजा भी खोल दिया और टीवी देखने लगा..

इस तरह से से मैं मुह मार लिया था पहला दिन. अब एक दिन की बात है. मां जी ऑफिस के काम से कही बाहर गए थे. और मैं और मोनिका मामी ही घर पर थी क्यों की दूसरी मामी भी अपने मायके मामा जी के साथ चली गई थी.

मैंने दूसरे दिन रात को उनके लिए पेप्सी लाया और फिर उसमे नींद की दबाई मिला के दे दिया. पर मामी वो ग्लास लेके किचन में चली गई मैं कह रहा था मामी जी आप ये मेरे साथ ही पि लो क्यों की मैंने अपने ग्लास में नहीं डाला था दबाई और उनके ग्लास में डाल दिया था. पर वो बोली की सब्जी गैस पर चढ़ी है जल जाएगी. और फिर वो करीब पांच मिनट बाद आये और खाली ग्लास रख दिया.

थोड़े देर बाद वो सोफे पर ही सो गई, मुझे लगा की अब वो गहरी नींद में चली गई तो मैंने चारो तरफ के दरबाजे और खिड़की बंद कर दी. और एक एक कर के कपडे उतार दिए. उसके बाद दोस्तों मैं तुरंत ही उनकी चूचियां दबाना शुरू कर दिया और उनकी चूत को जीभ से चाटने लगा. और फिर मैंने अपना लंड उनके चूत के ऊपर रखा और जोर से उनके चूत में पेल दिया. और फिर दोनों हाथों से उनकी चूचियां मसलने लगा. और जोर जोर से लंड को अंदर बाहर करने लगा. उसके बाद उनके होठ को चूसने लगा. तभी मामी मुझे जोर से पकड़ ली और अपना पैर मेरे चारो तरफ लपेट ली. मैंने बिच में फंस गया. अब वो आँख खोली और बोली, कमीने, मामी को नींद को गोली खिला कर चुदाई.

आज मैंने तुम्हारी कोल्ड ड्रिंक पि ही नहीं मैंने बाहर फेंक दिया. मैंने तो कल ही समझ गई थी की जरूर तुमने ही मुझे चोदा था, क्यों की मुझे पता है आपके मामा जी का लंड छोटा है. पर कल मेरी चूत फटी हुई थी. मैंने समझ गई की तुमने ही मुझे चोदा था. दोस्तों मैं काफी डर गया की अब ये बात मेरे मामा जी तक पहुच जाएगी. तो मैंने कहा सॉरी मामी जी. तो मामी बोली सॉरी क्या अब तू मुझे चोद, गांड भी मार, मैं खुश हो गया, और दोनों हँसने लगे.

फिर क्या था दोस्त अब तो मामी मेरी मामी नहीं बल्कि मेरी बीवी की तरह हो गई है. मैं रोज रोज चोदता हु. और वो मेरे से चुदवाती है. तो नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम के दोस्तों कैसी लगी ये कहानी. अरे हां आप देख ले ये कहानी आप नॉनवेजस्टोरी डॉटकॉम पे ही पढ़ रहे है ना. की किसी और साइट पर, अगर किसी और साइट पर है तो फिर याद रखे आप सीधे नॉनवेज पे ही आएं. ताकि फ्रेश और नया चुदाई की कहानी पढ़ पाएं.

 

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पति के लंड से कुछ भी नहीं होता था तभी मैं किरायेदार से चुदवाई

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मैं शेफाली दिल्ली में रहती हु, मैं नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पे ये कहानी लिख रही हु, आशा करती हु की आपको मेरी ये कहानी पसंद आएगी, मैं ३२ साल की हु, मैं अपने पति से वेहद प्यार करती हु पर कभी कभी वासना का नशा इतना हो जाता है की वेवफा बन जाना पड़ता है, मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ, ना चाहते हुए भी मैं अपने किरायेदार से चुद गयी, कहानी बड़ी ही रोमेंटिक है, क्यों की मेरे मन में वो पति का शरारत ने मुझे चुदने के उस्काया और अपना सब कुछ न्योछाभार कर दी २0 साल के अपने किरायेदार को. मैं आपको पूरी कहानी सुनाती हु,

मैं नॉनवेज स्टोरी डॉट की रेगुलर पाठक हु, मैं रात को सोने के पहले जरूर पढ़ती हु क्यों की अक्सर यहाँ पे मदहोश कर देने बाली कहानियां होती है, चाहे आप शादी शुदा हो या कुंवारा हर तरह की मजेदार कहानी यहाँ मिलती है, मैं दूसरे की कहानी पढ़ते पढ़ते आज अपनी भी खूबसूरत लम्हा आपके सामने पेश कर रही हु, आशा करती हु की आपको अच्छा लगेगा.

मेरे पति का टूरिंग जॉब है वो अक्सर कंपनी के काम से दिल्ली से बाहर रहते है पर इस बार तो हद हो गयी है वो 35 दिनों से बाहर है, कौन है जो बिना सेक्स के रह सकता है पर औरत में संयम होता है इस वजह से ज्यादा वो खुल नहीं पाती है ये आप भी जानते है, भले आपको वाइफ या गर्ल फ्रेंड आपसे चुदना चाहती हो पर वो हमेशा आपको नहीं बताएगी वो तो आपको नटखट अदाओ के लिए इंतज़ार करते रहती है,

एक दिन की बात है रात के करीब 10 बज रहे थे मेरे पति देव का फ़ोन आया आज वो बड़े ही रोमेंटिक मूड में लग रहे था, उहोने लैपटॉप के स्काइप पे आने को कहा वीडियो चैटिंग के लिए, मैंने फटा फट लैपटॉप ओन की और आ गयी, मेने पर्पल कलर की नाइटी पहनी हुई थी जो की स्लीवलेस और जाँघो तक की लंबाई ओर सामने से नेट कट है जो मेरे हज़्बेंड को पागल बना रही थी ओर इसलिए वो बार बार बोल र्हे थे की कुछ तो दिखा तो मेरी रानी. पर मेने उनकी इच्छा को मना कर दी और लॅपटॉप लेकेर बिस्तर पर उल्टा लेट गई. लॅपटॉप मेरे सामने था ओर में उल्टा लेट क्र अपने हज़्बेंड से बात करने लगी. मुझे पता था की इससे मेरे क्लीवेज ओर अच्छे से दिखने लगेंगे क्योकि मेरे बूब्स मेरे बेड से दब कर ओर बड़े दिखने लगे है ओर नाइटी से काफ़ी बाहर आने लगे. ये देख क्र मेरे हज़्बेंड पागल से हो गये ओर मुझसे बोहोट रिक्वेस्ट करने लगे की कुछ तो दिखा दो बहुत दिन हो गया है तुम्हारे जिस्म को देखे हुए.

मेने उनसे हस्ते हुए कहा की मेरे पति हो आप, इतनी इच्छा तो पूरी करनी हे पड़ेगी. फिर मेने अपने पूरे बाल साइड में कर दिए ओर लेफ्ट साइड की नाइटी की स्ट्रॅप को तोड़ा सा नीचे कर दिया. अब मेरी स्ट्रॅप शोल्डर के साइड मे लटक र्ही है ओर मेरी पर्पल ब्रा मेरे गोरे जिस्म पर मेरे पति को मदहोश कर रही थी है. सच बताऊ तो मेरी हालत भी खराब हो रही थी ओर मन कर रहा था की मैं अपने पति के लिए पूरी नंगी हो जाऊँ वेब केम पे. पर मुझे शरम भी बहुत आर रही थी और मेरे पति बोल रहे थे “ क्या बात है पूनम, मुझे घर आने दो … में तुम्हे नंगा करके कच्चा खा जाऊंगा. में थोड़ी ओर शरमाई ओर फिर उन्होने कहा की अपनी ब्रा की स्ट्रॅप भे नीचे कर दो.

उनकी बात मानते हुए मेने अपनी ब्रा की स्ट्रॅप नीचे कर दी ओर अब मेरे क्लीवेज ऑलमोस्ट मेरे एक बूब्स को 70% दिख रहे थे . मेरी ब्रा सिर्फ़ मेरे निपल को कवर की हुए थी ओर उसके ऊपर का सूब कुछ मेरे पति को दिखा रही थी . मन में आया की तू कितनी बेशरम हो गई है शेफालीपर तभी मेरे पति ने कहा “पूनम.. मुझे घर आने दे , में तेरे दूध को अपने होठो से चाटूंगा, दबाऊंगा और काटूंगा ”. ये सुनकर में पागल सी होने लगी.

फिर उन्होने कहा की अपनी नाइटी उतार दो, मेने उनकी आज्ञा का पालन की ओर अपने नाइटी उतार दी ओर फिरसे उल्टा लेट गई. रात को में ब्रा का हुक ओपन करके हे सोती हू तो लेटने से मेरी ब्रा एकदम से गिर गई ओर मेरे दोनो अनमोल रतन जो दूध से भे ज़ादा गोरे ओर सोने से भे ज़ादा चमकीले है उन्हे वो सॉफ सॉफ दिखने लगे. आप ये कहानी नॉन वेज स्टोरी पे पढ़ रहे है

उन्होने अपना कंट्रोल खो दिया ओर जल्दी से हे वो भे नंगे हो गये. उनका वो एकदम टाइट था जेसे की लोहे की रोड हो . उसमे जान थी ओर वो एकदम मजबूत सरिया लग रहा था. उसको देख कर तो में पागल हो गई ओर अपनी जीभ निकाल कर में अपने होठो पे लगाने लगी. मेने अपनी टंग नीचे बाले होठ पे टच किया ओर लेफ्ट राइट करने लगी, मेरे पति जोश में आ गए और लंड को अपने हाथ में ले लिया, और लंड पे थूक लगा के जोर जोर से ऊपर निचे करने लगे, मैंने भी उनके लिए हेल्प की और मैं अपना चूत आगे कर दी कैमरे पे वो पागल हो गए और एक लम्बी सांस ली और आआह आआअह आआअह आआह आआह कर के अपना सारा माल निचे ही गिरा दिया और आई लव यू बोल के बोले ठीक है शेफालीतुम सो जाओ, गुड नाईट. आप ये कहानी नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पे पढ़ रहे है. फिर उन्होने मुझे गुड नाइट बोला ओर सोने चले गये.

मैं विस्तार पे पड़ी तड़पती रही ओर कुछ देर तक अपने बूब्स अपने आप ही सहलाती रही ओर कुछ देर बाद सो गई. सुुबह आँख खुली तो मन ही मन रात की बातों को याद कर रही थी बेडसे उठा नहीं जा रहा था मेरी जिस्म की प्यास अधूरी ही रह गयी थी . मेरी ये प्यास मुझे पागल कर रही थी मेरे जिस्म में आग सी लग चुकी थी . मेरा जिस्म गरम हो गया था ओर इसको किसी के प्यार की ज़रूरत थी ठंडे होने के लिए रात का किस्सा सोच कर मुझे प्यार भी आ रहा था और गुस्सा भी . प्यार ये सोच की कैसे हम दोनों ने अपने अपने को कैमरा पे देखे और दिखया और गुस्सा इस बात का की वो तो अपना काम बना लिए और मैं मेरे अंदर का पानी तो अंदर ही रह गया,

तभी मेरे दरवाजे का कुण्डी बजा मैं दरवाजे के छेद से देखि मेरा किरायेदार जो की २० साल का नौजबान है एक जिम में ट्रेनी है वो हाथ में बाल्टी लिए और बनियान पहने खड़ा था, मैं बस गाउन को शरीर पे डाल के दरवाजा खोली, मुझे उसकी मस्सल्स को देख कर रहा नहीं गया, जैसे वो अंदर आया मेरे अंदर वासना जाग उठा, और मैं पागल हो गयी मैंने उसको पकड़ लिया और होठ चूसने लगी, वो कह रहा था भाभी क्या कर रहे हो, मैंने कहा चुप हो जा नहीं तो मैं सोर मचा दूंगी को तुमने मेरा इज्जत लूटा, वो डर गया, मैं उससे बेड रूम में ले गयी और कपडे उतार दिए, उसकी मजबूत बाँहों में समा जाना चाहती थी, हुआ भी ऐसा ही वो ५ मिनट में ही बहशी हो गया और वो भी मेरे शरीर को नोचने और चाटने लगा, मुझे ये सब बहुत अच्छा लग रहा था .

मैंने उसके लंड को मुह में ले ली और चूसने लगी, वो आअह आआह आआह कर रहा था, फिर मैं लेट गयी और बोली आज मुझे खुश कर दे, वो अपना लंड निकाल के मेरे चूत के मुह पे लगाया और जोर जोर से धक्के देने लगा, उसका लंड मेरे पति के लंड से ज्यादा बड़ा और मोटा था, वो बस जोर जोर से चोदे जा रहा था और मैं चुदवाये जा रही थी, मैंने हरेक पोज़ में उससे चुदवाई, जब मेरी भूख शांत हो गयी तब मैंने उससे कहा अब तुम अपना सारा माल मेरे मुह में डाल दो, उसने ऐसा ही किया, मैं उसके लंड को और वीर्य को चाट रही थी, फिर दोनों एक दूसरे को पकड़ के लेटे रहे, फिर वो बोला भाभी मुझे कॉलेज जाना है, और वो चला गया, ये वाकया कल ही हुआ है, अब समझ में नहीं आ रहा है की मैं क्या करूँ उससे सेक्स सम्बन्ध फिर से बनाऊ या नहीं, पर मैं तब बिना चुदे नहीं रह सकती इसलिए सोच रही हु की किसी और को ये मौका दू, अगर आप दिल्ली के आस पास रहते है तो मुझे निचे कमेंट करे, मैं आपको भी वही मजा दूंगी, अगर आप दूर रहते है तो मैं वेब केम पे भी आ सकती हु, पर धयान रहे ये सिर्फ मेरे और आपके बीच ही रहेगा, आपकी प्यासी शेफाली

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मेरी नौकरानी अगर खूबसूरत नही होती तो मैं उसको नही लेता

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मैं आशुतोष यादव आप सभी सेक्सी कहानी पसंद करने वाले दोस्तों को नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पर अपनी सेक्सी कहानी सुना रहा हूँ. मैं एक बेहद ही शरीफ लड़का हूँ. मैं गोरखपुर का रहने वाला हूँ. पर मैं इतना शरीफ और नेक आदमी पहले नही था. अपनी जवानी की उम्र में मैं एक बेहद बिगड़ैल लड़का हुआ करता था. सीटियाबाजी और छिन्दरई में मैं नंबर एक था. कमीना बनने की सुरुवात मैंने अपने घर से की थी. जब एक दिन मेरी बहन सो रही थी की मैंने उसको जबरन पकड़ लिया था. उसके मुँह में मैंने रुमाल बाँध दिया था. मैंने उसको चोद दिया था. दूसरी बार अपनी जवान बहन को चोदने जा रही रहा था की घर के लोग आ गए थे और मुझे घर से भागना पड़ा था. पुरे १ महीना बाद मैं घर से लौट के आया था. क्यूंकि मेरे पापा ने कह दिया था की मैं जैसे ही लौट के आयुं, तुरंत पुलिस को फोन कर दिया जाए.

मैंने बहुत बुरा कांड कर दिया था. मेरी मम्मी और मेरे घर के सब लोगों ने मुझसे बोलना बंद कर दिया था. मैं अपने किये पर शर्मिंदा था. जो बहन मुझे राखी बांधती थी, मैंने उसको ही चोद दिया था. उसके मम्मे भी मैंने पी लिए थे. बाद में मेरी माँ ने पापा से बहुत गुजारिश की, तब उन्होंने मुझे माफ किया. वरना वो तो मुझे जेल में भिजवाना चाहते थे. मेरी २ बहने और थी, कुल ३ बहने थी. मैंने सबसे बड़ी को पेला था. इस वजह से अब मेरी २ छोटी बहने मुझसे डरने लगी थी. वो अब रात में कभी भी मेरे पास नही आती थी. वो मुझसे डरती थी. कुछ दिन तक मैंने अच्छा बर्ताव किया. फिर मेरे बड़े भाई की शादी हो गयी. घर में एक बड़ी सुन्दर भाभी आई. उनका नाम एकता था. बाप रे !! क्या गजब का सामान थी वो.

जब एकता भाभी की शादी के कुछ दिन हो गए तो उनको मेरे बारे में पता चला. वो मुझसे दोस्तों की तरह बात करने लगी. मेरे लिए चाय काफी लाने लगी. मेरी पसंद की चीज लाने लगी. मुझे हैरत हुई ये सब देखकर. फिर धीरे धीरे मुझे पता चला की वो मुझे पसंद करती है. एक दिन जब घर पर कोई नही था तो वो मेरे पास आई. उन्होंने रात में पहनी जाने वाली मैक्सी दिन में पहन रखी थी. मैक्सी में वो गजब का सामान लग रही थी.

आशुतोष !! एक बात कहूँ. किसी से कहोगे तो नही?? एकता भाभी बोली

बताओ भाभी!! क्या बात है? मैंने कहा

आशुतोष तुम्हारे भैया नपुंसक है. मुझे ले ही नही पाते है. मुझको चोदने से पहले ही वो झड जाते है. मुझको १ घंटे क्या चोदेंगे, २ मिनट में आउट हो जाते है. अगर ऐसे ही चलता रहा तो मुझे कोई बच्चा पैदा ना होगा. समाज में तुम्हरे भैया की कितनी बदनामी होगी. इसलिए अब तुम ही मुझे बच्चा दे सकते हो’ भाभी रोते रोते बोली. मैं उनकी बातों में आ गया. वो मुझे अपने कमरे में ले आई. भाभी ने अपनी मैक्सी जब उतारी तो मुझे बड़ी मौज आ गयी. इतनी मस्त माल मैंने आज तक नही चोदी थी. बड़े बड़े चुच्चे थे उनके. मुझे लग रहा था की वो खुद चुदने के मूड में थी. क्यूंकि वो बहुत जादा सपोर्ट कर रही थी. खुद उन्होंने अपने कपड़े निकाले. ब्रा और पैंटी भी निकाल दी.

मुझे कुछ करने का मौका ही नही दिया. मेरे सामने नंगी होकर लेट गयी. मेरा मुँह उन्होंने अपने चुच्चे में दे दिया. मैं गटागट पीने लगा. ओह्ह क्या गदराये खूबसूरत मम्मे थे एकता भाभी के. मैंने खूब पिए. उनके मम्मे मैंने चोदे भी. फिर उनकी चूत पर आ गया. एकता भाभी की खूब बड़ी से फूली हुई चूत थी. मैंने उनकी चूत पी. फिर उनको लेने लगा. कुछ देर बाद भाभी की कमर किसी पुर्जे की तरह मटक रही थी. किसी स्प्रिंग की तरह उपर आती, फिर नीचे जाती. लगा जैसे कोई मशीन हो. जब मैं एकता भाभी को चोदने लगा तो वो मचलने लगी. मैं जोर जोर से हौककर उनको चोदने लगा. उनके चुच्चे जोर जोर से किसी बड़ी गेंद की तरह मचलने और हिलने लगी. भाभी ने अपने हाथों से अपने दूध को पकड़ लिया. मैं उनको मस्ती से चोदने लगा. भाभी सीधा मेरी आँखों में देख रही थी, वो मुझसे पूरी तरह से फंस चुकी थी.

मैंने भी उनकी आँखों में देखते हुए उनको चोद रहा था. बहुत मजा आया दोस्तों उस दिन. मुझे लगा की जैसे मुझे जन्नत मिल गयी हो. फिर उसके बाद जब हमारे घर पर कोई नही होता, हम देवर भाभी ऐयाशी करते. ऐसे कोई १ साल तक चला. एकता भाभी मुझसे चुदवाती रही. मैं उनको चोदता रहा. जब हम दोनों मौका पाये रंगरलिया मनाते. एक सी एक दिन मैं भाभी के कमरे में उनको पेल खा रहा था, उनकी चिकनी मलाई जैसी योनी में मैं अपना मोटा सा लौड़ा डाल कर चोद रहा था की अचानक ने मेरा परिवार बाहर से आ गया. मेरे पापा, मम्मी, बड़े भैया सब आ धमके. पापा से घंटी भी बजाई, पर शायद मैं सुन नही पाया. गमले के नीचे रखी चाभियों से मेरे पापा ने दरवाजे का लोक खोल लिया. सारा परिवार अंडर चला आया. मैं भाभी की दोनों सफ़ेद गोरी गोरी टाँगे उठाकर अपने कंधे पर रखी थी. उनको गचागच पेल रहा था. की इतने में बड़े भैया और पापा मेरे कमरे में ऐसे ही चलते चलते आ गयी.

आशुतोष!! ये सब क्या क्या?? मेरे पापा ने मेरे कमरे का दरवाजा खोल और जोर से चिल्लाये.

दोस्तों, मेरी तो गाड़ ही फट गयी. मैंने तुरंत उछल के किराने हट गयी. भाभी नंगी थी, मेरे पापा से उनको भी नंगे नंगे देख लिया. भैया का तो खून ही खौल गया. एकता भाभी ने तुरंत एक पास पड़ी चादर खींच ली और अपने मस्त चुदासे और लौडे के प्यासे बदन को ढक लिया. मेरे पापा का भी खून खौल गया. पापा और बड़े भैया लाठी लेकर आये और हम देवर भाभी को खूब मारा. बड़े भैया को इतने जादा गुस्सा हुए की अगले दिन भाभी को उनके मायके भेज दिया. पर मैं कहा भाग जाता. मैं कोई लड़की नही था जो अपने मायके भाग जाता.

आशुतोष!! तेरे पापा तेरे गंदे कारनामो के कारण तुझको सारी प्रोपर्टी से बेधकल कर रहें है. तूने पहले अपनी बहन को सोते में चोदा, फिर अपनी सगी भाभी को चोदा. बेटा!! तू इंसान है या राक्षस?? मैं भी तुझसे सारे रिश्ते खत्म कर रही हूँ. मेरी माँ बोली और रोने लगी. कुछ दिन बाद ये बवंडर किसी तरह शांत हुआ. मेरे घर में एक नई नौकरानी आ गयी. उनका नाम कविता था. बहुत प्यारी सामान थी वो. जब सब कुछ फिर से सही हो गया तो फिर से मेरा लैंड खड़ा होने लगा. बिल्कुल दुबली दुबली पलती पतली लड़की थी. अभी तक मैंने अपनी सगी बहन को चोदा था, अपनी भाभी को लिया था, पर नौकरानी कविता उन सबसे अलग थी. बड़ी मस्त माल थी वो. वो अभी १९ साल की माल थी.

उसे देखते हे मेरा लौड़ा खड़ा हो जाता था. मन होता था की इसे बस एक बार गोद में उठा लूँ और प्यार से चोदू. जहाँ मेरी बहन और भाभी भरे हुए बदन वाली थी, वहीँ, कविता इकहरे बदन वाली थी. उसकी आँखें बड़ी सेक्सी और नशीली थी. उसकी बहुत अदाएं भी थी. उसके स्तन बड़े सधे हुए थे. ना बहुत छोटे और ना बहुत बड़े. नौकरानी कविता चोदने खाने और पेलने के लिए बिल्कुल एक परफेक्ट माल थी. उसको देखते ही मेरा लौड़ा खड़ा हो जाता था. कविता नेपाल की रहने वाली थी. वो सुबह सुबह पुरे घर में पोछा लगाती थी. मेरे कमरे में भी वो पोछा लगाने आती थी. वो फर्स पर बैठ जाती थी और झुक झुक कर पुरे कमरे में पोछा लगाती थी. उनके मस्त मस्त मम्मे उसके सूट के खुले हुए गले से दिखते थे. मेरा लंड खड़ा हो जाता था. मैंने सोच किया की मैं उनको पटाऊंगा. एक दिन जब कविता मेरे कमरे में आई तो मैंने उसका हाथ पकड़ लिया.

आशुतोष बाबा !! ये क्या? आप ये क्या कह रहें हो?? कविता ने सहमते हुए पूछा.

कविता ! क्या तू जानती है की तू इकदम कश्मीर की कली दिखती है. ये ले कुछ पैसे अपने लिए अच्छा सा सूट खरीद लेना मैंने २००० का नोट उसे दे दिया. कविता को पैसों की जरुरत भी थी. इसलिए उसने पैसे ले लिए. मैं इसी तरह उसे मदद कर देता. सोचा की जब उसे चोदूंगा तो सारे पैसे वसूल हो जाएँगे. एक दिन मुझे बढ़िया मौका मिल गया. मैं और नौकरानी कविता अकेली थी. वो किचेन में खाना बना रही थी. मैं उसके पास और मीठी मीठी बातें करने लगा. वो भी मुझसे बड़े प्यार से बातें करने लगी. मैंने उसका हाथ पकड़ लिया. कविता भी अभी बिल्कुल जवान थी.

ये क्या साहब?? वो बोली मेरे हाथ पकड़ने पर.

कविता! क्या तू किसी से प्यार नही करती? क्या तेरा कोई यार है?? मैंने उसे मस्का मारा.

नही साहब, कोई मिला ही नही! वो बोली

तो फिर मुझको अपना यार बना ले! मैंने उससे कहा

वो लजा गयी. मैं जान गया की काम बन गया है. कविता आटा घूथ रही थी. उसके दोनों हाथ में आटा लगा हुआ था. मैंने उसकी कमर में पीछे से हाथ डाल दिया. वो मचल गयी. मैंने उसके गालों पर पप्पी ले ली. वो बचाव करने लगी, आटा से सने हाथ से मुझे रोकने लगे. मेरे भी हाथो और गालों पर आटा लग गया. वो हँसने लगी. मैं जान गया की लड़की पट गयी है. मैं कुछ नही देखा और उसके गोरे गोरे चिकने चिकने गालों पर धडाधड चुम्मा लेने लगा. फिर मैंने कविता के मम्मे पर हाथ रख दिए. उसको मजा आया. मैं उसके दूध दाबने लगा. फिर चुम्मा और फिर नौकरानी कविता के मम्मो का मर्दन. उसका बड़ा सा तसला जिसमे वो आटा घूथ रही थी, वो उससे छूट कर नीचे गिर गया और सारा आटा हम दोनों की चुदासलीला के कारण किचेन के फर्श पर गिर गया. मैंने कविता को वही फर्श पर लिटा लिया. मन में एक फेंटेसी भी थी की आज तक किसी लड़की को मैंने रसोई में नही पेला है. मैंने कविता को किचेन के फर्श पर लिटा लिया. वहां कालीन बिछी थी तो अच्छा ही लगा रहा था. कविता के सूट को मैंने हाथों से उपर किया तो उसका पतला पतला गोरा गोरा पेट दिखने लगा. मैंने चूम लिया.

फिर उसकी नाभि को मैंने चूम लिया. अपनी जीभ के आगे के नुकीले भाग से मैं जल्दी जल्दी उसके पेट पर लहराने लगा. नौकरानी को बड़ा मजा आया. उसको गुदगुदी भी होने लगी. मैं जान गया की आज इसकी चूत तो मिल ही जानी है. फिर मैंने उसका सूट निकाल दिया. और सलवार का नारा खोल सलवार भी उतार दी. कविता से क्रीम कलर की ब्रा और पैंटी पहन रखी थी. मैंने उतार दी. वो भले ही मेरे घर की नौकरानी थी, पर अंदर से वो कयामत थी. उसके एक एक अंग बड़ी सजावट ने भगवान ने बनाया था. कविता के नग्न रूप को देखकर मैं उस पर पूरी तरह से मुग्ध हो गया था. मैंने उसके दूध पीने लगा. छोटे पर गोल और कसे मम्मे थे. मैंने मुँह में भर लिए और पीने लगा. जादा वक्त नही लगा. कुछ मिनटों में वो चुदने को तयार हो गयी. मैंने अपना मोटा सा खूबसूरत लौड़ा खड़ा किया. उसकी बुर पर मैं झुक गया और पीने लगा.

बड़ी सुन्दर चूत थी उसकी. बुर की फाकों में ३ कलियाँ थी. एक बीच वाली कली, जिसके मध्य में मूतने वाला छेद था. और २ कलियाँ आजू बाजू थी. मैंने ऊँगली से उनकी चूत फैला दी और पीने लगा. कुछ देर चूतपान हुआ. फिर मैंने उसको चोदने लगा. मेरा मोटा लंड आसानी से उसकी बुर में नही जा रहा था. पर फिर भी ठोक पीट के मैंने अपना लंड कविता की चूत में डाल दिया. हम दोनों के हाथ और चेहरे पर अब भी ढेर सारा आटा लगा था. पर मुझे कोई परवाह नही थी. मुझे तो बस उसकी बुर चाहिए थी. अन्ततः मुझे उसको चोदने में सफलता मिल गयी. मैं अपनी नौकरानी को बजाने लगा.

उसके मुँह में लगा आटा उसे और भी खूबसूरत बना रहा था. कितनी सुंदर बात थी. अपने किचेन में लड़की चोदने का ख्वाब मेरा पूरा हो गया था. मैं कविता को लेता रहा. मेरे जोर जोर से पेलने के कारण वो बार बार कालीन पर आगे जाती फिर पीछे होती, आगे जाती फिर पीछे होती. मैंने उसको खूब लिया और आउट हो गया. उसके बाद मैंने ६ महीने तक अपनी नौकरानी को बजाया. एक दिन मेरी माँ ने मुझे रंगे हाथों पकड़ लिया.

बेटा आशुतोष !! तू कभी सुधर नही सकता. अब तेरी शादी करनी ही होगी, वरना तू ऐसी अश्लील हरकतें करता ही रहेगा’ मेरी मम्मी बोली. फिर उन्होंने मेरी शादी कर दी. अब मेरी मस्त जवान औरत मेरे घर में आ चुकी है. मैंने हर दिन उसको ३ ४ चोदता हूँ, तब जाकर मेरा लौड़ा शांत होता है. दोस्तों, आपको ये कहानी कैसी लगी, अपनी राय नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पर जरुर दें.

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मुझे मेरी औरत की सबसे अच्छी सहेली नैना ने चुदवाने का ऑफर दिया

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हेलो दोस्तों, मैं आलोक सिंह चंदेल कानपुर का रहने वाला हूँ. मैं पिछले कई सालों से नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पढ़ रहा हूँ. मैं इसकी सेक्सी कहानियों से बहुत प्रभावित हुआ हूँ. आज मैं भी आपको अपनी मस्त सेक्सी कहानी सुना रहा हूँ. कोई गलती भूल चूक हो तो माफ करियेगा.

नै़ना मेरी बीबी के साथ की स्कूल में पढ़ाती थी. मेरी बीबी नेहा को पढाने का बड़ा शौक था. इसलिए एक दिन नेहा बोली की वो रोज रोज घर में रहकर बोर हो जाती है. इसलिए मैं उसे बाहर किसी स्कूल में पढाने की परमिसन दूँ. तो मैंने भी उसको परमिशन दे दी. नेहा का वक्त अब मजे से कटने लगा. फ़ूड इंस्पेक्टर होने के कारण मुझे तो जरा भी वक्त नही मिलता है. मैं सुबह ९ बजे घर से निकलता था तो रात में ही घर पहुचता था. इस दौरान मेरी बीबी नेहा की दोस्ती नैना सांडिल्य से हो गयी. वो बहुत ही चुलबुली लड़की थी. अभी नैना की शादी नही हुई थी. वो कुंवारी थी.

धीरे धीरे नैना मेरे घर में आने लगी. मेरी उससे जान पहचान बढ़ने लगी. कभी कभी मैं अपनी बीबी नेहा और उसकी सबसे अच्छी दोस्त नैना को बाहर घुमाने भी ले जाता था. हम पिक्चर देखने जाते, माल में शौपिंग करने जाते. कभी कभी हम तीनों किसी डिस्नी पार्क में मस्ती करने जाते. मैं नैना को देखता तो बस उसमे ही खो जाता. बड़ी चुलबुली लड़की थी वो. मन में ख्याल आता की मेरी शादी नैना जैसी लड़की से होनी चाहिए थी. क्यूंकि मैं भी उसकी तरह बड़ा चुलबुला, मनचला और शरारती आदमी था. मैं और नैना दोनों बड़े मजाकिया लोग थे, वहीँ मेरी बीबी नेहा गंभीर नेचर की थी. मजाक तो जरा भी करती ही नही थी. एक दिन शाम को जब हम तीनों मैं, नेहा और नैना बैठे थे तो मैंने मजाक में कह दिया.

यार नैना !! मेरी जोड़ी तो तुमसे ही बननी चाहिए थी. कहाँ मैं इस बोर लड़की से शादी कर बैठा’ मैंने कह दिया. नैना तो बड़ी मजाकिया हमेशा से थी.

तो अब कौन सी देर हो गयी है !! अभी करलो! वो फट से बोली.

मेरी औरत नेहा ने सुना तो कुछ नही कहा. क्यूंकि वो जानती थी की हम दोनों मजाक कर रहें है. एक दिन जब नैना घर पर आई तो मेरी बीबी नेहा मंदिर गयी थी. मैंने उसको फोन लगाया तो पता चला की रास्ते में है और १० मिनट में जा जाएगी. मैंने नैना को बैठने को कह दिया. वो सोफे पर मेरे बगल ही बैठ गयी. मैं छुप छुप कर तिरछी नजरों से नैना को देख रहा था. भरे भरे गाल, काले काले बाल, भरा भरा गोल चेहरा चेहरा, चेहरे पर भरपूर यौवन मैं चाह कर भी खुद को रोक नही पा रहा था. मैं फिर से जब इस बार नैना को देखा तो पाया की वो भी मुझे देख रही थी.

 

हम दोनों की नजरे लड़ गयी. वो भी झेप गयी, मैं भी झेप गया. कुछ देर बाद भी ऐसा ही हुआ. ना जाने क्यूँ मैं उसकी तरह आकर्षित होने लगा था. मैं नही माना और फिर से तिरछी नजरों से नैना की तरफ देखा तो वो भी इधर मेरी ओर देख रही थी. कुछ देर तक हम दोनों की नजरे आपस में फसीं और जुड़ी रही.

नैना! आई लव लू ! मैंने कह दिया.

वो चुप रही. मैंने उसके पास चला गया. ‘ सच में नैना, मेरी शादी तुमसे ही होनी चाहिए थी’ मैंने कहा और उसका हाथ उठाकर अपने होंठों से लगा लिया. मैंने उसका हाथ चूम लिया. मैंने उससे लगके खड़ा हो गया और उसके होंठो को चूमने ही वाला था की वो पीछे हट गयी. नैना ने मुझे रोक लिया.

‘नही आलोक जी, ये सही नही है. आप एक शादी शुदा आदमी है. ये पाप होगा’ मेरी बीबी की सबसे अच्छी दोस्त नैना बोली. कुछ देर में मेरी बीबी नेहा आ गयी. मैं उससे दुर हट गया. नेहा और नैना आपस में बात करने लगी. पर मैं अभी भी उसे चोर नजरों से नैना को ताड़ रहा था. वो मुझे देखती थी तो नजरे फेर लेती थी.

उस रात जब मैं अपनी बीबी नेहा के साथ कमरे में लेटा था की बार बार नैना का ख्याल आता था. बार बार उसकी याद आती थी. कास अगर एक बार उसकी……मिल जाए तो. बस मैं यही बात बार बार सोच रहा था. तभी नेहा आ गयी और प्यार करने को पहने लगी. अभी बीबी को मैंने पूरा नंगा कर दिया. उसके दूध पीने लगा. बार बार नैना का चेहरा मेरी आँखों में समा रहा था. मैंने अपनी बीबी को नैना की कल्पना करते हुए उस रात चोदा. सच में लगा की कोई नई चूत मार रहा हूँ. मैं रात भर नैना को ही सोचता रहा और अपनी बीबी को चोदता रहा. बड़ा आनंद आया मुझे. दिन गुजरने लगे तो बार बार नैना की याद आने लगी. मैंने अपने मोबाइल से नेहा को एक रोमांटिक मेसेज भेज दिया. कोई जवान नही आया. मैंने हार नही मानी. अगले दिन फिर मेसेज भेज दिया. इसी तरह कई मेसेज भेज दिए.

कुछ दिन बाद हम दोनों के बीच की बर्फ पिघल गयी. नैना ने उस तरफ से मुझे जवाब भेजा. और हम दोनों इसी तरह रोमाटिक शेरो शायरी करने लगे. फिर हम चैटिंग करने लगे.

दोगी? मैंने पूछा

हाँ दूंगी’ वो बोली

कसके लूँगा!’ मैंने कहा

कसके दूंगी ! वो बोली

खोल के लूँगा! मैंने इधर से लिखा

पूरा खोल के दूंगी! नैना ने उधर से जवाब दिया.

बात फिट हो गयी. हमदोनो इसी तरह से मजे से सेक्सी चैट करने लगे. मैंने अपनी बीबी की सबसे अच्छी दोस्त को पटा लिया था. अगले दिन मैंने ऑफिस से छुट्टी ले ली. पर नेहा को नही बताया. सीधा नैना के घर पर पंहुचा. वो किराये के घर में कमरा लेकर रहती थी. मैं उसके घर गया और घंटी बजायी. उसने दरवाजा खोला. वो बिल्कुल खिली हुई कली लग रही थी. गोरे गोरे फूले फूले गाल थे उसके. मैं भीतर चला गया. वो बिल्कुल खरबूजा लग रही थी. मैंने उसको पकड़ लिया. उसके गालो पर मैंने चुम्बनों की बौछार कर दी. नैना मुझसे लिपट गयी. उसकी खुशबू मेरी साँसों में समा गयी. अपनी बीबी नेहा को इतने दिनों तक लगातार चोदने के बाद आज एक नई चूत मैं मारूंगा. कितना नसीबवाला हूँ मैं.

मैंने भी नैना से लिपट गया. वो भी मुझसे पूरी तरह से फंस चुकी थी. मैं उसके तोतापरी आमो को दबाने लगा. नैना साड़ी पहनती थी. उस दिन वो डार्क हरे रंग की साड़ी में थी. हल्के हल्के बिंदी बिंदी चमकीले डोट्स थे उसकी साड़ी पर. ब्लौस बेहद कसा था उसका. बड़े बड़े फूल साइज़ के मम्मे मैं गहरे हरे रंग के ब्लौस से उसके खूबसूरत सुडोल गोल गोल उभारों को देख रहा था. मैंने देर नही की और नै़ना के उभारों पर साड़ी के आचल के उपर से हाथ रख दिया. लगा जैसे कितनी बड़ी दौलत आज मुझको मिल गयी. हम और नैना भीतर चले गए. वो भी मुझसे चुदवाने को पुरे मन से तैयार थी. इसलिए मुझे सीधा बेडरूम में ले गयी. हम दोनों मुलायम बिस्तर पर लेट गये.

मैं उसके शराब जैसे होठों से शराब पीने लगा. वो मुझसे अपने अधरों की सुरा पिलाने लगी. आज इसको जी भरके चोदूंगा और स्वर्ग की प्राप्ति करूँगा. मैंने खुद से कहा. नैना बिल्कुल कमांगी लग रही थी. उसके एक एक अंग मुझसे निवेदन कर रहा था की अलोक जी ! मुझे चोदिये प्लीस. प्लीस ! मुझे चोदिये! कुछ देर तक मैं और नैना एक दूसरे से प्रेमालाप करने रहें. मैंने साड़ी के उपर से ही उसके फूल साइज़ के दूध दबा रहा था.

आलोक जी !! मेरी चूत में अपना लौड़ा प्लीस घुसा दीजिए! नैना ने निवेदन किया.

हाँ नैना जी !! मैं आपको कसके चोदूंगा! मैंने कहा

मुझे कसके पेलियेगा आलोक जी, मेरी चूत बहुत प्यासी है! नैना बोली

जैसी आपकी मर्जी नैना जी, तब तो मैं आपको कसके ही पेलूँगा! मैंने कहा.

उसके बाद हम दोनों प्यार और चुदास में अंधे हो गए. मैंने उसका ब्लौस फाड़ दिया मारे चुदास के. क्यूंकि इंतजार मुझसे होता नही. मैंने उसकी साड़ी भी फाड़ दी. उसके बड़े बड़े दूध उपर निकल आये ब्लौस के फटने से. मैंने पीने लगा. एक्स्ट्रा लार्ज साइज़ की साऊथ इंडियन औरतों जैसे मम्मे थे नैना के. आज मैंने पास से देखे. मम्मे के शिखर पर काली काली मादक भुंडीयां और उसके चारों ओर काले काले घेरे. मैंने पीने लगा. उसके तोतापरी आम के जैसे मम्मो को मैंने हाथ में ले रखा था और दबा दबाकर मैं पी रहा था. नैना को बड़ी मौज आ रही थी. वो मेरे उपर ही पसरी हुई थी. नैना बड़ी उत्तेजित थी. उसकी साँस बड़ी तेज चल रही थी. मैं जल्दी जल्दी उसके मीठे शहद रूपी मम्मो से उसका रस पी रहा था. मैने जी भरके अपनी बीबी की सबसे अच्छी दोस्त नैना के दूध पीये. उसके होठो पर मैंने अपनी उँगलियाँ रख दी. वो सिहर गयी.

मैंने कामुक्तावश अपना मोटा सा अंगूठा नैना के मुँह में डाल दिया. वो चूसने लगी. मुझे बड़ा मजा आया. मैं जल्दी जल्दी अपने अंगूठे से उनका मुँह चोदने लगा. जल्दी जल्दी अपना मोटा अंगूठा उसके मुँह में पेलने लगा. वो मस्त हो गयी. नैना के नैनों को देखते हुए उसके मस्त मस्त संतरे जैसे होठों को चोदना बहुत बड़ा आकर्षण था. उसके हसीन लब मुझे उसकी चूत जैसे लग रहें थे. मैं बड़ी देर तक अपने मोटे अंगूठे से नैना के मुँह को चोदता रहा. वो निढाल हो गयी. उसके पैर खुद ब खुद खुल गए.

आलोक जी! अब मुझे चोदिये! और ना तडपाइए!! मैं कबसे आपके लौडे की प्यासी हूँ’ नैना अचानक बोली. उसके दोनों मस्त मस्त गदराये गठीले गोरे गोरे पैर खुद ब खूब खुल गए थे. मैंने अपने कपड़े निकाल दिए. नैना के सिरहाने मैंने अच्छी सी मोटी तकिया लगा दी जिससे वो आराम से मजे से चुदवा सके. मैं उसकी मस्त मस्त चूत पर आ गया और पीने लगा. जब मैं उसके दूध पी रहा था, तो उसकी चूत गीली हो गयी थी. अब जब मैं उसकी चूत पर आया तो देखा की वो तो कबसे बह रही थी. मैंने उसके भोसड़े पर मुँह लगा लिया और पीने लगा. आज पहली बार मैंने नैना के तरल अमृत रस का स्वाद लिया. नमकीन अमृत रस मैंने चखा. फिर किसी कुत्ते की तरह मैं अपनी खुदरी जीभ के आगे के नुकीले भाग से नैना की बुर चाटने लगा. मैं बिल्कुल किसी कुत्ते की तरह उसकी बुर चाट रहा था.

नैना मस्त थी. मस्ती से वो मुझे अपनी चूत पीला रही थी. मैं मस्ती से उसकी बुर पी रहा था. वो अपने हाथों ने अपने दूध दबा रही थी. कुछ देर बाद मैंने अपने मोटे से काले लौडे को उसके भोसड़े पर रख दिया और हाथ से पकड़ के अंदर डाल दिया. मैं नैना को चोदने लगा. वो खुद अपने दूध को दबाने लगी, मैं उसको चोदने लगा. उसके सिरहाने पर मैंने जो तकिया लगाई थी उससे उसे काफी आराम मिल रहा था. वो मजे से चुदवा रही थी. उसकी तर और गीली चूत में मेरा मोटा और काला लौड़ा मजे से सरक रहा था. मुझे बड़ी मौज आ रही थी. मैं दावे से कह सकता हूँ की इतनी मौज नैना को भी आ रही होगी. वो मुझसे किसी लता की तरह चिपकी हुई थी. मैं उसको ठोक रहा था. क्या मस्त माल आज मुझे चोदने को मिली थी. मैं खुद को बहुत किस्मतवाला मान रहा था. वरना आज कल कहाँ कोई लौडिया पटाने को मिलती है. पेलते पेलते मैंने नैना से चिपक गया. उसको खुद में भर लिया और अपनी बीबी की तरह लेने लगा. उफ्फ्फ!! उस दिन तो मौज आ गयी दोस्तों. उसकी चूत पर मेहनत करना बड़ा अच्छा लग रहा था. उसको अपनी बीबी समझ के चोदने बड़ा अच्छा लग रहा था. लगा जैसी उसको चोदने खाने के लिए ही मैंने जन्म लिया है. नैना की सुंदरता को देखके मेरी कबसे तमन्ना थी की उसकी चूत पर मेहनत करने का सौभाग्य मुझको प्राप्त हो. कबसे इक्षा थी ये मेरी. जो आज पूरी हुई दोस्तों.

फिर उसे पेलते पेलते मैं नैना पर पूरी तरह से पसर गया. उसके होठ पर मैंने अपने होठ रख दिए. २ होठ २ होठ अब चार गो गए. नैना के चेहरे पर मैंने अपना चेहरे रख दिया. उनकी आँखें बंद थी, वहीँ मेरी आँखें बंद थी. मेरा चेहरे उसके चेहरे पर रखा हुआ था. हा हा हा करके मैं जोर जोर से उससे ठोक रहा था. पूरा पलंग मेरे मेहनत से चूं चूं कर रहा था. मन ही नही करता था की मैं रुक जाऊं. फिर मेरी रफ्तार अचानक से बढ़ रही. माल छूटने वाला था, मैं जानता था. मैंने जोर जोर धक्के देना शुरू कर दिया. मेरा लंड उसके भोसड़े को जोर जोर से लेने लगा, जैसे किसान हल से जमीन जोत देता था. ठीक वैसे ही मैं अपनी बीबी की सबसे अच्छी दोस्त नैना को ले रहा था. कुछ देर बाद मैंने अपना गरम गरम माल नैना के बड़े से भोसड़े में छोड़ दिया. कहानी आपको कैसी लगी नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पर लिखना ना भूलें.

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