कामवाली भैया भैया बोलती गयी, मैंने उसे चोदता चला गया

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हेल्लो दोस्तों, मैं सूरी मेहरा आप सभी का नॉन वेज स्टोरी डॉट कॉम में बहुत बहुत स्वागत करता हूँ। मैं पिछले कई सालों से नॉन वेज स्टोरी का नियमित पाठक रहा हूँ और ऐसी कोई रात नही जाती तब मैं इसकी रसीली चुदाई कहानियाँ नही पढ़ता हूँ। आज मैं आपको अपनी स्टोरी सूना रहा हूँ।

मैं सोनभद्र जिले के रहने वाला हूँ। कुछ दिनों पहले मेरे घर में एक नई कामवाली आई थी, नाम था रीना। हमारी पिछली वाली कामवाली बहुत सारा पैसा और जेवर लेकर नौ दो ग्यारह हो गयी थी। इसलिए इस बार हम किसी तरह का रिस्क लेना नही चाहते थे। मेरे पापा ने मुझसे कहा की मैं रीना का पुलिस रिकॉर्ड चेक करवा लूँ। मैं थाने गया और रीना का पुलिस रिकॉर्ड चेक करवाया। वो क्लीन थी, उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नही था। पापा उसे ४ हजार रूपए महीना की पगार दे रहे थे। रीना हम लोग के घर काम करने लगी। वो अभी कुवारी थी और उम्र कोई २० साल की होगी।

पतली दुबली अच्छे खासे सेक्सी बदन की वो थी। पहले ही दिन से वो मुझे अच्छी लगने लगी थी और मेरा बहुत जादा दिल उसे चोदने का था। धीरे धीरे मैंने उससे जान पहचान बनाना शुरू कर दी। सुबह वो ८ बजे हमारे घर आ जाती थी, अपने दुपट्टे को गले से निकालकर अपनी कमर पर बाँध लेती थी, नल की टोटी खोलकर वो पानी का बड़ा सा टब पहले भरती थी, फिर सारे बर्तन मांजती थी, फिर वाशिंग मशीन से सारे कपड़े धोती थी। उसे मैं छुपी हुई नजरो से देखता रहता था। मैं उम्र में रीना से कोई २ साल बड़ा ही हूँगा, पर वो शरीफ लड़की थी।

“जादा भारी बाल्टी मत उठाया करो…..बदन में मोच आ जाएगी!!” इस तरह बोलकर मैं उसे लाइन देना था, पर रीना कोई जवान नही देती थी। बस हाँ और ना में ही जवाब दिया करती थी। मैं उसके जिस्म को उपर से नीचे तक घूर घूर के देखा करता था। दिल करता था की अभी इसे पकड़कर अपने कमरे में लाकर इसका बलात्कार कर दूँ, बहुत होगा तो जेल हो जाएगी। इस तरह के रंगीन ख्वाब मेरे दिमाग में हमेशा आते रहते थे। घर के सारे कपड़े धोते धोते उसका सलवार सूट भीग जाता था और बड़े बड़े रसीले ३४” के दूध मुझे साफ़ दिख जाते थे। ओह्ह्ह्ह ..गॉड मैं उन मस्त मस्त दूध को मुंह लगाकर पीना चाहता था।

“रीना, कभी कुछ पैसो का काम पड़े तो मुझसे मांग लेना!!” मैं कहता था और उसे पैसे का लालच देता था, मैंने उसे मार्केट से नये कपड़े दिलवाने की कोशिश भी की थी, पर उसने साफ़ साफ़ मना कर दिया था।

“भैया जी….ये सब अच्छा नही लगता!!” रीना बोली थी और उसने साफ़ साफ़ मना कर दिया था

मैं उम्मीद छोड़ दी थी की कभी वो मुझसे पटेगी। क्यूंकि वो मेरी कोई लाइन नही लेती थी।

एक दिन मैं घर पर थी और पढ़ रहा था, अचानक रीना का छोटा भाई आया, उसने हांफते हाँफते बताया की उसकी माँ घर में दरवाजा बंद करके फ़ासी लगाने जा रही है। ये सुनते ही मैं और रीना जल्दी उसके घर भागे। उसकी माँ का उसके बाप से रात को कोई झगड़ा हुआ था, इसलिए वो फ़ासी लगाने जा रही थी। रीना की माँ ने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया था, सारा मोहल्ला जमा हो गया था। उसकी माँ आज बिलकुल पगला गयी थी और बार बार कह रही थी की आज वो जरुर मर जाएगी। दरवाजा भी इतना मजबूत था की टूटने का नाम नही ले रहा था। रीना ये सब बवाल देखकर रोने लगी और मुझसे बार बार कहने लगी “भैया जी, मेरी माँ को बचा लो….भैया जी..मेरी माँ को बचा लो” वो मुझसे कहने लगी। मुझे भैया बुलाना बहुत चुभ जाता था, मैंने तो उसको चो……..ददददना चाहता हूँ और ये पगली तो मुझसे भैया भैया बुलाती रहती थी। मैं तेजी से काम करने लगा और घर की छत पर चढ़ गया, वहां एक रोशनदान मुझे मिल गया, जो रीना की माँ के कमरे में ही लगा हुआ था। मैंने अपनी शर्ट उताकर अपने सीधे हाथ में गोल गोल लपेट ली और रोशनदान का शीशा तोड़ दिया और अंदर कमरे में कूद गया। रीना की माँ फांसी के फंदे से झूल गयी थी, पर अभी जिन्दा थी, मरी नही थी। उसके हाथ पाँव हिल रहे थे। जिस मेज पर खड़े होकर उसने फांसी लगाई थी, वो वहीँ, पंखे के ठीक नीचे थी। मैं फुर्ती से मेज पर चढ़ गया और मैंने फांसी का फंदा खोल दिया और उसकी माँ को बचा लिया।

उसकी जान किसी तरह बची, मैंने अंदर से दरवाजा खोल। रीना अपनी माँ को जिन्दा देखकर बहुत खुश हुई। अगले दिन जब वो काम पर आई तो बार बार एक ही बात बोल रही थी।

“भैया जी…आपका बहुत बहुत शुक्रिया…कल आपने मेरी माँ को बचा लिया”

“रीना….देख तुझे मैं साफ़ साफ़ बोल रहा हूँ…..कोई घुमा फिराकर नही बोल रहा हूँ। मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ, इसलिए मैंने कल तुम्हारी माँ को बचाया…इसलिए मुझे तुम भैया मत कहा करो। मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ!!” मैंने कह दिया। सुनकर वो झेप गयी, पर अगले दिन से उसने मुझे भैया नही बोला। एक दिन मेरे घर वाले घर पर नही थी, वो सफाई कर रही थी, मैंने रीना को पकड़ लिया और उसके गोरे गोरे गालों को किस करने लगा। वो अंदर ही अंदर मान गयी थी और उसने खुलकर कुछ नही कहा। उसके बाद वो भी मुझे किस करने लगी। इतने दिन से उसे मैं सारा दिन देखा करता था, आज उसको चोदने का मेरा पूरा मूड था। रीना इतनी दुबली और छरहरी थी की मैंने उसे उसकी पीठ और घुटनों के नीचे हाथ डालकर उसे अपनी गोद में उठा लिया। वो लजा गयी और उसकी नजरें नीचे झुक गयी। मैं बहुत खुसी महसूस कर रहा था की आज इस नई नई चिड़िया की चूत मिलने वाली है। मैं अपनी मस्त चुदासी कामवाली को गोद में लेकर खड़ा था, इसी बीच मैंने उसके गाल पर चूम लिया और फिर गोद में उठाकर उसके रसीले होठ पीने लगा।

हम लोगो के बीच में एक गहरी ख़ामोशी थी जो आज ये कह रही थी की रीना आज चुदने वाली है। उसका वजन कोई ५५ किलो होगा, मेरे हाथ में दर्द होने लगा तो मैं उसे अपने कमरे में ले गया और अपने लक्जरी बेड पर मैंने उसे पटक लिया। फिर मैंने भी उसके पास लेट गया, कामवाली रीना बार बार अपना मुंह छिपा रही थी। वो हंस रही थी, ठीठोली कर रही थी, वो मुस्की का राज ये था की वो जानती थी की हम दोनों के बीच में आज कुछ होने वाला है।

“भैया जी….मुझे शर्म आती है!!” रीना बोली

“अरी जान….आजकल सब लडकियाँ अपने बॉयफ्रेंड्स से कह कहकर चुदवाती है….एक तुम हो की शर्म कर रही हो!” मैंने कहा

बड़ी मुस्किल से मैंने उसका हाथ रीना के चेहरे से छुडाया और फिर अपना चेहरा मैंने उसके चेहरे पर टिका दिया।मेरे मुंह उसके मुंह पर था और मैंने उसके रसीले होठ का स्वाद ले रहा था। मेरी मस्त चुदक्कड़ कामवाली का चेहरा बता रहा था की आज वो किसी को अपने रसीले होठों का चुम्बन पहली बार दे रही है। ये बात मुझे साफ़ साफ उसकी मुस्की से पता चल गयी थी। मैंने बेड पर उसके हाथ फैला दिये और उसकी दोनों कलाई को अपने हाथ से कसकर पकड़ लिया। क्यूंकि बार बार वो अपने हाथ से मुझे धकिया रही थी। उसके बाद जो १५ २० मिनट तक मैंने जी भरकर उसके रसीले होठ चुसे और रीना की सांसो की खुसबू ली। कुछ देर में ही रीना चुदने को तैयार हो गयी। मैंने उसके दूध को छूने लगा और दबाने लगा, उसकी हंसी रुक नही रही थी।

“रीना ……क्या तुम कभी चुदी हो??” मैंने पूछा

“नही….” उसने आँखे बंद करते हुए ही कहा, मुस्की मारते हुए

“क्यों…..” मैंने पूछा

“…..कभी कोई चोदने वाला मिला ही नही भैया जी..” रीना अपनी आँखें बंद करती हुई बोली

“कितनी बार कहा की हम दोनों बॉयफ्रेंड और गर्लफ्रेंड है…..भैया जी मत कहा करो!” मैंने कहा

“कोई बात नही भैया जी….आप मुझे कसकर चोद लो…मेरी आदत आपको भैया जी ही कहने की हो गयी है…इससे कोई फर्क नही पड़ता है!!” रीना बोली

“अच्छा….” मैंने कहा

उसके बाद मैं उसके दूध तेज तेज दबाने लगा। धीरे धीरे मैंने उसका सलवार सूट निकाल दिया। उसने बहुत सस्ती वाली चड्ढी और ब्रा पहन रखी थी, मार्किट में ये ३० ४० रूपए की मिलती है। मैंने अपने सारे कपड़े निकाल दिए और फुल नंगा हो गया। मेरा लंड ७ इंच का था और बहुत मोटा था, रीना की बुर चोदने को मेरा लंड पूरी तरह से तैयार था। रीना से अपनी आँखें खोली ही नही और बंद ही रखी। मैंने उसके मस्त मस्त सफ़ेद और बड़े सुंदर सुडौल दूधो को हाथ में ले लिया और तेज तेज दबाने लगा। रीना बार बार अपने रसीले होठो को अपने दांतों से काट लेती थी, जैसे मैं उसके दूध को किसी ट्रक के हॉर्न की तरह दबाता था। दोस्तों, उस दिन मैंने पूरा मजा ले लिया और अपनी कामवाली रीना के दूध मजे लेकर दबा लिए। फिर मुंह में लेकर मजे सी पिने लगा। रीना “आआआआअह्हह्हह….ईईईईईईई…ओह्ह्ह्हह्ह…अई..अई..अई….अई..मम्मी” करके चिल्लाने लगी। मैने उसके मम्मे को मुंह में भर लिया और मजा लेकर किसी रसीले मीठे आम की तरह तेज तेज चूसने लगा। आज तो मजा आ गया था दोस्तों। उसके बाद मैं मैंने रीना को बैठा लिया और अपना लेट गया।

“रीना …..आजा मेरा लंड चूस!!” मैंने कहा

“भैया …..हम नही जानते है की कैसे लंड चूसा जाता है!!” मेरी कामवाली रीना बोली

मैंने तुरंत अपना फोन लिया और उसको लंड चूसने वाला एक विडियो दिखाया। फिर वो झुक गयी और उसने मेरे लंड को मुंह में ले लिया और चूसने लगी। मेरा ७” का लंड बहुत मोटा और बहुत शानदार था। रीना मेरे सुपाड़े को जीभ हिला हिलाकर चाटने लगी और मेरे लंड से खेलने लगी। हालाँकि वो अभी भी शर्मा रही थी, पर मेरी जिद के सामने उसकी एक ना चली। कुछ देर बाद तो उसने मेरा पूरा ७ इंची लंड अपने मुंह में ले लिया और मजे से चूसने लगी। अब धीरे धीरे वो चुदाई के सारे नियम अच्छी तरह समझ और जान रही थी। वो अपनी सिर हिला हिलाकर मेरा लौड़ा चूस रही थी। रीना के होठ की मीठी और नशीली रगड़ से मेरे लंड की एक एक नस फूल गयी थी। अब वो उसकी बुर चोदने को पूरी तरह से तैयार हो गया था।

इसी बीच मैं बेड पर खड़ा हो गया, और मैंने बैठी हुई रीना के मुंह में लंड डाल दिया और उसके सर को मैंने दोनों कान के पास से पकड़ लिया और जल्दी जल्दी उसका मुंह चोदने लगा। आह्हह्हह्हह्हह….दोस्तों, मैं आपको बता नही सकता की मुझे कितना जादा सुख मिल रहा था अपनी कामवाली रीना का मुंह चोदने में। मैंने कसकर उसके सिर को पकड़ रहा था और जल्दी जल्दी कमर आगे पीछे चलाकर उसका मुंह चोद रहा था। मेरा ७ इंची मोटा लंड जब रीना के मुंह में जाता था तो सीधा गले तक पहुच जाता था और नीचे ने मोटा लंड गले में साफ़ साफ उभरता हुआ दिखता था। इसी तरह मैंने १५ मिनट रीना का जब मुंह चोदा तो मेरा कंट्रोल छूट गया और मेरा माल फच्च फच्च उसके मुंह में ही निकल गया। वो मेरा माल बाहर थूकने लगी।

“माँ की लौड़ी…..ये क्या कर रही है…पी जा….पी जा…..इसके थूकते नही है!!” मैंने रीना को समझाया

मेरे दबाव में आकर वो मेरा सारा माल बेमन से पी गयी। मैंने उसे बिस्तर पर वापस लिया दिया और उसकी चूत पीने लगा। रीना ने अपनी सारी झांटे अच्छे से साफ़ कर ली थी, चूत चिकनी और साफ़ थी। मैं मजे से उसकी चूत पीता रहा, एक एक चूत की फांक को मैं मजे से पी रहा था, फिर मैंने उसकी चूत की पंखुड़ी को खोल दिया और सील बंद चूत को मजे से पीने लगा। रीना की चूत की सील बंद झिल्ली को मैं मजे से पी रहा था। कुछ देर बाद मैंने अपना मोटा लंड उसकी चूत की सीलबंद झिल्ली पर लगा दिया और जोर का धक्का मारा। रीना की चूत की झिल्ली टूट गयी और मेरा पहलवान लंड अंदर घुस गया, वो “……मम्मी…मम्मी….सी सी सी सी.. हा हा हा . ऊऊऊ ….ऊँ..ऊँ…ऊँ…उनहूँ उनहूँ..” करके चिल्लाने लगी।

मैंने उसकी कलाई कसकर पकड़ रखी थी, मैं अपनी कामवाली रीना को मजे से चोदने लगा। उफ्फ्फफ्फ्फ़…उसकी बुर कितनी कसी थी, मुस्किल से मेरा लंड अंदर बाहर हो पा रहा था। फिर मैं धीरे धीरे रीना को चोदने लगा। धीरे धीरे उसकी चूत रवां हो गयी और मैं तेज तेज उसके भोसड़े में लंड देने लगा। हर लौंडिया की तरह रीना ने भी अपने दोनों पैर किसी बतख की तरह उठा दिए और चुदवाने लगी। उसकी आँखें बंद थी और वो “अई…अई….अई……अई, इसस्स्स्स्स्स्स्स् उहह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्” की आवाज वो बार बार निकाल रही थी। कुछ देर बाद मैं उसे तेज तेज ठोकने लगा। मेरी कमर अपने आप नाच नाचकर उसकी बुर को मजे से चोद रही थी। रीना बार बार अपनी गांड उठा देती थी। कुछ देर बाद तो मैं उसे और जल्दी जल्दी ठोकने लगा, रीना अपनी गांड हवा में उठाने लगी।

मैं उसकी चूत की मस्त सरवीसिंग कर रहा था, अपने सीधे हाथ से मैं उसकी भरी हुई चूत के दाने को जल्दी जल्दी घिस रहा था और उसे तेज तेज चोद रहा था। बुर के दाने और ओंठो को घिसने से उसे बहुत नशीली उतेज्जन हो रही थी। फिर मैंने अपने दोनों हाथ रीना की चूची पर रख दिया और उसके निपल्स को मजा लेकर मसलने लगा। वो “ओह्ह्ह्ह माँ… अहह्ह्ह्हह उहह्ह्ह्हह…. उ उ उ…” की आवाज बार बार निकाल रही थी। मैंने उसे आधे घंटे से जादा देर तक चोदा और फिर उसकी रसीली चूत में ही माल गिरा दिया।

“भैया जी….आप बहुत मस्त ठुकाई करते है!!” चुदवाकर मेरी कामवाली रीना बोली

अब वो मुझसे पूरी तरह से पट चुकी है और रोज चूत देती है। ये कहानी आप नॉन वेज स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

मेरी नौकरानी अगर खूबसूरत नही होती तो मैं उसको नही लेता

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मैं आशुतोष यादव आप सभी सेक्सी कहानी पसंद करने वाले दोस्तों को नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पर अपनी सेक्सी कहानी सुना रहा हूँ. मैं एक बेहद ही शरीफ लड़का हूँ. मैं गोरखपुर का रहने वाला हूँ. पर मैं इतना शरीफ और नेक आदमी पहले नही था. अपनी जवानी की उम्र में मैं एक बेहद बिगड़ैल लड़का हुआ करता था. सीटियाबाजी और छिन्दरई में मैं नंबर एक था. कमीना बनने की सुरुवात मैंने अपने घर से की थी. जब एक दिन मेरी बहन सो रही थी की मैंने उसको जबरन पकड़ लिया था. उसके मुँह में मैंने रुमाल बाँध दिया था. मैंने उसको चोद दिया था. दूसरी बार अपनी जवान बहन को चोदने जा रही रहा था की घर के लोग आ गए थे और मुझे घर से भागना पड़ा था. पुरे १ महीना बाद मैं घर से लौट के आया था. क्यूंकि मेरे पापा ने कह दिया था की मैं जैसे ही लौट के आयुं, तुरंत पुलिस को फोन कर दिया जाए.

मैंने बहुत बुरा कांड कर दिया था. मेरी मम्मी और मेरे घर के सब लोगों ने मुझसे बोलना बंद कर दिया था. मैं अपने किये पर शर्मिंदा था. जो बहन मुझे राखी बांधती थी, मैंने उसको ही चोद दिया था. उसके मम्मे भी मैंने पी लिए थे. बाद में मेरी माँ ने पापा से बहुत गुजारिश की, तब उन्होंने मुझे माफ किया. वरना वो तो मुझे जेल में भिजवाना चाहते थे. मेरी २ बहने और थी, कुल ३ बहने थी. मैंने सबसे बड़ी को पेला था. इस वजह से अब मेरी २ छोटी बहने मुझसे डरने लगी थी. वो अब रात में कभी भी मेरे पास नही आती थी. वो मुझसे डरती थी. कुछ दिन तक मैंने अच्छा बर्ताव किया. फिर मेरे बड़े भाई की शादी हो गयी. घर में एक बड़ी सुन्दर भाभी आई. उनका नाम एकता था. बाप रे !! क्या गजब का सामान थी वो.

जब एकता भाभी की शादी के कुछ दिन हो गए तो उनको मेरे बारे में पता चला. वो मुझसे दोस्तों की तरह बात करने लगी. मेरे लिए चाय काफी लाने लगी. मेरी पसंद की चीज लाने लगी. मुझे हैरत हुई ये सब देखकर. फिर धीरे धीरे मुझे पता चला की वो मुझे पसंद करती है. एक दिन जब घर पर कोई नही था तो वो मेरे पास आई. उन्होंने रात में पहनी जाने वाली मैक्सी दिन में पहन रखी थी. मैक्सी में वो गजब का सामान लग रही थी.

आशुतोष !! एक बात कहूँ. किसी से कहोगे तो नही?? एकता भाभी बोली

बताओ भाभी!! क्या बात है? मैंने कहा

आशुतोष तुम्हारे भैया नपुंसक है. मुझे ले ही नही पाते है. मुझको चोदने से पहले ही वो झड जाते है. मुझको १ घंटे क्या चोदेंगे, २ मिनट में आउट हो जाते है. अगर ऐसे ही चलता रहा तो मुझे कोई बच्चा पैदा ना होगा. समाज में तुम्हरे भैया की कितनी बदनामी होगी. इसलिए अब तुम ही मुझे बच्चा दे सकते हो’ भाभी रोते रोते बोली. मैं उनकी बातों में आ गया. वो मुझे अपने कमरे में ले आई. भाभी ने अपनी मैक्सी जब उतारी तो मुझे बड़ी मौज आ गयी. इतनी मस्त माल मैंने आज तक नही चोदी थी. बड़े बड़े चुच्चे थे उनके. मुझे लग रहा था की वो खुद चुदने के मूड में थी. क्यूंकि वो बहुत जादा सपोर्ट कर रही थी. खुद उन्होंने अपने कपड़े निकाले. ब्रा और पैंटी भी निकाल दी.

मुझे कुछ करने का मौका ही नही दिया. मेरे सामने नंगी होकर लेट गयी. मेरा मुँह उन्होंने अपने चुच्चे में दे दिया. मैं गटागट पीने लगा. ओह्ह क्या गदराये खूबसूरत मम्मे थे एकता भाभी के. मैंने खूब पिए. उनके मम्मे मैंने चोदे भी. फिर उनकी चूत पर आ गया. एकता भाभी की खूब बड़ी से फूली हुई चूत थी. मैंने उनकी चूत पी. फिर उनको लेने लगा. कुछ देर बाद भाभी की कमर किसी पुर्जे की तरह मटक रही थी. किसी स्प्रिंग की तरह उपर आती, फिर नीचे जाती. लगा जैसे कोई मशीन हो. जब मैं एकता भाभी को चोदने लगा तो वो मचलने लगी. मैं जोर जोर से हौककर उनको चोदने लगा. उनके चुच्चे जोर जोर से किसी बड़ी गेंद की तरह मचलने और हिलने लगी. भाभी ने अपने हाथों से अपने दूध को पकड़ लिया. मैं उनको मस्ती से चोदने लगा. भाभी सीधा मेरी आँखों में देख रही थी, वो मुझसे पूरी तरह से फंस चुकी थी.

मैंने भी उनकी आँखों में देखते हुए उनको चोद रहा था. बहुत मजा आया दोस्तों उस दिन. मुझे लगा की जैसे मुझे जन्नत मिल गयी हो. फिर उसके बाद जब हमारे घर पर कोई नही होता, हम देवर भाभी ऐयाशी करते. ऐसे कोई १ साल तक चला. एकता भाभी मुझसे चुदवाती रही. मैं उनको चोदता रहा. जब हम दोनों मौका पाये रंगरलिया मनाते. एक सी एक दिन मैं भाभी के कमरे में उनको पेल खा रहा था, उनकी चिकनी मलाई जैसी योनी में मैं अपना मोटा सा लौड़ा डाल कर चोद रहा था की अचानक ने मेरा परिवार बाहर से आ गया. मेरे पापा, मम्मी, बड़े भैया सब आ धमके. पापा से घंटी भी बजाई, पर शायद मैं सुन नही पाया. गमले के नीचे रखी चाभियों से मेरे पापा ने दरवाजे का लोक खोल लिया. सारा परिवार अंडर चला आया. मैं भाभी की दोनों सफ़ेद गोरी गोरी टाँगे उठाकर अपने कंधे पर रखी थी. उनको गचागच पेल रहा था. की इतने में बड़े भैया और पापा मेरे कमरे में ऐसे ही चलते चलते आ गयी.

आशुतोष!! ये सब क्या क्या?? मेरे पापा ने मेरे कमरे का दरवाजा खोल और जोर से चिल्लाये.

दोस्तों, मेरी तो गाड़ ही फट गयी. मैंने तुरंत उछल के किराने हट गयी. भाभी नंगी थी, मेरे पापा से उनको भी नंगे नंगे देख लिया. भैया का तो खून ही खौल गया. एकता भाभी ने तुरंत एक पास पड़ी चादर खींच ली और अपने मस्त चुदासे और लौडे के प्यासे बदन को ढक लिया. मेरे पापा का भी खून खौल गया. पापा और बड़े भैया लाठी लेकर आये और हम देवर भाभी को खूब मारा. बड़े भैया को इतने जादा गुस्सा हुए की अगले दिन भाभी को उनके मायके भेज दिया. पर मैं कहा भाग जाता. मैं कोई लड़की नही था जो अपने मायके भाग जाता.

आशुतोष!! तेरे पापा तेरे गंदे कारनामो के कारण तुझको सारी प्रोपर्टी से बेधकल कर रहें है. तूने पहले अपनी बहन को सोते में चोदा, फिर अपनी सगी भाभी को चोदा. बेटा!! तू इंसान है या राक्षस?? मैं भी तुझसे सारे रिश्ते खत्म कर रही हूँ. मेरी माँ बोली और रोने लगी. कुछ दिन बाद ये बवंडर किसी तरह शांत हुआ. मेरे घर में एक नई नौकरानी आ गयी. उनका नाम कविता था. बहुत प्यारी सामान थी वो. जब सब कुछ फिर से सही हो गया तो फिर से मेरा लैंड खड़ा होने लगा. बिल्कुल दुबली दुबली पलती पतली लड़की थी. अभी तक मैंने अपनी सगी बहन को चोदा था, अपनी भाभी को लिया था, पर नौकरानी कविता उन सबसे अलग थी. बड़ी मस्त माल थी वो. वो अभी १९ साल की माल थी.

उसे देखते हे मेरा लौड़ा खड़ा हो जाता था. मन होता था की इसे बस एक बार गोद में उठा लूँ और प्यार से चोदू. जहाँ मेरी बहन और भाभी भरे हुए बदन वाली थी, वहीँ, कविता इकहरे बदन वाली थी. उसकी आँखें बड़ी सेक्सी और नशीली थी. उसकी बहुत अदाएं भी थी. उसके स्तन बड़े सधे हुए थे. ना बहुत छोटे और ना बहुत बड़े. नौकरानी कविता चोदने खाने और पेलने के लिए बिल्कुल एक परफेक्ट माल थी. उसको देखते ही मेरा लौड़ा खड़ा हो जाता था. कविता नेपाल की रहने वाली थी. वो सुबह सुबह पुरे घर में पोछा लगाती थी. मेरे कमरे में भी वो पोछा लगाने आती थी. वो फर्स पर बैठ जाती थी और झुक झुक कर पुरे कमरे में पोछा लगाती थी. उनके मस्त मस्त मम्मे उसके सूट के खुले हुए गले से दिखते थे. मेरा लंड खड़ा हो जाता था. मैंने सोच किया की मैं उनको पटाऊंगा. एक दिन जब कविता मेरे कमरे में आई तो मैंने उसका हाथ पकड़ लिया.

आशुतोष बाबा !! ये क्या? आप ये क्या कह रहें हो?? कविता ने सहमते हुए पूछा.

कविता ! क्या तू जानती है की तू इकदम कश्मीर की कली दिखती है. ये ले कुछ पैसे अपने लिए अच्छा सा सूट खरीद लेना मैंने २००० का नोट उसे दे दिया. कविता को पैसों की जरुरत भी थी. इसलिए उसने पैसे ले लिए. मैं इसी तरह उसे मदद कर देता. सोचा की जब उसे चोदूंगा तो सारे पैसे वसूल हो जाएँगे. एक दिन मुझे बढ़िया मौका मिल गया. मैं और नौकरानी कविता अकेली थी. वो किचेन में खाना बना रही थी. मैं उसके पास और मीठी मीठी बातें करने लगा. वो भी मुझसे बड़े प्यार से बातें करने लगी. मैंने उसका हाथ पकड़ लिया. कविता भी अभी बिल्कुल जवान थी.

ये क्या साहब?? वो बोली मेरे हाथ पकड़ने पर.

कविता! क्या तू किसी से प्यार नही करती? क्या तेरा कोई यार है?? मैंने उसे मस्का मारा.

नही साहब, कोई मिला ही नही! वो बोली

तो फिर मुझको अपना यार बना ले! मैंने उससे कहा

वो लजा गयी. मैं जान गया की काम बन गया है. कविता आटा घूथ रही थी. उसके दोनों हाथ में आटा लगा हुआ था. मैंने उसकी कमर में पीछे से हाथ डाल दिया. वो मचल गयी. मैंने उसके गालों पर पप्पी ले ली. वो बचाव करने लगी, आटा से सने हाथ से मुझे रोकने लगे. मेरे भी हाथो और गालों पर आटा लग गया. वो हँसने लगी. मैं जान गया की लड़की पट गयी है. मैं कुछ नही देखा और उसके गोरे गोरे चिकने चिकने गालों पर धडाधड चुम्मा लेने लगा. फिर मैंने कविता के मम्मे पर हाथ रख दिए. उसको मजा आया. मैं उसके दूध दाबने लगा. फिर चुम्मा और फिर नौकरानी कविता के मम्मो का मर्दन. उसका बड़ा सा तसला जिसमे वो आटा घूथ रही थी, वो उससे छूट कर नीचे गिर गया और सारा आटा हम दोनों की चुदासलीला के कारण किचेन के फर्श पर गिर गया. मैंने कविता को वही फर्श पर लिटा लिया. मन में एक फेंटेसी भी थी की आज तक किसी लड़की को मैंने रसोई में नही पेला है. मैंने कविता को किचेन के फर्श पर लिटा लिया. वहां कालीन बिछी थी तो अच्छा ही लगा रहा था. कविता के सूट को मैंने हाथों से उपर किया तो उसका पतला पतला गोरा गोरा पेट दिखने लगा. मैंने चूम लिया.

फिर उसकी नाभि को मैंने चूम लिया. अपनी जीभ के आगे के नुकीले भाग से मैं जल्दी जल्दी उसके पेट पर लहराने लगा. नौकरानी को बड़ा मजा आया. उसको गुदगुदी भी होने लगी. मैं जान गया की आज इसकी चूत तो मिल ही जानी है. फिर मैंने उसका सूट निकाल दिया. और सलवार का नारा खोल सलवार भी उतार दी. कविता से क्रीम कलर की ब्रा और पैंटी पहन रखी थी. मैंने उतार दी. वो भले ही मेरे घर की नौकरानी थी, पर अंदर से वो कयामत थी. उसके एक एक अंग बड़ी सजावट ने भगवान ने बनाया था. कविता के नग्न रूप को देखकर मैं उस पर पूरी तरह से मुग्ध हो गया था. मैंने उसके दूध पीने लगा. छोटे पर गोल और कसे मम्मे थे. मैंने मुँह में भर लिए और पीने लगा. जादा वक्त नही लगा. कुछ मिनटों में वो चुदने को तयार हो गयी. मैंने अपना मोटा सा खूबसूरत लौड़ा खड़ा किया. उसकी बुर पर मैं झुक गया और पीने लगा.

बड़ी सुन्दर चूत थी उसकी. बुर की फाकों में ३ कलियाँ थी. एक बीच वाली कली, जिसके मध्य में मूतने वाला छेद था. और २ कलियाँ आजू बाजू थी. मैंने ऊँगली से उनकी चूत फैला दी और पीने लगा. कुछ देर चूतपान हुआ. फिर मैंने उसको चोदने लगा. मेरा मोटा लंड आसानी से उसकी बुर में नही जा रहा था. पर फिर भी ठोक पीट के मैंने अपना लंड कविता की चूत में डाल दिया. हम दोनों के हाथ और चेहरे पर अब भी ढेर सारा आटा लगा था. पर मुझे कोई परवाह नही थी. मुझे तो बस उसकी बुर चाहिए थी. अन्ततः मुझे उसको चोदने में सफलता मिल गयी. मैं अपनी नौकरानी को बजाने लगा.

उसके मुँह में लगा आटा उसे और भी खूबसूरत बना रहा था. कितनी सुंदर बात थी. अपने किचेन में लड़की चोदने का ख्वाब मेरा पूरा हो गया था. मैं कविता को लेता रहा. मेरे जोर जोर से पेलने के कारण वो बार बार कालीन पर आगे जाती फिर पीछे होती, आगे जाती फिर पीछे होती. मैंने उसको खूब लिया और आउट हो गया. उसके बाद मैंने ६ महीने तक अपनी नौकरानी को बजाया. एक दिन मेरी माँ ने मुझे रंगे हाथों पकड़ लिया.

बेटा आशुतोष !! तू कभी सुधर नही सकता. अब तेरी शादी करनी ही होगी, वरना तू ऐसी अश्लील हरकतें करता ही रहेगा’ मेरी मम्मी बोली. फिर उन्होंने मेरी शादी कर दी. अब मेरी मस्त जवान औरत मेरे घर में आ चुकी है. मैंने हर दिन उसको ३ ४ चोदता हूँ, तब जाकर मेरा लौड़ा शांत होता है. दोस्तों, आपको ये कहानी कैसी लगी, अपनी राय नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पर जरुर दें.

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मैंने कुछ ही दिन पहले अपना कमरा चेंज किया था… काफ़ी अरसे बाद घर में ऊल-ज़ुलूल नौकरानियों के स्थान पर एक बहुत ही सुंदर और सेक्सी नौकरानी काम पर लगी, 22-23 साल की उमर होगी उसकी, सांवला सा रंग था, मीडियम हाईट और सुडौल चूचियाँ..शादी शुदा थी, उसका पति कितना किस्मत वाला था, साला खूब चोदता होगा, यही सोच कर मैं झड़ जाता था।चूचियाँ ऐसी कि बस दबा ही डालो, ब्लाउज़ में समाती ही नहीं थी, कितनीभी वो अपनी साड़ी से ढकती, इधर उधर से ब्लाउज़ से उभरती हुई उसकी चूचियाँ दिख ही जाती थी। झाड़ू लगाते हुए जब वो झुकती तब ब्लाउज़ के गले से चूचियों के बीच की दरार छुप न पाती।एक दिन जब मैंने उसकी इस दरार को तिरछी नज़र से देखा तो पता लगा कि उसने ब्रा तो पहनी ही नहीं थी। कहाँ से पहनती, ब्रा पर बेकार पैसे क्यों खर्च किये जायें !जब वो ठुमकती हुई चलती, तो उसके चूतड़ हिलते और जैसे कह रहे हों कि हमें पकड़ो और दबाओ, अपनी पतली सी सूती साड़ी जब वो सम्भालती हुई सामने अपनी चूत पर हाथ रखती तो मन करता कि काश उसकी चूत को मैं छू सकता ! करारी, गरम, फूली हुई और गीली गीली चूत में कितना मज़ा भरा हुआ था ! काश मैं इसे चूम सकता, इसके मम्मे दबा सकता, और चूचियों को चूस सकता और इसकी चूत को चूसते हुए जन्नत का मज़ा ले सकता !लंड मानता ही नहीं था, चूत में घुसने के लिये बेकरार था !लेकिन कैसे?यह तो मुझे देखती ही नहीं थी, बस अपने काम से मतलब रखती और ठुमकती हुई चली जाती। मैने भी उसे कभी एहसास नहीं होने दिया कि मेरी नज़र उसे चोदने के लिये बेताब है, पर अब चोदना तो था ही !मैंने अब सोच लिया कि इसे उत्तेजित करना ही होगा, धीरे धीरे उत्तेजितकरना पड़ेगा वरना कहीं मचल जाये या नाराज़ हो जाये तो भांडा फूट जायेगा।मैंने उससे थोड़ी थोड़ी बातें करनी शुरु की, उसका नाम था पूजा !एक दिन सुबह उसे चाय बनाने को कहा, चाय का गर्म कप उसके नर्म-नर्म हाथों से जब लिया तो लंड उछला। चाय पीते हुए कहा- पूजा, चाय तुम बहुत अच्छी बना लेती हो !उसने जवाब दिया- बहुत अच्छा बाबूजी !अब करीब करीब रोज़ मैं चाय बनवाता और उसकी बड़ाई करता। फिर मैंने एक दिन कॉलेज जाने के पहले अपनी शर्ट प्रेस करवाई।”पूजा, तुम प्रेस भी अच्छा ही कर लेती हो।”थोड़ी बात करने पर पता चला कि उसका पति शराबी था और रोज़ पी कर आता था और चोदने की बजाय आकर सो जाता था…क्या दुःख भरी कहानी थी !यहाँ जिसको यह चूत मिली थी, वो तो चोदता ही नहीं था और जिसे नहीं मिली, वो देख कर मुठ मार कर ही काम चला रहा था।धीरे धीरे उसके साथ मेरी बातें और गहरी होने लगीं..एक दिन मैंने मौका देख पूछ ही लिया- ..तुम्हारा आदमी पागल ही होगा?अरे उसे समझना चाहिये, इतनी सुंदर पत्नी के होते हुए शराब की क्या ज़रूरत है?उसने कुछ कुछ समझ तो लिया था लेकिन अभी एहसास नहीं होने दिया..मैं उसको चोदने के मौके की ताक में रहने लगा और आखिर एक दिन ऐसा एक मौका लगा।कहते हैं कि ऊपर वाले के यहाँ देर है लेकिन अंधेर नहीं !रविवार का दिन था, मकान कालिक की पूरी फ़ैमिली एक शादी मैं गयी थी, मेरे दिल में लड्डू फूटने लगे और लौड़ा खड़ा होने लगा।वो आई, दरवाज़ा बंद किया और काम पर लग गई। इतने दिन की बातचीत से हम खुल गये थे और उसे मेरे ऊपर विश्वास सा हो गया था इसीलिये उसने दरवाज़ा बंद कर दिया था।मैंने हमेशा की तरह चाय बनवाई और पीते हुए चाय की तारीफ़ की। मन ही मनमैंने निश्चय किया कि आज तो पहल करनी ही पड़ेगी वरना गाड़ी छूट जायेगी।पर कैसे पहल करें?फिर मैंने उससे उसकी चुदाई के बारे में पूछताछ शुरू की, पूछा- तेरा कोई बच्चा नहीं है? तेरा पति ठीक भी है या कुछ कमी है?इत्ना पूछने पर भी उसने कुछ नहीं कहा और मुस्कुरा कर मेरे सवालों का जवाब देती रही, बोली- शराब के नशे में क्या बच्चे हो सकते हैं।मैंने सोचा कि लौंडिया पट चुकी है, चुदाई में देर नही होनी चाहिए..फिर मैंने जानबूझ कर अपने सारे कपड़े उतारे और लेट गया, फिर उसे आवाज़दी।वो मेरे कमरे में आई और मेरे खड़े लंड को देख कर शरमा गई।मैं बोला- आओ रानी.. ये तुम्हारा ही इंतज़ार कर रहा है..वो धीरे धीरे मेरी तरफ बढ़ी और मेरा लंड सहलाने लगी..मैं बोला- इससे पहले कि कोई आ जाए, तुम इसका पूरा मज़ा लो…फिर मैंने उसे धीरे धीरे नंगा कर दिया.. उसके चूचे तो जैसे हेडलाइट्सजैसे लग रहे थे और चूत गुलाब जैसी..वो मेरे खड़े लंड को अपनी चूत पर टिका कर बैठ गई.. मेरा पूरा का पूरालंड उसके अन्दर घुस गया.. वो उछल उछल के चुदवाने लगी.. मैंने मज़े के लिए उसकी चूत चाटने को कहा.. वो खुश हो गयी.. फिर मैंने उसे जवानघोड़ी बनाकर चोदा और बोला- तू तो मस्त रंडी है रे ! पता नहीं तेरा पति तुझे क्यों नहीं चोदता…वो बोली- एक आप ही मेरा दर्द समझते हैं.. आप जब भी कहोगे, जहाँ भी कहोगे, मैं चुदने के लिए हमेशा तैयार रहूँगी…मैं उसे लगातार चोद रहा था और वो मज़े ले रही थी। काफी देर तक इस तरहमैंने उसे चोदा.. फिर जैसे ही मैं झड़ने वाला था, उसने मेरा लंड मुँहमें ले लिया और सारा माल पी गई..मैं थक चुका था लेकिन वो साली रंडी अब भी चुदने के लिए उतारू थी..मैं बोला- आज की क्लास यहीं तक, बाकी की पढ़ाई कल करेंगे..फिर मैंने अपना लंड साफ़ करके उसे अपनी जेब में से निकाल के 500 रुपये दिए और बोला- रख लो, काम आयेंगे..वो खुश हो गई..वो दिन था और आज का दिन है, हर दूसरे तीसरे दिन मैं उसकी चुदाई करता हूँ और बदले में मैं कभी कभार कुछ पैसे उसे दे देता ह

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